अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के तहत ओहियो राज्य के गवर्नर पद के बेहद चर्चित मुकाबले में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार एमी एक्टन ने रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख प्रत्याशी विवेक रामास्वामी को चुनावी मुकाबले में पराजित कर दिया है। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि ओहियो में पूरे 20 साल बाद किसी डेमोक्रेट को गवर्नर बनने का जनादेश मिला है। राज्य में इससे पहले वर्ष 2006 में डेमोक्रेटिक पार्टी ने गवर्नर पद पर कब्जा जमाया था।
रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
इस चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा और खुला समर्थन हासिल था। ट्रंप के करीबी माने जाने वाले रामास्वामी की इस हार को रिपब्लिकन पार्टी के साथ-साथ खुद राष्ट्रपति के राजनीतिक असर के लिए भी एक गंभीर झटके के तौर पर देखा जा रहा है। मिडटर्म चुनावों को आमतौर पर मौजूदा राष्ट्रपति की नीतियों और कार्यशैली पर जनता के जनमत संग्रह के रूप में आंका जाता है, और ओहियो जैसे पारंपरिक रूप से मजबूत राज्य में मिली यह हार पार्टी के लिए बड़ा नुकसान साबित हो रही है।
दो दशक बाद राज्य की कमान डेमोक्रेट्स के हाथ
ओहियो में पिछले दो दशकों से रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा कायम था। वर्ष 2006 के बाद से कोई भी डेमोक्रेटिक प्रत्याशी यहां गवर्नर की कुर्सी तक नहीं पहुंच सका था। एमी एक्टन की इस चुनावी सफलता ने डेमोक्रेटिक पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है। मतगणना के रुझानों और परिणामों में एक्टन की बढ़त लगातार मजबूत बनी रही, जिसके बाद उनके विजय की पुष्टि हुई और राज्य के प्रशासनिक नेतृत्व में दो दशक लंबा बदलाव देखने को मिला।
देशभर में मिडटर्म चुनाव की गहमागहमी और नतीजे
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान हुआ, जिसमें सीनेट, प्रतिनिधि सभा और कई राज्यों के गवर्नर पदों के लिए लाखों मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। वोटिंग के दौरान न्यूयॉर्क में कई जगह बैलट स्कैन न होने और फ्लोरिडा में भारी बाढ़ के कारण मतदान केंद्रों को बदले जाने जैसी प्रशासनिक चुनौतियां सामने आईं। सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में 120 से अधिक वोटिंग केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मतदान खत्म होने के साथ ही सामने आ रहे शुरुआती नतीजों में केंटकी से रिपब्लिकन एंडी बैर आगे चल रहे हैं, जबकि समग्र रुझानों में सीनेट और हाउस पर डेमोक्रेट्स की मजबूत दावेदारी रिपब्लिकन खेमे की मुश्किलें बढ़ाती दिख रही है।


















