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अमेरिका में जो दवा 95,000 रुपये की, वही भारत से सिर्फ 2,300 में — महिला ने वायरल वीडियो में खोली हेल्थकेयर की पोलअमेरिका
14 जून 2026, 10:32 am (136 दिन पहले)· 4

अमेरिका में जो दवा 95,000 रुपये की, वही भारत से सिर्फ 2,300 में — महिला ने वायरल वीडियो में खोली हेल्थकेयर की पोल

एक अमेरिकी महिला विक्टोरिया का दावा है कि जिस दवा के लिए अमेरिका में उसे 1000 डॉलर चुकाने पड़ते, वही भारत से मंगवाने पर महज 25 डॉलर में मिल गई — और उसने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था को सीधे 'स्कैम' करार दिया।

दवाओं की कीमत को लेकर अमेरिका की पूरी हेल्थकेयर व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। वजह बनी है एक अमेरिकी महिला का इंस्टाग्राम वीडियो, जिसमें उसने आंकड़ों के साथ बताया कि एक ही दवा के लिए अमेरिका और भारत की कीमतों में कितना बड़ा फर्क है। विक्टोरिया नाम की इस महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और लोग इसे अमेरिकी सिस्टम की हकीकत बता रहे हैं।

1000 डॉलर बनाम 25 डॉलर का हिसाब

विक्टोरिया के मुताबिक उसे जिस दवा की जरूरत थी, उसकी सिर्फ छह छोटी टैबलेट्स के लिए अमेरिका में अपनी जेब से 1000 डॉलर (₹95000) देने पड़ते। इसकी वजह यह थी कि उसकी इंश्योरेंस कंपनी इस खर्च को उठाने से इनकार कर रही थी। वीडियो में वह कहती है, 'अमेरिका में इस दवा के छह छोटे टैबलेट्स के लिए मुझे 1000 डॉलर अपनी जेब से देने पड़ते क्योंकि मेरी इंश्योरेंस कंपनी इसका खर्च नहीं उठा रही थी।'

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इतनी मोटी रकम चुकाने को वह तैयार नहीं थी। तभी उसके डॉक्टर ने एक रास्ता सुझाया — प्रिस्क्रिप्शन को एक कनाडाई फार्मेसी के पास भेजने का, जो यही दवा सीधे भारत के निर्माता से मंगवा सकती थी। विक्टोरिया बताती है, 'मेरे डॉक्टर ने कहा कि प्रिस्क्रिप्शन कनाडाई फार्मेसी को भेजो। मैंने भेज दिया। मुझे लगा कि शायद 100 या 200 डॉलर लगेंगे और मैं उसके लिए तैयार थी।' लेकिन असली कीमत सुनकर वह खुद दंग रह गई।

'सिर्फ 10 डॉलर की दवा, 15 डॉलर शिपिंग'

विक्टोरिया के अनुसार फार्मेसी ने जो रकम बताई, वह उसकी कल्पना से भी कम थी। वह कहती है, 'उन्होंने कहा 25 डॉलर। दवा के सिर्फ 10 डॉलर (₹950) और शिपिंग के 15 डॉलर। भारत के दवा बनाने वाली कंपनी से सीधे मेरे पास इंटरनेशनल शिपिंग हुई।' यानी जिस दवा की अमेरिका में कीमत 1000 डॉलर थी, वही भारत से सीधे भेजे जाने पर महज 25 डॉलर में उसके दरवाजे तक पहुंच गई।

इसके बाद विक्टोरिया ने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उसने कहा, 'हमारा हेल्थकेयर सिस्टम मजाक बन चुका है। हमारे साथ खुलकर ठगी हो रही है। आखिर अमेरिका में वही दवा 1000 डॉलर की कैसे हो सकती है और भारत से 10 डॉलर में कैसे मिल जाती है?' उसने आगे यह सवाल भी उठाया कि आखिर वह इतनी बड़ी रकम किस चीज के बदले चुकाने वाली थी। वह कहती है, 'मैं अमेरिका में आखिर 1000 डॉलर किस चीज के लिए देने वाली थी? वह पैसा आखिर जा कहां रहा था? यह एक काल्पनिक सवाल है, लेकिन आप मेरी बात समझ रहे हैं।'

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में लोगों ने भी अमेरिकी सिस्टम को घेरा और भारत की सस्ती दवाओं की जमकर तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, 'मैं भी भारत से सीधे दवाएं मंगवा चुका हूं, वह भी बिना प्रिस्क्रिप्शन के।' एक अन्य यूजर ने दावा किया कि यही दवा भारत में और भी सस्ती है — 'भारत में यह दवा करीब 100 रुपये में मिल सकती है, यानी लगभग 1 डॉलर।'

एक यूजर ने तो मजाकिया लहजे में पूरा गणित ही समझा दिया। उसने लिखा, 'भारत घूमने आओ, एक हफ्ता छुट्टी मनाओ, दवा खरीदो और अमेरिका लौट जाओ। फिर भी कुल खर्च 1000 डॉलर से कम ही रहेगा।' विक्टोरिया का यह वीडियो भले एक निजी अनुभव से शुरू हुआ हो, लेकिन इसने अमेरिका में दवाओं की ऊंची कीमतों और इंश्योरेंस सिस्टम पर एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ दी है।

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