अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की आवाज एक बार फिर और अधिक बुलंद होने जा रही है। देश भर में हुए हालिया संसदीय चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी से नियंत्रण छीनते हुए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव के बीच भारतीय मूल के छह सांसद प्रतिनिधि सभा में अपनी जगह पक्की करने में सफल रहे हैं। इनमें चार वरिष्ठ सांसद अपनी सीटें बरकरार रखने में कामयाब रहे, जबकि दो नए उम्मीदवारों ने पहली बार संसद पहुंचकर समुदाय के अनौपचारिक समूह समोसा कॉकस का दायरा बढ़ा दिया है।
संसदीय चुनावों का पूरा गणित और नया राजनीतिक संतुलन
मंगलवार को संपन्न हुए देशव्यापी मतदान में अमेरिकी संसद की पूरी व्यवस्था के लिए वोट डाले गए थे। इस चुनावी प्रक्रिया में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटें, सीनेट की 35 सीटें और विभिन्न राज्यों में 36 गवर्नर पदों के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिला। इसके साथ ही कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई थी। मतदाताओं के फैसले से डेमोक्रेटिक पार्टी को दोनों सदनों में स्पष्ट बढ़त मिली है। 3 नवंबर को संपन्न हुए इस चुनाव के बाद नई अमेरिकी कांग्रेस के सभी निर्वाचित सदस्य 3 जनवरी 2027 को आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे।
समोसा कॉकस को मिले दो नए युवा चेहरे
चुनावी चक्र की शुरुआत में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भारतीय-अमेरिकी सांसदों का यह प्रभावशाली समूह सिकुड़ कर सिर्फ चार सदस्यों तक सीमित रह जाएगा। इसकी मुख्य वजह यह थी कि मिशिगन में वरिष्ठ सांसद श्री थानेदार अपनी पार्टी का डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव हार गए थे। इसके अलावा इलिनॉय से सीनेट की दौड़ में शामिल हुए सांसद राजा कृष्णमूर्ति भी अपनी दावेदारी में सफल नहीं हो पाए थे। इन दो झटकों के बाद कॉकस की सदस्य संख्या घटने की आशंका बन गई थी। हालांकि फ्लोरिडा और एरिजोना से दो नए उम्मीदवारों की जोरदार जीत ने इस कमी को पूरा करते हुए समूह की ताकत को नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
फ्लोरिडा में पिया दांडिया की ऐतिहासिक जीत
फ्लोरिडा के नवनिर्मित 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में एक बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिला, जिसे परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट से 39 वर्षीय पिया दांडिया ने अपनी राजनीतिक क्षमता का लोहा मनवाते हुए रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को शिकस्त दी। दांडिया ने कड़े मुकाबले में 51.9 प्रतिशत मत हासिल कर जीत अपने नाम की। दांडिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ था। राजनीति में औपचारिक कदम रखने से पहले उन्होंने एक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं और बाद में न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल का सफल नेतृत्व भी किया।
एरिजोना में डॉ. अमीश शाह का शानदार प्रदर्शन
एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से इमरजेंसी रूम के अनुभवी चिकित्सक डॉ. अमीश शाह ने शुरुआती रुझानों से ही बढ़त बनाए रखी। मतों की गिनती के दौरान शाह 52.6 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत की ओर मजबूती से आगे बढ़ते दिखे, जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी जे फीली को 45.4 प्रतिशत मत मिले। इस सीट पर 85 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक मुकाबला काफी नजदीकी बना हुआ था, जिससे यह चुनाव भारतीय मूल के उम्मीदवारों के बीच हुए सबसे दिलचस्प मुकाबलों में शामिल हो गया।
चार वरिष्ठ सांसदों ने सुरक्षित रखे अपने मजबूत गढ़
नए चेहरों के आगमन के साथ ही पूर्व से सदन में मौजूद चार दिग्गज भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने भी अपनी-अपनी सीटों पर जीत का परचम लहराया। कैलिफोर्निया, वर्जीनिया और वाशिंगटन राज्यों के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले इन नेताओं की जीत ने यह सुनिश्चित किया कि अमेरिकी राष्ट्रीय नीतियों और विधायी बहसों में भारतीय प्रवासियों का दृष्टिकोण मजबूती से दर्ज होता रहे।
डॉ. एमी बेरा का लगातार आठवां कार्यकाल
कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से 61 वर्षीय डॉ. एमी बेरा ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को मात देकर एक बार फिर सदन में वापसी की है। यह उनकी लगातार आठवीं जीत है, जिसने उन्हें अमेरिकी संसद में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय-अमेरिकी जनप्रतिनिधि का गौरव दिलाया है। पेशे से चिकित्सक रहे बेरा ने पहली बार 2012 के चुनाव में जीत दर्ज की थी और जनवरी 2013 में अपना पहला कार्यकाल शुरू किया था।
