अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के ताज़ा नतीजों ने रिपब्लिकन पार्टी के परंपरागत राजनीतिक गढ़ों में बड़ी उथल-पुथल मचा दी है। साउथ कैरोलिना और नॉर्थ कैरोलिना दोनों ही राज्यों की सीनेट सीटों पर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों ने कब्जा जमा लिया है। इन नतीजों ने उन दोनों महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रिपब्लिकन पार्टी के लंबे प्रभुत्व को तोड़कर रख दिया है, जहाँ कई दशकों से विरोधी दल पैर जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
साउथ कैरोलिना में लगभग तीन दशक बाद डेमोक्रेट्स का प्रवेश
साउथ कैरोलिना में डेमोक्रेटिक प्रत्याशी डॉ. एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डार्लिन ग्राहम को परास्त करके शानदार सफलता हासिल की है। यह क्षेत्र लंबे समय से रिपब्लिकन दल का मजबूत दुर्ग माना जाता रहा है, किंतु इस बार परिणाम पूरी तरह पलट गए। इस राज्य के चुनावी इतिहास में वर्ष 1998 के पश्चात यह पहला अवसर है जब किसी डेमोक्रेट नेता ने सीनेट में अपनी जगह बनाई है।
मतगणना की प्रगति के दौरान जब लगभग 88 फीसदी वोटों की गिनती पूरी हो चुकी थी, उस समय तक डॉ. एनी एंड्रयूज ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर 4.1 प्रतिशत अंकों की स्पष्ट बढ़त बना ली थी। निजी जीवन और कार्यक्षेत्र की बात करें तो डॉ. एंड्रयूज तीन संतानों की माता हैं और पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ के तौर पर काम करती हैं। उनकी यह चुनावी जीत राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस दौर के सबसे अप्रत्याशित घटनाक्रमों में शुमार की जा रही है।
हाई-प्रोफाइल मुकाबला और मतदाताओं की नाराजगी
साउथ कैरोलिना के इस घमासान पर पूरे मुल्क की निगाहें इसलिए भी टिकी हुई थीं क्योंकि डार्लिन ग्राहम पूर्व सीनेटर लिंडसे ग्राहम की सगी बहन हैं। लिंडसे ग्राहम भारत संबंधी नीतियों पर अपने कड़े रुख तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ घनिष्ठ राजनीतिक समीकरणों के चलते लगातार सुर्खियों में रहे हैं। रिपब्लिकन दल ने इस चुनाव में ग्राहम खानदान के सियासी रसूख के भरोसे डार्लिन को मैदान में उतारा था।
डार्लिन की विजय सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं साउथ कैरोलिना पहुंचे और उन्होंने दो बार वहां चुनावी रैलियों में हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त पार्टी संगठन ने इस अभियान में करोड़ों डॉलर का भारी-भरकम फंड भी झोंक दिया। मतदान से पूर्व कई सर्वेक्षण इस मुकाबले को बेहद कांटे की टक्कर वाला आंक रहे थे। हालांकि, रिपब्लिकन मतदाताओं का एक धड़ा परिवारवाद की इस रणनीति से बेहद असंतुष्ट था। ऐसे वोटरों का स्पष्ट मानना था कि केवल राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से किसी को सीनेट जैसी अहम सीट की उम्मीदवारी नहीं सौंपी जानी चाहिए। इसी आंतरिक असंतोष के चलते कई रिपब्लिकन समर्थकों ने खुले तौर पर डॉ. एंड्रयूज के पक्ष में मतदान किया।
नॉर्थ कैरोलिना में रॉय कूपर की ऐतिहासिक वापसी
साउथ कैरोलिना के साथ-साथ पड़ोसी नॉर्थ कैरोलिना में भी रिपब्लिकन पार्टी को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है। यहाँ की बेहद प्रतिष्ठित अमेरिकी सीनेट सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार तथा राज्य के पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने विजय हासिल की। कूपर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हैटली को चुनावी अखाड़े में मात दी।
पूर्व में यह सीनेट सीट रिपब्लिकन नेता थॉम टिलिस के पास थी, जिन्होंने इस मर्तबा दोबारा चुनावी मैदान में न उतरने का निर्णय लिया था। रॉय कूपर की इस कामयाबी के साथ यह सीट सीधे तौर पर रिपब्लिकन खाते से निकलकर डेमोक्रेट्स की झोली में चली गई है। पिछले 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, यानी वर्ष 2008 के उपरांत पहली बार नॉर्थ कैरोलिना से किसी डेमोक्रेटिक नेता ने सीनेट का चुनाव जीता है। पराजित हुए माइकल व्हैटली रिपब्लिकन नेशनल कमिटी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और उन्हें भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूर्ण व खुला समर्थन हासिल था, किंतु यह भारी समर्थन भी उनकी हार नहीं टाल सका।

















