जर्मनी की अदालत का बड़ा फैसला: AI के गढ़े झूठे दावों की जिम्मेदारी अब Google की, माफी नहीं चलेगी कि 'जानकारी जांच लें'एआई
2 घंटे पहले· 3

जर्मनी की अदालत का बड़ा फैसला: AI के गढ़े झूठे दावों की जिम्मेदारी अब Google की, माफी नहीं चलेगी कि 'जानकारी जांच लें'

जर्मनी की एक अदालत ने माना कि Google के AI Overviews ने दो प्रकाशकों को धोखाधड़ी और घोटालों से बेबुनियाद तरीके से जोड़ दिया, और कहा कि ऐसे झूठे दावों की कानूनी जिम्मेदारी अब कंपनी की है। इस फैसले के असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ सकते हैं।

सर्च के नतीजों में अपने-आप बनने वाले AI सारांश अब तक तकनीकी कंपनियों के लिए कानूनी ढाल के पीछे सुरक्षित माने जाते थे। लेकिन जर्मनी की एक अदालत के ताज़ा फैसले ने यह ढाल हटा दी है और साफ कहा है कि अगर Google का AI किसी के बारे में झूठा दावा गढ़ता है, तो उसकी जिम्मेदारी खुद कंपनी की बनती है।

मामला शुरू कैसे हुआ

यह विवाद उस रिपोर्ट से जुड़ा है जिसे सबसे पहले Decoder ने सामने रखा था। इसमें दो प्रकाशकों ने पाया कि कुछ खास सर्च पर Google के AI से बने सारांश उन्हें संदिग्ध कारोबारी तौर-तरीकों, घोटालों और सब्सक्रिप्शन से जुड़ी ठगी से जोड़ रहे थे — और इसका कोई आधार तक मौजूद नहीं था।

इसी साल पहले प्रभावित कंपनियों ने इस तकनीकी दिग्गज को एक सीज़-एंड-डिज़िस्ट (बंद करने की कानूनी चेतावनी) पत्र भेजा। Google ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया। कंपनी की दलील थी कि उसका अपने-आप सारांश बनाने वाला फीचर उपयोगकर्ताओं को पहले ही आगाह करता है कि जानकारी में गलतियाँ हो सकती हैं और उसे स्वतंत्र रूप से जाँच लेना चाहिए।

अदालत ने क्या पाया

अदालत की पड़ताल में यह निकलकर आया कि Google के AI ने उन दूसरी कंपनियों की जानकारी — जिन पर संभावित गैरकानूनी गतिविधियों का शक था — को शिकायतकर्ताओं के डेटा के साथ मिला दिया। इससे ऐसे संबंध गढ़ दिए गए जो सर्च इंजन द्वारा जोड़े गए किसी भी स्रोत में मौजूद ही नहीं थे।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पारंपरिक सर्च इंजन सिर्फ़ लिंक की सूची दिखाते हैं, जिनमें तीसरे पक्ष के बयान होते हैं। इसके उलट Google का यह टूल इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी की गलत व्याख्या के आधार पर “स्वतंत्र, नए और ठोस बयान” तैयार कर रहा था।

अदालत के मुताबिक, गलत जानकारी को सुधारना किसी तीसरे पक्ष की जिम्मेदारी नहीं है। केवल Google के पास ही वह क्षमता है कि वह अपने AI सारांश के पीछे काम करने वाली तकनीक को बदल सके, इसलिए उसे ही “जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।” अदालत ने Google की बचाव की दलील को कमज़ोर भी माना, क्योंकि विवादित सारांश में “ऐसे बयान शामिल हैं जो सर्च नतीजों में कहीं दिखते ही नहीं।”

वेब पर AI की भूमिका की नई और सख़्त व्याख्या

सर्च नतीजे पेश करने में AI की भूमिका को लेकर अदालत की यह व्याख्या इस मामले को एक ऐतिहासिक मिसाल बना सकती है। यहाँ एक बड़ी तकनीकी कंपनी को उसके सबसे उन्नत विकास के व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म पर असर के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

