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अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग में अमेरिकी रिपोर्ट में भारत के कदमों की सराहना, चीन और पाकिस्तान के नेटवर्क पर सख्तीअमेरिका
19 सित॰ 2026, 6:25 pm (40 दिन पहले)· 1

अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग में अमेरिकी रिपोर्ट में भारत के कदमों की सराहना, चीन और पाकिस्तान के नेटवर्क पर सख्ती

व्हाइट हाउस की नवीनतम नशीले पदार्थ नियंत्रण रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत समेत 23 देशों को प्रमुख ट्रांजिट सूची में रखा गया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और कड़े कानूनी कदमों की विशेष प्रशंसा की गई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध मादक पदार्थों और संगठित अपराध के खिलाफ चल रही वैश्विक लड़ाई में भारत के प्रयासों को अमेरिका की ओर से बड़ा समर्थन मिला है। अमेरिका द्वारा जारी नई प्रेसिडेंशियल रिपोर्ट में जहां बीजिंग और इस्लामाबाद से जुड़े नारकोटिक नेटवर्क और घातक रसायनों की सप्लाई पर कड़ा रुख अपनाया गया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उठाए जा रहे सख्त कदमों को भरोसेमंद रणनीति के रूप में रेखांकित किया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भारत की मजबूत नीतियां और सख्त कानून प्रवर्तन इस वैश्विक खतरे से निपटने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ट्रांजिट सूची में भारत का नाम और उसकी वास्तविक वजह

अमेरिकी प्रशासन ने वित्त वर्ष 2027 के लिए एक विस्तृत सूची जारी की है, जिसमें भारत सहित कुल 23 देशों को प्रमुख ड्रग ट्रांजिट अथवा अवैध मादक पदार्थ उत्पादक देशों के रूप में चिन्हित किया गया है। हालांकि, इस रिपोर्ट में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि किसी भी देश का नाम इस सूची में दर्ज होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि वहां की सरकार अपने नशा विरोधी अभियानों में विफल रही है।

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व्हाइट हाउस की इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत को इस फेहरिस्त में शामिल किए जाने के पीछे मुख्य कारण उसका भौगोलिक स्थान, उसका विशाल व्यापारिक नेटवर्क और मजबूत आर्थिक गतिविधियां हैं। अंतरराष्ट्रीय तस्कर अक्सर इन बड़े वाणिज्यिक और भौगोलिक रास्तों का गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए बेहद सख्त, निरंतर और प्रभावी कानूनी कदम उठाए हैं।

यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क और द्विपक्षीय सहयोग

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में अफीम की अवैध खेती पर नकेल कसने और सुरक्षित वाणिज्यिक आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की है। वाशिंगटन अब यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के माध्यम से नई दिल्ली के साथ अपने इस रणनीतिक तालमेल को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

दोनों देशों के बीच यह साझा नीतिगत ढांचा दक्षिण एशिया में मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मददगार साबित होगा। इसके साथ ही, ड्रग्स के अवैध कारोबार से पैदा होने वाली टेरर फंडिंग की जड़ों पर प्रहार करने और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिहाज से भी इस साझेदारी को अत्यंत अहम माना जा रहा है।

विफल देशों की तुलना में भारत की सकारात्मक भूमिका

इस रिपोर्ट में कई देशों के ट्रैक रिकॉर्ड की तीखी समीक्षा भी की गई है। जहां अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा और कोलंबिया जैसे मुल्कों को अंतरराष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण से जुड़े दायित्वों को पूरा करने में पूरी तरह विफल घोषित किया गया है, वहीं भारत की भूमिका को पूरी तरह सकारात्मक और जिम्मेदार आंका गया है।

चीन से निकलने वाले खतरनाक केमिकल प्रिकर्सर्स और कनाडाई प्रयोगशालाओं से जुड़े जोखिमों को लेकर जहां गंभीर चिंता जताई गई है, वहीं दूसरी ओर भारत को एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा गया है। यह पूरा घटनाक्रम यह प्रदर्शित करता है कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और नशीले पदार्थों के उन्मूलन के मामले में भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंध निरंतर मजबूत हो रहे हैं।

सवाल-जवाब

अमेरिका की ताजा रिपोर्ट में भारत को किस सूची में शामिल किया गया है?
अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत समेत 23 देशों को प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादक देशों की सूची में शामिल किया है।
क्या इस सूची में नाम होने का मतलब भारत सरकार की नाकामी है?
नहीं, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि भारत का नाम उसके विशाल व्यापारिक नेटवर्क और भौगोलिक स्थिति के कारण है, न कि सरकार के अभियानों की विफलता के कारण।
अमेरिकी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किस काम की तारीफ की गई है?
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार द्वारा अफीम की अवैध खेती रोकने और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा बढ़ाने के कदमों की सराहना की गई है।
यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशिया में नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना और उससे जुड़ी टेरर फंडिंग को समाप्त करना है।
रिपोर्ट में किन देशों को अंतरराष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण दायित्वों में विफल माना गया है?
अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा और कोलंबिया जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में विफल घोषित किया गया है।
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