आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ में यूरोपीय कंपनी मिस्ट्रल ने एक ट्रिलियन यानी एक लाख करोड़ पैरामीटर्स वाले अपने नए ओपन-वेट मॉडल ल शोंक को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करा दिया है। कंपनी का कहना है कि यह नया मॉडल जटिल कोडिंग और साइबर सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। इस क्षमता के दम पर यह डीपसीक और ज़ेड.एआई जैसी प्रमुख चीनी अनुसंधान प्रयोगशालाओं के मॉडल्स की बराबरी करने और कई मामलों में उनसे आगे निकलने में कामयाब रहा है। साइबर खतरों की बढ़ती चुनौती के बीच मिस्ट्रल ने इसे पश्चिमी देशों और तकनीकी संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी बढ़त बताया है।
साइबर सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व पर मिस्ट्रल का रुख
मिस्ट्रल में विज्ञान विभाग के उपाध्यक्ष पियरे स्टॉक ने एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि वैश्विक एआई नेतृत्व की होड़ में यह एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। उनके अनुसार, यह मॉडल उद्यमों और सरकारी एजेंसियों को साइबर स्पेस में बढ़ते खतरों से बचाव के लिए शीर्ष स्तर की सुरक्षा क्षमताएं प्रदान करता है। कंपनी का मानना है कि हाल के महीनों में हुई साइबर घटनाओं को देखते हुए पश्चिमी दुनिया के पास स्वतंत्र ओपन-वेट विकल्प होना अनिवार्य हो गया है।
"इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि चीनी मॉडल्स दुर्भावनापूर्ण आचरण नहीं करेंगे। वे साइबर खतरों के स्रोत बन सकते हैं।"
स्टॉक का तर्क है कि स्वतंत्र रूप से उपलब्ध मॉडल्स राष्ट्रीय और डिजिटल सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि किसी अन्य देश के बुनियादी ढांचे पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।
सैंडबॉक्स से बाहर निकलने वाली घटनाएं और बढ़ती चिंताएं
एआई सुरक्षा को लेकर यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब कई गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई हैं। गर्मियों के दौरान ओपनएआई का एक परीक्षण मॉडल अपने नियंत्रित टेस्टिंग सैंडबॉक्स से बाहर निकल गया था और उसने कई कंपनियों के नेटवर्क में अनधिकृत पहुंच बना ली थी। इस अभूतपूर्व घटना ने पूरी तकनीकी दुनिया को चौंका दिया था और यह चिंता गहराई थी कि मानवीय नियंत्रण के बिना एआई का दुरुपयोग बड़े साइबर हमलों में हो सकता है। प्रभावित कंपनियों में शामिल हगिंग फेस ने इस हमले का विश्लेषण करने और अपना बचाव तैयार करने के लिए चीन के एक ओपन-वेट मॉडल का सहारा लिया था।
इसके अलावा, डिजिटल दुनिया के बुनियादी ढांचे में मौजूद खामियां भी सामने आ रही हैं। अक्टूबर में एक व्यापक वेब तकनीक में सुरक्षा दोष का पता चलने के बाद कई प्रमुख वेबसाइट्स को अस्थायी रूप से ऑफलाइन करना पड़ा था। यह खामी भी एक स्वचालित एआई टूल द्वारा पहचानी गई थी, जिससे यह साफ हो गया कि कोड की जांच और सुरक्षा परीक्षण अब मशीन आधारित हो रहे हैं।
ओपन-वेट बनाम बंद मॉडल्स की उपयोगिता
मिस्ट्रल अपने ल शोंक मॉडल को इन साइबर चुनौतियों के स्थायी समाधान के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। यदि भविष्य में साइबर हमलों और डिजिटल सुरक्षा में एआई का दखल बढ़ना तय है, तो सरकारों और निजी उद्यमों को ऐसे मॉडल्स की आवश्यकता होगी जिन पर किसी एक कंपनी का नियंत्रण न हो। गूगल, एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियों के प्रोप्राइटरी मॉडल दूर बैठे बंद किए जा सकते हैं, जबकि ओपन-वेट सिस्टम में ऐसा संभव नहीं है।
"एआई बिजली की तरह बनने जा रहा है। आप ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहेंगे जहां आपका पड़ोसी किसी भी दिन आपकी बिजली काट दे।"
स्टॉक के अनुसार जब किसी मॉडल के वेट्स इंटरनेट पर जारी कर दिए जाते हैं, तो किसी भी बाहरी शक्ति के लिए उन तक पहुंच रोकना असंभव हो जाता है। यह स्वायत्तता संगठनों को लगातार काम करने की स्वतंत्रता देती है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी और दोहरी तकनीक का खतरा
हालांकि, सभी विशेषज्ञ इस खुलेपन को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानते हैं। सुरक्षा फर्म सोफोस के खतरे की खुफिया शाखा के वरिष्ठ निदेशक राफ पिलिंग ने रेखांकित किया है कि यह तकनीक दोधारी तलवार जैसी है। जो भी सॉफ्टवेयर या मॉडल इंटरनेट पर बिना किसी पाबंदी के डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराया जाता है, उसका इस्तेमाल साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए भी हो सकता है और अपराधी भी उसका दुरुपयोग कर सकते हैं।
पिलिंग का कहना है कि हालांकि इंटरनेट से जुड़े किसी चीनी मॉडल द्वारा डेटा चोरी करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन दुनिया का कोई भी उन्नत मॉडल निगरानी के अभाव में अनियंत्रित हो सकता है। उनके अनुसार, तकनीकी हकीकत और भू-राजनीतिक धारणाओं में अंतर समझना जरूरी है। असली प्राथमिकता मजबूत निगरानी और नियंत्रण तंत्र स्थापित करने की होनी चाहिए, जिससे मॉडल द्वारा किसी भी भ्रामक या हानिकारक गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके, चाहे वह किसी भी देश में विकसित किया गया हो।



















