बड़े पर्दे पर भव्य पौराणिक सिनेमा को लेकर दर्शकों की उत्सुकता चरम पर पहुंच चुकी है, जहां 5 नवंबर को बहुप्रतीक्षित फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है। प्रदर्शन से ठीक पहले 3 नवंबर, मंगलवार को मुंबई में एक भव्य प्रीमियर का आयोजन रखा गया था, जिसमें निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी पूरी टीम अपने परिजनों के साथ शामिल हुई। टीजर के सामने आने के बाद से ही डिजिटल मंचों पर फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX), विशाल सेट निर्माण और संगीत को लेकर लगातार बातचीत देखने को मिल रही है। इसी माहौल के बीच मुख्य अभिनेता रणबीर कपूर और यश ने सिनेमा निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती पैठ पर अपने स्पष्ट विचार साझा किए हैं।
तकनीक केवल एक साधन है, इंसानी स्पर्श का विकल्प नहीं
सिनेमा उद्योग में आधुनिक टूल्स के दखल पर दोनों प्रमुख कलाकारों का दृष्टिकोण बेहद संतुलित नजर आया। उनका स्पष्ट कहना है कि नई प्रणालियां निर्माण प्रक्रिया को रफ्तार दे सकती हैं और उसे तकनीकी तौर पर धारदार बना सकती हैं, लेकिन कभी भी जीवित अभिनय और इंसानी हुनर की बराबरी नहीं कर सकतीं। अभिनय के क्षेत्र में वास्तविक भावों की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया गया कि कला का मूल अस्तित्व ही इंसानी रिश्तों और संवेदनाओं से संचालित होता है।
रणबीर कपूर ने इस संबंध में जोर देकर कहा कि कलात्मक माध्यमों में मानवीय जुड़ाव सबसे बुनियादी तत्व है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीकों को लेंस या विजुअल इफेक्ट्स की भांति केवल सुविधा बढ़ाने वाले औजार के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि कला तब अधिक व्यक्तिगत महसूस होती है जब उसमें मानवीय स्पर्श समाहित हो, और कहानी कहने या प्रदर्शन करने वाली कला की जगह मशीनें कभी नहीं ले सकतीं।
रचनात्मकता और सतर्कता के साथ तकनीक का संतुलन
दूसरी तरफ फिल्म में रावण का किरदार निभाने वाले यश ने आधुनिक एल्गोरिद्म के उपयोग को लेकर अधिक सजग और सतर्क रहने की वकालत की। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी कलात्मक उद्यम के केंद्र में अंततः इंसान ही होते हैं, इसलिए यह सीमा तय करना अनिवार्य है कि इन स्वचालित तकनीकों का प्रयोग कहां और कितनी मात्रा में किया जाए। उनके अनुसार नई कल्पनाएं गढ़ने और मौलिक रचना करने का जो सामर्थ्य मानवीय मस्तिष्क के पास है, वह हर जटिल मशीन को चुनौती दे सकता है।
यश ने इस बात पर खास बल दिया कि इंसान परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ने वाले सर्वाइवर रहे हैं, इसलिए इस नई तकनीकी क्रांति के दौर में भी घबराने के बजाय समझदारी से रास्ता निकालने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक सोच के आगे कोई भी बनावटी प्रणाली टिक नहीं सकती, बशर्ते लोग इन टूल्स का उपयोग बिना अपनी पहचान खोए और पूरी सूझबूझ के साथ करें।



















