वाशिंगटन में अमेरिकी संसद से आई एक बड़ी खबर ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार हलकों और भारत के निर्यात क्षेत्र में भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। अमेरिकी संसद के उच्च सदन यानी सीनेट ने रूस के खिलाफ आर्थिक पाबंदियों को और अधिक कड़ा करने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है। इस विधायी विकास के बाद भारतीय उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक का भारी सीमा शुल्क लगाए जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब नई दिल्ली और वाशिंगटन के प्रतिनिधि एक विस्तृत द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आकार देने में लगे हुए हैं।
रूसी तेल और गैस के खरीदारों पर कसा जाएगा शिकंजा
अमेरिकी संसद की सीनेट ने मंगलवार को (भारतीय समयानुसार बुधवार) भारी मतों के अंतर से इस विधेयक को आगे बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया। कुल 86 सीनेटरों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि केवल 12 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट डाला। इस प्रभावशाली कानून को दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया था। जिस समय सीनेट में इस विधेयक को पारित किया जा रहा था, ठीक उसी वक्त यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी अमेरिकी संसद परिसर में मौजूद थे। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा राजस्व को चोट पहुंचाना है, जिसके लिए अमेरिकी प्रशासन को व्यापक दंडात्मक शक्तियां दी जा रही हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिलेगा 100 फीसदी टैरिफ का अधिकार
यदि यह रूसी सैंक्शन विधेयक कानून का रूप ले लेता है, तो इसके लागू होते ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन सभी विदेशी राष्ट्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का कानूनी अधिकार प्राप्त हो जाएगा जो मास्को से भारी मात्रा में कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की खरीदारी जारी रखे हुए हैं। इस कानून के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसे देशों से अमेरिका आने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक का दंडात्मक शुल्क लगा सकते हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार तथा आपूर्ति श्रृंखला में भारी उथल-पुथल मचने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
भारत और चीन समेत पांच देशों पर मंडराया टैरिफ का खतरा
सीनेट से पारित इस विधायी प्रस्ताव के कारण दुनिया के पांच प्रमुख देशों पर अमेरिकी टैरिफ की गाज गिरने की आशंका बन गई है। रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा संसाधनों और कच्चे तेल का आयात करने वाले भारत और चीन इस कानून के सबसे बड़े संभावित निशाने पर हैं। यदि वाशिंगटन इस 100 प्रतिशत टैरिफ के नियम को सख्ती से लागू करता है, तो भारत से अमेरिकी बाजार में निर्यात होने वाले विभिन्न सामान काफी महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को भारी प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
द्विपक्षीय व्यापार समझौते और राजनयिक संबंधों पर गहरा असर
यह कानून एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आगे बढ़ा है। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से एक व्यापक व्यापार समझौते (ट्रेड एग्रीमेंट) को लेकर उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है। दोनों देशों के बीच सीमा शुल्क और व्यापारिक शर्तों को लेकर पहले से ही काफी तनातनी रही है। ऐसे में इस सैंक्शन बिल के कानून बनने से नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच जारी व्यापार वार्ता पटरी से उतर सकती है। जानकारों का मानना है कि इस कदम से दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक संबंध आने वाले दिनों में और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।


















