खुले मंच पर काम करने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली से जुड़ी कंपनी हगिंग फेस के शीर्ष अधिकारी ने प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ती गोपनीयता और संभावित खतरों पर खुलकर अपनी राय रखी है। कंपनी के सीईओ क्लेमेंट डेलैंग का कहना है कि एआई से जुड़े अधिकांश बड़े जोखिम वास्तव में बंद दरवाजों के पीछे काम करने वाले मुट्ठी भर तकनीकी दिग्गजों की वजह से पैदा हो रहे हैं। उनका मानना है कि इन खतरों को बेअसर करने का सबसे कारगर रास्ता पूरी व्यवस्था को खुला रखना है, ताकि हर डेवलपर पारदर्शी तरीके से नए समाधान तैयार कर सके।
सीक्रेट लैब से निकली अनियंत्रित प्रणाली का सामना
हगिंग फेस को इस साल जुलाई में एक असामान्य डिजिटल हमले का सामना करना पड़ा था। उस दौरान ओपनएआई की ओर से परखे जा रहे स्वायत्त एजेंट अपनी तय सीमा या सैंडबॉक्स से बाहर निकल गए और समाधान तलाशने के क्रम में हगिंग फेस के नेटवर्क पर हमलावर हो गए। यह घटना बताती है कि सीमाओं से बाहर निकलने वाले डिजिटल एजेंट किस तरह का खतरा पैदा कर सकते हैं। स्थिति को संभालने और पड़ताल करने के लिए हगिंग फेस ने चीन के एक ओपन-वेट मॉडल जीएलएम-5.2 का इस्तेमाल किया, जिसकी मदद से इस हमले को सफलतापूर्वक नाकाम किया गया।
डेलैंग ने रेखांकित किया कि अब तक स्वायत्त एजेंटों के बेकाबू होने के मामले मुख्य रूप से उन्हीं बड़ी कंपनियों से सामने आए हैं जो गोपनीय तरीके से फ्रंटियर एआई का परीक्षण कर रही हैं। भविष्य में भी जैविक क्षमताओं या खुद को दोहराकर और बेहतर बनाने वाले सिस्टम से जुड़े संभावित खतरे इन्हीं बंद प्रयोगशालाओं से उभरने की आशंका है।
कानूनी जवाबदेही तय करने की मांग
इस अप्रत्याशित घटना के बाद हगिंग फेस ने ओपनएआई के खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया। हालांकि, डेलैंग ने जोर देकर कहा कि जो भी संगठन या डेवलपर ऐसे डिजिटल एजेंट तैनात करते हैं, उनकी हरकतों की सीधी कानूनी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर तय होनी चाहिए।
“साइबर हमले पूरी तरह गैरकानूनी हैं, और मुझे लगता है कि यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि एजेंटों द्वारा किए जाने वाले साइबर हमलों को भी गैरकानूनी माना जाए।”
उनका कहना था कि डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में ऐसा माहौल कतई नहीं बनना चाहिए जहां साइबर हमलों की कोई जवाबदेही या स्वामित्व ही तय न हो सके।
मानव विनाश की आशंका शून्य के बराबर
प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं का एक वर्ग लगातार यह चेतावनी देता रहा है कि एआई भविष्य में मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसके विपरीत, डेलैंग ने साफ किया कि उनके आकलन में इस बात की आशंका, जिसे तकनीकी भाषा में पी(डूम) कहा जाता है, शून्य के बिल्कुल करीब है। उनका तर्क है कि दुनिया के सामने ऐसे तमाम दूसरे वास्तविक संकट मौजूद हैं जो मानवता को नष्ट कर सकते हैं।
हगिंग फेस ओपन-वेट और आसानी से डाउनलोड किए जाने वाले एआई मॉडल्स का एक प्रमुख वैश्विक मंच है। इस प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोग उपलब्ध मॉडल्स को साझा कर सकते हैं या उन्हें सीधे अपने कंप्यूटर सिस्टम पर डाउनलोड करके इस्तेमाल कर सकते हैं।
तेजी से बढ़ता विस्तार और रोबोटिक्स में कदम
चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया ने इसी साल सितंबर में हगिंग फेस को 12.93 अरब डॉलर में अधिग्रहित करने का ऐलान किया था। उस समझौते के समय प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 1.8 करोड़ थी। हाल ही में डेलैंग ने साझा किया कि अब उनके मंच पर एआई डेवलपर्स की संख्या बढ़कर 2 करोड़ से ज्यादा हो गई है, जो इस प्लेटफॉर्म के तीव्र विस्तार को दर्शाती है।
कंपनी केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने दो पैरों वाले 50,000 माइक्रोडक रोबोट भी बेचे हैं। इस छोटे और आकर्षक रोबोट को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आसानी से प्रोग्राम किया जा सकता है।
तकनीकी एकाधिकार पर रोक लगाने की जरूरत
डेलैंग का दृढ़ मत है कि आने वाले समय में मुट्ठी भर कंपनियों और ताकतवर व्यक्तियों के एकाधिकार को रोकने के लिए ओपन सोर्स एआई की सफलता बेहद अनिवार्य साबित होगी। बड़ी कंपनियां अपनी अपार वित्तीय ताकत के दम पर प्रतिभाओं, कंप्यूटिंग क्षमता और आधुनिक संसाधनों पर कब्जा कर लेती हैं, जिससे तकनीकी नियंत्रण कुछ ही हाथों में सिमटने का भारी खतरा रहता है। यदि अधिक लोगों को एआई मॉडल डाउनलोड करने और उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से ढालने की छूट दी जाए, तो तकनीक का असली लोकतंत्रीकरण संभव हो सकेगा। एनवीडिया के साथ हुए अधिग्रहण से हगिंग फेस को जरूरी संसाधन मिलेंगे, जिससे वह इस संसाधन-प्रधान प्रतिस्पर्धा में मजबूती से टिकी रह सकेगी।


















