रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष को खत्म कराने की कोशिशों के तहत भारत अब केवल शांति की अपील करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए दोनों पक्षों के साथ सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 4 अक्टूबर को इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली इस लंबे खिंचते युद्ध का पूर्ण अंत देखना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की कोशिश रूस और यूक्रेन को सीधे बातचीत की मेज पर लाने की है, ताकि संवाद के जरिए एक टिकाऊ और शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। इस रणनीति के तहत दोनों देशों के साथ विभिन्न स्तरों पर लगातार चर्चाएं चल रही हैं और युद्ध रोकने के व्यावहारिक रास्तों की तलाश की जा रही है।
हमले रोकने और ब्लैक सी में सुरक्षित आवाजाही पर जोर
विदेश मंत्री के अनुसार, दोनों पक्षों के साथ जारी बातचीत में कई संवेदनशील बिंदु शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह संभावना तलाशना शामिल है कि दोनों देश एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले करना बंद कर दें। इसके साथ ही ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को फिर से बहाल करने पर भी गहन चर्चा हो रही है। जयशंकर ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्यान्न और ऊर्जा के निर्बाध निर्यात को सुनिश्चित करना भी इस बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत का साफ संदेश है कि इस विनाशकारी टकराव को लंबा खींचने के बजाय तत्काल युद्धविराम लागू किया जाए और संवाद के रास्ते स्थायी शांति की रूपरेखा तैयार की जाए।
पांचवें वर्ष में पहुंचा टकराव और भारी तबाही
रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह भीषण युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस लंबे दौर में हजारों निर्दोष नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोगों को अपने घरों को छोड़कर पलायन करना पड़ा है। रिहायशी बस्तियों, प्रमुख शहरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इस मानवीय संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को देखते हुए भारत टकराव को जल्द से जल्द थामने के पक्ष में है।
यूक्रेन ने भारतीय प्रस्ताव को बताया सबसे व्यापक
भारतीय विदेश मंत्री का यह बयान यूक्रेन की सकारात्मक प्रतिक्रिया के फौरन बाद सामने आया है। इससे ठीक पहले 2 अक्टूबर को यूक्रेन ने रूस के साथ संभावित युद्धविराम को लेकर मिले चार अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों में भारत की रूपरेखा को सबसे व्यापक और संतुलित करार दिया था। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कीव में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पुष्टि की थी कि उनका देश ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और काला सागर दोनों को लेकर युद्धविराम के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सिबिहा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यूक्रेन को मिले चार अलग-अलग मसौदों में भारतीय प्रस्ताव सबसे व्यापक है, हालांकि उनकी शर्त यह है कि ऊर्जा और समुद्री क्षेत्र दोनों के लिए यह व्यवस्था एक साथ लागू की जानी चाहिए।





















