बिहार के गया स्थित ऐतिहासिक पर्यटन स्थल बोधगया में सर्दियों की दस्तक के साथ ही तिब्बती रिफ्यूजी मार्केट गुलजार हो चुका है। लगभग चार दशकों से निरंतर लगने वाला यह मौसमी बाजार देशी-विदेशी पर्यटकों और स्थानीय खरीदारों के बीच खासा लोकप्रिय रहता है। अक्टूबर से बोधगया का सालाना पर्यटन सीजन शुरू हो जाता है, जिसके चलते लाखों बौद्ध श्रद्धालु और सैलानी यहां पहुंचते हैं। मौजूदा समय में वियतनाम, तिब्बत और म्यांमार जैसे कई देशों से बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान बोधगया पहुंच रहे हैं, जिससे इस बाजार की रौनक और बढ़ गई है।
80 फीट बुद्ध प्रतिमा के समीप 50 दुकानों का जमावड़ा
बोधगया की सुप्रसिद्ध 80 फीट ऊंची बुद्ध मूर्ति के नजदीक यह पूरा बाजार स्थापित किया गया है। इस बार यहां कुल 50 दुकानें सजाई गई हैं। इनमें से 30 दुकानें तिब्बत से आए शरणार्थियों द्वारा संचालित की जा रही हैं, जबकि 20 दुकानों का संचालन स्थानीय व्यापारियों के हाथों में है। इस बाजार में भारत से बाहर विदेशों में तैयार गर्म कपड़ों का विशाल संग्रह बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है।
बाजार की खास बात यह है कि यहां हर बजट और वर्ग के लोगों के लिए कपड़े मौजूद हैं। सामानों की कीमतें 100 रुपये से शुरू होकर हजारों रुपये तक जाती हैं। सिर्फ बोधगया ही नहीं, बल्कि गया शहर से भी भारी संख्या में आम लोग यहां गर्म कपड़ों की किफायती खरीदारी करने के लिए पहुंच रहे हैं।
फिक्स रेट और सुबह आठ से रात आठ बजे तक का समय
यह मौसमी बाजार पूरे सप्ताह सातों दिन संचालित होता है। ग्राहक सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक अपनी सुविधानुसार खरीदारी कर सकते हैं। बाजार में सभी सामानों के दाम पूरी तरह तय यानी फिक्स रेट पर रखे गए हैं, जिससे किसी भी तरह की सौदेबाजी या मोल-भाव की गुंजाइश नहीं रहती है। तय मूल्य व्यवस्था होने के बावजूद बाजार के सामान्य भावों की तुलना में यहां वस्तुएं काफी सस्ती मिलती हैं।
तिब्बत से आईं दुकानदार तेजिंग के अनुसार, यह बाजार प्रतिवर्ष अक्टूबर महीने में शुरू होता है और फरवरी महीने तक लगातार चलता रहता है। जैसे ही ठंड का मौसम समाप्त होता है और फरवरी का महीना बीतता है, तिब्बती दुकानदार अपनी दुकानें समेटकर वापस अपने गंतव्य को लौट जाते हैं।
शॉल, कोट से लेकर सौंदर्य प्रसाधन और लक्जरी बैग की वैरायटी
लगभग 40 साल के लंबे सफर में इस बाजार ने अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। यहां केवल गर्म कपड़े ही नहीं, बल्कि दैनिक उपयोग की कई अन्य वस्तुएं भी उपलब्ध हैं। स्टॉल्स पर शॉल, कोट, कोरियन सुपरमार्केट का सामान, महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधन, लक्जरी बैग तथा जूते-चप्पल जैसी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।
व्यापारियों के अनुसार, बाजार में सबसे अधिक मांग महिलाओं और बच्चों के ऊनी कपड़ों की देखी जा रही है। हर सीजन में यहां लाखों रुपये का कारोबार दर्ज होता है, जिससे न केवल तिब्बती शरणार्थियों को आय का एक बड़ा जरिया मिलता है, बल्कि स्थानीय दुकानदारों की भी अच्छी कमाई हो जाती है।


















