वाशिंगटन ने पाकिस्तान को मिलने वाली वित्तीय मदद और उसके गुप्त रक्षा खर्चों पर शिकंजा कस दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस्लामाबाद से उसकी सेना और गुप्तचर एजेंसी आईएसआई (ISI) पर होने वाले कुल वार्षिक खर्च की पूरी जानकारी मांगी है। पाकिस्तान के रक्षा बजट में लंबे समय से शामिल गोपनीय फंड्स को लेकर अमेरिका ने अब सवाल उठाए हैं और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार से इसका पूरा बही-खाता पेश करने को कहा है।
गुप्त रक्षा फंड पर अमेरिका का कड़ा रुख
पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से मिलने वाली सहायता की समीक्षा के बीच अमेरिकी सरकार ने यह कदम उठाया है। वॉशिंगटन की तरफ से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारियों और खुफिया तंत्र पर होने वाली फंडिंग को सार्वजनिक करे। अब तक पाकिस्तान का एक बड़ा सैन्य बजट गुप्त मदों के तहत रखा जाता था, जिसकी संसद या आम जनता के सामने कोई आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट जारी नहीं की जाती थी।
शहबाज सरकार और सैन्य नेतृत्व के लिए नई चुनौती
पाकिस्तान में आर्थिक तंगी और महंगाई के बीच सेना और आईएसआई का विशाल बजट चिंता का विषय रहा है। थलसेनाध्यक्ष असीम मुनीर और नागरिक सरकार पर इस समय देश के भीतर और बाहर दोनों जगह से दबाव बढ़ गया है। बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में अलगाववादी संगठन बीएलए के बढ़ते हमलों और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच, अमेरिका का यह कड़ा रुख पाकिस्तान की विदेशी वित्तीय मदद पर असर डाल सकता है।
दक्षिण एशिया में रक्षा खर्च का संतुलन
अंतरराष्ट्रीय रक्षा व्यय आंकड़ों में भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश है। भारत अपने रक्षा बजट और सैन्य आधुनिकीकरण में पूरी पारदर्शिता बरतता है, जबकि पाकिस्तान का रक्षा खर्च गैर-पारदर्शी और बाहरी कर्जों पर निर्भर रहा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहायता का कोई भी हिस्सा अनअकाउंटेड या गुप्त सैन्य गतिविधियों में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, इसलिए पाकिस्तान से एक-एक रुपये का ऑडिट मांगा जा रहा है।



