अब तक ज़्यादातर कानूनी व्यवस्थाओं में सर्च इंजन को बस ऐसे उपकरण माना जाता रहा है जो वेब पर मौजूद और तीसरे पक्ष द्वारा बनाई गई सामग्री तक पहुँच आसान बनाते हैं। इसी दर्जे के चलते उन्हें एक तरह का संरक्षण मिलता रहा है, भले ही प्रकाशित जानकारी झूठी, गलत, भ्रामक या मानहानिकारक ही क्यों न हो।

लेकिन जर्मन अदालत ने माना कि जैसे ही सर्च इंजन जनरेटिव AI सिस्टम को अपने अंदर जोड़ लेते हैं, यह सुरक्षा कवच लागू नहीं रहता। अदालत के तर्क के अनुसार, यह तकनीक कई स्रोतों के आधार पर ऐसे दावे गढ़ सकती है जो असल में होते ही नहीं, और इसलिए इसे चलाने वाली कंपनियों को नतीजतन बनी सामग्री की जिम्मेदारी उठानी होगी।

'जानकारी जाँच लें' वाली चेतावनी काफी नहीं

न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि भले ही Google AI मॉडल में स्वाभाविक रूप से होने वाली ‘हैलूसिनेशन’ (मनगढ़ंत जवाब) की आशंका के चलते उपयोगकर्ताओं को जानकारी जाँचने को कहता है, पर यह चेतावनी सामग्री वितरित करने वाले को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती। उनका तर्क था कि अगर ऐसा होता, तो झूठे बयानों के शिकार लोग व्यावहारिक रूप से बेबस रह जाते — क्योंकि मूल स्रोतों ने तो वे बयान कभी दिए ही नहीं, इसलिए उन पर कानूनी कार्रवाई भी नहीं हो सकती थी।

इसी तरह अदालत ने माना कि AI सिस्टम से बने नतीजों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के तहत संरक्षण नहीं दिया जा सकता, क्योंकि ये किसी कंपनी द्वारा डिज़ाइन, प्रशिक्षित और संचालित एक एल्गोरिदम की उपज हैं, न कि किसी व्यक्ति की निजी राय की अभिव्यक्ति।

आगे ऐसी गलती दोहराई न जाए, इसके लिए एहतियाती कदम के तौर पर फैसले में Google को इस मामले में मानहानिकारक माने गए बड़े हिस्से के बयानों को हटाने और कार्यवाही से जुड़े कानूनी खर्च का 80 प्रतिशत वहन करने का निर्देश दिया गया।

Google का पक्ष

Ars Technica के हवाले से कंपनी के एक प्रवक्ता ने संकेत दिया कि इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है। बयान में कहा गया, “हम AI Overviews की गुणवत्ता में गहरा निवेश करते हैं ताकि अधिकांश जवाब सटीक जानकारी दें, और इन्हें इस तरह बनाया गया है कि वे वेब पर मौजूद जानकारी को ही प्रतिबिंबित करें। हम इस फैसले की ध्यान से समीक्षा कर रहे हैं, जो अभी अंतिम नहीं है।”

पूरी AI इंडस्ट्री पर असर मुमकिन

जर्मन अदालत के इस फैसले के नतीजे पूरी दुनिया की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंडस्ट्री पर पड़ सकते हैं। OpenAI, Anthropic और Perplexity AI जैसी कंपनियाँ भी अपने उपयोगकर्ताओं को आगाह करती हैं कि उनके सिस्टम से बने जवाबों में गलतियाँ हो सकती हैं या वे भ्रामक हो सकते हैं, और Google की तरह ये भी जानकारी इस्तेमाल करने से पहले उसे जाँचने की सलाह देती हैं। यह चेतावनी आमतौर पर उन सेवा शर्तों में होती है जिन्हें उपयोगकर्ता किसी प्लेटफॉर्म पर खाता बनाते समय स्वीकार करते हैं।

लेकिन यह मामला यह दलील देता है कि ऐसी चेतावनियाँ डेवलपर्स को जिम्मेदारी से बरी करने के लिए काफी नहीं हैं। फैसला कहता है कि जब कोई AI ऐसे नए बयान गढ़ता है जो उसके मूल स्रोतों में सीधे तौर पर मौजूद नहीं होते, तो उस सिस्टम को डिज़ाइन, प्रशिक्षित, संचालित और प्रबंधित करने वाली कंपनी को उन बयानों से होने वाले किसी भी नुकसान की कानूनी जिम्मेदारी उठानी होगी।

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