दुनियाभर में पुरानी और दुर्लभ वस्तुओं के लिए एक बेहद खास बाजार मौजूद है, जहां शौकीन लोग एंटीक चीजों को खरीदने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। हाल ही में अमेरिका से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के कॉइन कलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहाँ 10 सेंट का एक बेहद पुराना सिक्का 1.25 मिलियन डॉलर में बिका है। यदि वर्तमान विनिमय दर यानी 1 डॉलर के मुकाबले 94.55 रुपये के हिसाब से गणना की जाए, तो यह कुल रकम लगभग 11.81 करोड़ रुपये बैठती है। यह कोई साधारण सिक्का नहीं है, बल्कि इसे 1894 एस-डाइम या बारबर डाइम के नाम से पहचाना जाता है। इस बहुमूल्य सिक्के की नीलामी का आयोजन एक सितंबर को स्टैक्स बोवर्स गैलरीज द्वारा किया गया था। जैसे ही इस नायाब सिक्के को नीलामी के मंच पर लाया गया, खरीदारों के बीच होड़ मच गई और इस पर ताबड़तोड़ बोलियाँ लगने लगीं। दिलचस्प बात यह है कि इस विशेष सिक्के को चौथी बार नीलामी के लिए पेश किया गया था। प्राचीन और दुर्लभ सिक्कों को जमा करने वाले लोगों के बीच इस डाइम का क्रेज हमेशा से ही सिर चढ़कर बोलता रहा है। आखिर इस नन्हे से धातु के टुकड़े में ऐसी कौन सी खास बात छिपी है, जिसके लिए लोग अपनी करोड़ों की संपत्ति पानी की तरह बहा रहे हैं। आइए इस जादुई और ऐतिहासिक सिक्के के पूरे सफर को गहराई से समझते हैं।
दुनिया में बचे हैं ऐसे सिर्फ 9 सिक्के
इस अनमोल सिक्के को यूनाइटेड स्टेट्स ब्यूरो ऑफ द मिंट के मुख्य उत्कीर्णक चार्ल्स ई. बारबर द्वारा डिजाइन किया गया था। उनके उपनाम के आधार पर ही इसे बारबर डाइम कहा जाता है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो साल 1894 के दौरान इस तरह के कुल 24 सिक्के ही ढाले गए थे। इनमें से भी वक्त की मार झेलते हुए अब केवल 9 सिक्के ही पूरी दुनिया में सुरक्षित बचे हुए हैं। यही मुख्य वजह है कि यह सिक्का किसी भी कॉइन कलेक्टर के लिए किसी खजाने से कम नहीं आँका जाता है। अमेरिका के 100 सबसे महान सिक्कों की आधिकारिक सूची और गाइड में इस ऐतिहासिक सिक्के को चौथा स्थान प्रदान किया गया है। इसके इतने अत्यधिक दुर्लभ होने के पीछे कई दिलचस्प और ऐतिहासिक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। ये तमाम किस्से घूम-फिरकर साल 1893 के भीषण आर्थिक संकट और मंदी की ओर इशारा करते हैं। उस दौर की मंदी के कारण नए सिक्कों के उत्पादन और ढलाई का काम कई महीनों तक पूरी तरह से रोक दिया गया था। कुछ इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि सैन फ्रांसिस्को मिंट के पास उस समय 2.40 डॉलर मूल्य का चांदी का एक टुकड़ा बच गया था। उसी शेष बची हुई चांदी का सही उपयोग करने और उसे खपाने के उद्देश्य से ही इन खास सिक्कों को बनाया गया था। दूसरी ओर, कुछ जानकार विशेषज्ञों का यह भी कहना था कि मिंट के सुपरिंटेंडेंट ने अपनी खुद की बेटी और अपने कुछ करीबी बैंकर दोस्तों को एक अनोखा तोहफा देने के लिए विशेष तौर पर इन सिक्कों को बनवाया था।
डेव बोवर्स का सिक्का खरीदने से लेकर गैलरी तक का सफर
इस दुर्लभ सिक्के के साथ एक बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक वाकया भी गहराई से जुड़ा हुआ है। साल 1957 में मात्र 19 साल के एक युवा डेव बोवर्स ने इस सिक्के को 4750 डॉलर की कीमत चुकाकर खरीदा था। भारतीय मुद्रा के मौजूदा विनिमय दरों के अनुसार यदि आकलन किया जाए, तो यह राशि करीब 4.5 लाख रुपये के आसपास बैठती है। इतनी कम उम्र में केवल एक छोटे से सिक्के के लिए इतनी बड़ी धनराशि खर्च करना उस दौर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी खबर बन गया था। डेव बोवर्स ने इस बड़े मौके का पूरी तरह से सदुपयोग किया। उन्होंने इस घटना को अपने जीवन के कॉइन कलेक्शन करियर की शुरुआत करने का मुख्य जरिया बना लिया। आगे चलकर डेव बोवर्स ने साल 1960 में इस 1894 एस-डाइम को 6000 डॉलर यानी लगभग 5.6 लाख रुपये में बेच दिया। इसके बाद यह ऐतिहासिक सिक्का कई अन्य बड़े और प्रतिष्ठित कलेक्टर्स के हाथों से गुजरता हुआ आगे बढ़ा। आज जिस स्टैक्स बोवर्स गैलरीज ने इस कीमती सिक्के को 11.81 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत पर नीलाम किया है, उस प्रतिष्ठित संस्थान का नाम इसी डेव बोवर्स के नाम पर रखा गया है। एक छोटे से सिक्के ने कैसे एक साधारण लड़के को दुनिया का सबसे मशहूर और दिग्गज कॉइन एक्सपर्ट बना दिया, यह अपने आप में एक अनोखी मिसाल है।
कैसी है इस ऐतिहासिक डाइम की बनावट और डिजाइन
आज के समय में अमेरिका में चलन में मौजूद 10 सेंट के आधुनिक सिक्कों पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट का चेहरा अंकित होता है। इसके बिल्कुल विपरीत, बारबर डाइम का लुक बेहद अलग, अनोखा और पारंपरिक रूप से क्लासिक है। इस ऐतिहासिक और प्राचीन सिक्के के अगले यानी मुख्य हिस्से पर लेडी लिबर्टी की एक बेहद खूबसूरत और मनमोहक तस्वीर उकेरी गई है। वहीं इसके पिछले हिस्से पर एक सुंदर फूलों की माला के ठीक बीच में वन डाइम लिखा हुआ दिखाई देता है। इसकी शानदार और उत्कृष्ट बनावट तथा इसकी ऐतिहासिक अहमियत इसे बाजार में मौजूद बाकी सभी सिक्कों से बिल्कुल जुदा और खास बनाती है। यही वह प्रमुख वजह है कि जब भी यह दुर्लभ सिक्का खुले बाजार में बिकने के लिए आता है, तो नीलामी के आज तक के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट जाते हैं और यह हर बार इतिहास रच देता है।



















