पाकिस्तान इस समय एक अभूतपूर्व ऊर्जा आपातकाल की चपेट में है, जिससे पूरे देश में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हाल ही में बिशकेक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेकर लौटे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के स्वदेश आगमन के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से बिजली की भारी किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं। शाम होते ही देश के प्रमुख शहर अंधेरे में डूब रहे हैं। देश के सबसे बड़े वित्तीय और वाणिज्यिक केंद्र कराची में स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है, जहाँ नागरिक लगातार लंबे ब्लैकआउट का सामना कर रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के ठप होने से आम लोगों के लिए दैनिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और महंगी LNG का संकट
इस ऊर्जा संकट की मुख्य वजह मध्य पूर्व में जारी ईरान युद्ध और उससे उत्पन्न भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ हैं। युद्ध के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) के माध्यम से होने वाली तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की समुद्री आपूर्ति बाधित हो गई है। आपूर्ति में आई इस अचानक रुकावट के बाद जब पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय हाजिर (स्पॉट) बाजार से गैस खरीदने का प्रयास किया, तो उसे अत्यधिक ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ा। बीपी पीएलसी (BP Plc) नामक अंतरराष्ट्रीय कंपनी ने पाकिस्तान को 27 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) की दर पर LNG देने का प्रस्ताव रखा।
यह प्रस्तावित कीमत युद्ध की शुरुआत से पहले उपलब्ध गैस दरों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थी। पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आर्थिक संकट झेल रही पाकिस्तान सरकार के लिए इस दर पर गैस खरीदना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसके परिणामस्वरूप, सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी 'पाकिस्तान एलएनजी लिमिटेड' ने 8 सितंबर तक आपूर्ति के लिए जारी आपातकालीन टेंडर को रद्द कर दिया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने माना कि इतनी अत्यधिक दर पर गैस आयात करने से राष्ट्रीय खजाने पर बहुत बड़ा वित्तीय दबाव पड़ेगा, इसलिए उन्होंने नया टेंडर जारी करने की योजना बनाई है।
कतर का 'फोर्स मैज्योर' और आपूर्ति पर अनिश्चितता
पाकिस्तान के लिए ऊर्जा संकट और गहराने की एक बड़ी वजह कतर से होने वाली LNG आपूर्ति का ठप पड़ना है। कतर लंबे समय से पाकिस्तान का मुख्य LNG आपूर्तिकर्ता रहा है। जुलाई के महीने में कतर के एक गैस टैंकर पर हुए हमले के बाद फारस की खाड़ी और होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही को सुरक्षा कारणों से सीमित कर दिया गया। इसके बाद कतर ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के 'फोर्स मैज्योर' (Force Majeure) प्रावधान का सहारा लिया।
कतर ने एशियाई और यूरोपीय खरीदारों के लिए अपने LNG अनुबंधों को निलंबित करने की अवधि अक्टूबर तक बढ़ा दी है। 'फोर्स मैज्योर' एक ऐसा कानूनी नियम है जो किसी अप्रत्याशित संकट या अनियंत्रित परिस्थितियों के समय अनुबंध में शामिल पक्षों को अपने दायित्वों से अस्थायी राहत प्रदान करता है। कतर के इस निर्णय ने पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र की रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है, जिससे निकट भविष्य में स्थिति में सुधार के आसार बेहद कम दिखाई दे रहे हैं।
सौर ऊर्जा का सीमित दायरा और राष्ट्रीय ग्रिड का ढहना
ऊर्जा क्षेत्र के थिंक टैंक 'इंसटीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस' (IEEFA) के विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान का राष्ट्रीय पावर ग्रिड तकनीकी रूप से काफी कमजोर रहा है। देश में बिजली की मांग और उत्पादन के बीच के बड़े अंतर को पाटने के लिए आयातित LNG पर बहुत अधिक निर्भरता रही है। दिन के समय सौर ऊर्जा (सोलर पावर) के माध्यम से बिजली की कमी को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया जाता है।
लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, सोलर पावर से बिजली का उत्पादन बंद हो जाता है। रात के समय ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) से चलने वाले तापीय बिजलीघरों को चालू करना आवश्यक होता है। LNG की किल्लत के कारण यह थर्मल पावर प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे हैं और कई इकाइयां ठप पड़ी हैं। इसके परिणामस्वरूप शाम होते ही देश भर के शहरों में भारी लोड-शेडिंग शुरू हो जाती है।
कराची से लाहौर तक बिजली कटौती और 4000 MW का घाटा
देश के सबसे बड़े शहर कराची में स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहाँ कई इलाकों में नागरिकों को लगातार 16 से 24 घंटे की बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। मानवाधिकार संगठनों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि लंबे ब्लैकआउट के कारण व्यावसायिक गतिविधियाँ, छोटे उद्योग, बच्चों की स्कूली शिक्षा और दैनिक घरेलू काम पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। कई क्षेत्रों में बिजली न होने से पीने के पानी की पंपिंग और आपूर्ति भी ठप हो गई है।
बिजली का यह संकट केवल कराची तक सीमित नहीं है। पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर सहित कई अन्य शहरों में प्रतिदिन 2 से 3 घंटे या उससे अधिक की अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में राष्ट्रीय स्तर पर बिजली का घाटा (शॉर्टफॉल) 4,000 मेगावाट (MW) से अधिक के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे तत्काल राहत मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
बिजली दरों में उछाल और प्रवासियों की कमाई पर मंडराता खतरा
एक तरफ जहाँ आम जनता को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी तरफ उपलब्ध बिजली के दाम बढ़ा दिए गए हैं। 'फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट' (FCA) के तहत नियामक प्राधिकरण ने प्रति यूनिट बिजली दर में PKR 0.75 की बढ़ोतरी को स्वीकृति दी है। इस निर्णय से पहले से ही उच्च मुद्रास्फीति झेल रहे पाकिस्तानी नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ गया है।
इसके अलावा, मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष का असर पाकिस्तान में आने वाले विदेशी धन (रेमिटेंस) पर भी पड़ने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में सऊदी अरब में कार्यरत पाकिस्तानी प्रवासियों ने 9.4 बिलियन डॉलर स्वदेश भेजे थे, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 7.83 बिलियन डॉलर का विदेशी धन पाकिस्तान आया था। यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खींचता है, तो पाकिस्तान को महंगे ईंधन आयात के साथ-साथ विदेशी मुद्रा आय में गिरावट का दोहरा झटका लग सकता है।



