बेरा का जन्म 1965 में लॉस एंजिल्स में एक गुजराती आप्रवासी परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कैलिफोर्निया के सरकारी स्कूलों में हुई, जिसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, इरविन से जैविक विज्ञान में स्नातक और मेडिसिन में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में वह प्रतिनिधि सभा की शक्तिशाली विदेश मामलों की समिति के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें स्वास्थ्य सेवा सुधारों तथा कूटनीतिक मामलों पर विशेष महारत के लिए जाना जाता है।
रो खन्ना और सुहास सुब्रमण्यम की शानदार चुनावी वापसी
सिलिकॉन वैली के केंद्र कहे जाने वाले कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से 50 वर्षीय रो खन्ना ने अपना दबदबा बरकरार रखा। खन्ना वर्तमान में अपना पांचवां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं और जनवरी में अपने छठे कार्यकाल की शुरुआत करेंगे। फिलाडेल्फिया के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे खन्ना के माता-पिता 1970 के दशक में भारत से अमेरिका जाकर बसे थे।
वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में 40 वर्षीय सुहास सुब्रमण्यम ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को एकतरफा मुकाबले में पराजित किया। सुब्रमण्यम ने कुल मतदान का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने नाम किया। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में काम कर चुके सुब्रमण्यम का जन्म ह्यूस्टन में भारतीय माता-पिता के घर हुआ था और उन्होंने न्यू ऑरलियन्स स्थित तुलाने यूनिवर्सिटी से शिक्षा ग्रहण की थी। वर्ष 2024 में पहली बार संसद पहुंचे सुब्रमण्यम अब अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करेंगे।
प्रमिला जयपाल और राजनयिक संदर्भ
वाशिंगटन राज्य के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से प्रमिला जयपाल ने लगातार छठी बार सदन में अपनी सीट सुरक्षित की है। जयपाल वर्ष 2016 में पहली बार संसद के लिए चुनी गई थीं और तब से वह आव्रजन सुधारों तथा व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दों पर मुखर रही हैं। पिछले महीने भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर जयपाल की एक टिप्पणी के कारण अमेरिका में भारत के राजदूत ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त की थी। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों में खासा ध्यान आकर्षित किया था और यह भी रेखांकित किया था कि किस तरह भारतीय-अमेरिकी सांसद भारत से जुड़े नीतिगत विमर्शों पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
राज्य स्तर के चुनावों में मिले-जुले नतीजे
संसदीय सीटों से इतर विभिन्न राज्यों के चुनावों में भी भारतीय मूल के नेताओं का भाग्य तय हुआ। मैरीलैंड में डेमोक्रेटिक लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने दोबारा जीत हासिल की। वहीं ओहायो के गवर्नर चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन प्राप्त रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेट एमी एक्टन के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। रामास्वामी ने मई में आयोजित रिपब्लिकन प्राइमरी में भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
नॉर्थ कैरोलिना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश गनोरकर को मौजूदा डेमोक्रेटिक सांसद वालेरी फाउशी से हार मिली। टेक्सास राज्य के हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 में बड़ा राजनीतिक इतिहास रचा गया, जहां डेमोक्रेट पूजा सेठी ने रिपब्लिकन जेनिफर मुश्टालर को हराया। इस जीत के साथ ही सेठी टेक्सास राज्य विधायिका में चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी और हिंदू सदस्य बन गईं। हालांकि टेक्सास के ही डिस्ट्रिक्ट 66 में डेमोक्रेट संदीप श्रीवास्तव को रिपब्लिकन मैट शाहीन के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी।
प्रवासी शक्ति और भविष्य की दिशा
वर्तमान अनुमानों के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की आबादी पचास लाख से अधिक है, जो इसे देश में दूसरा सबसे बड़ा एशियाई मूल का समुदाय बनाती है। दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत और प्रतिनिधि सभा में छह भारतीय मूल के सांसदों की मौजूदगी के साथ यह समुदाय नीति निर्माण के केंद्र में आ गया है। नवनिर्वाचित सांसद 3 जनवरी 2027 को अपने पद की शपथ लेकर विधायी जिम्मेदारियां संभालेंगे।


















