कम आय वाले नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने वाले अमेरिकी मेडिकेड कार्यक्रम में गंभीर रूप से अस्वस्थ लाभार्थियों को एक अहम कानूनी राहत मिली है। बोस्टन स्थित संघीय जिला अदालत ने उस प्रशासनिक दिशानिर्देश पर रोक लगा दी है जिसके तहत चिकित्सकीय रूप से कमजोर या गंभीर बीमार लोगों को छूट पाने के लिए यह भी साबित करना पड़ता था कि उनकी बीमारी काम करने की निर्धारित शर्तों को पूरा करने में बाधा डाल रही है। अदालत के इस हस्तक्षेप के बाद अब गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग काम से जुड़े नियमों का अतिरिक्त प्रमाण दिए बिना स्वास्थ्य बीमा छूट के पात्र बने रह सकते हैं।
बोस्टन अदालत ने दिया पच्चीस राज्यों को आंशिक सहारा
अमेरिकी जिला न्यायाधीश रिचर्ड स्टर्न्स ने सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज की ओर से जारी दिशानिर्देशों के खिलाफ दायर याचिका पर अपना 16 पृष्ठों का फैसला सुनाया। यह याचिका पच्चीस राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के समूह ने जून के महीने में दायर की थी, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा बनाए गए 2025 के व्यापक कानून वन बिग ब्यूटीफुल बिल के तहत पेश नई प्रशासनिक नियमावली को चुनौती दी गई थी। अदालत ने राज्यों के तर्कों को आंशिक रूप से स्वीकार किया, हालांकि मेडिकेड के मूल वर्क रिक्वायरमेंट यानी कामकाज से जुड़े प्राथमिक ढांचे को रद्द नहीं किया गया है।
न्यायाधीश रिचर्ड स्टर्न्स ने अपने 16 पन्नों के निर्णय में रेखांकित किया कि नए प्रशासनिक नियम लागू होने से राज्यों की स्वास्थ्य प्रणालियों पर तुरंत भारी वित्तीय और तकनीकी दबाव पड़ता। स्टर्न्स के अनुसार राज्यों ने यह साबित करने का भार सफलतापूर्वक उठाया कि उन्हें ऐसी अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ता जिसकी भरपाई वित्तीय मुआवजे से संभव नहीं है, क्योंकि राज्यों को अपनी पात्रता सत्यापन प्रणालियों में बहुत महंगे और गहन बदलाव करने की विवशता बन जाती।
कानूनी परिभाषा और प्रशासनिक सीमा पार करने की बहस
वर्ष 2025 में पारित कानून में यह स्पष्ट किया गया था कि मेडिकेड के अंतर्गत चिकित्सकीय रूप से कमजोर किसे माना जाएगा। कानून की इस श्रेणी में नेत्रहीन या दिव्यांग नागरिक, मादक पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति, रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने वाली गंभीर या मानसिक बीमारियों वाले मरीज और जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से घिरे लोग शामिल किए गए थे।
मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का मुख्य तर्क यह था कि सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज ने कानून की मूल भाषा से आगे बढ़कर अपनी सीमाएं लांघीं। एजेंसी ने नए दिशानिर्देशों के माध्यम से संरक्षित समूहों पर यह अतिरिक्त शर्त थोप दी थी कि वे यह भी साबित करें कि उनकी शारीरिक या मानसिक स्थिति काम के नियमों को पूरा करने की क्षमता को सीमित करती है। राज्यों का कहना था कि यह अतिरिक्त परीक्षण उन वास्तविक बीमार लोगों को भी बाहर कर सकता था जो कानून के तहत पूरी तरह पात्र थे।
विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का दृष्टिकोण
द हिलटॉप इंस्टीट्यूट में मेडिकेड का अध्ययन करने वाले अर्थशास्त्री मॉर्गन हेंडरसन ने इस अदालती निर्देश के प्रभाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे लोग जो गंभीर रूप से बीमार हैं लेकिन शायद तकनीकी रूप से इतने बीमार नहीं माने जा रहे थे कि वे हर पैमाने पर खरे उतरें, उनका स्वास्थ्य कवर छिन सकता था, पर अब उनका कवरेज सुरक्षित रह सकता है।
उत्तरी कैरोलिना के स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव देव सांगवई ने भी इस कदम का स्वागत किया। सांगवई ने एक बयान में कहा कि हमारी शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को जटिल कागजी कार्रवाई या इलाज के दौरान कवरेज खोने के डर के बिना आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल मिल सके। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है, जो हमारे राज्य के सबसे कमजोर निवासियों को उनकी सबसे बड़ी जरूरत के समय विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है।
निगरानी के दो कड़े नियमों को रखा बरकरार
अदालत ने जहां काम की क्षमता साबित करने की अतिरिक्त शर्त को खारिज किया, वहीं चिकित्सकीय कमजोरी के सत्यापन से जुड़ी दो अन्य संघीय पाबंदियों को यथावत बनाए रखा है। इनमें पहला नियम यह है कि राज्य किसी भी ऐसे मेडिकल प्रमाण को स्वीकार नहीं करेंगे जिसका डायग्नोसिस एक वर्ष से अधिक पुराना हो चुका हो। दूसरा नियम यह तय करता है कि निरंतर नामांकन अवधि के दौरान लाभार्थी केवल एक बार ही स्व-प्रमाणन यानी सेल्फ अटेस्टेशन का उपयोग कर सकता है।
न्यायाधीश रिचर्ड स्टर्न्स ने इन दोनों प्रावधानों को उचित ठहराते हुए टिप्पणी की कि सरकार ने दोनों नियमों को अपनाने के लिए एक गैर-तुच्छ औचित्य पेश किया है और यह स्पष्ट किया है कि उसने राज्यों द्वारा उठाई गई बेदखली की चिंताओं को पूरी तरह बाध्यकारी क्यों नहीं पाया। इस बीच सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज ने अदालत के इस फैसले पर कोई भी आधिकारिक टिप्पणी करने से मना कर दिया है।
विस्तारित सुरक्षा कवच और नई अनिवार्यताओं की समयसीमा
मेडिकेड से जुड़े यह नए कड़े नियम 2025 में पारित ट्रंप के विशाल कर और नीतिगत कानून का अहम हिस्सा हैं। यह प्रतिबंध उन लाखों नागरिकों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालते हैं जो अधिकतर अमेरिकी राज्यों में मेडिकेड विस्तार योजना के माध्यम से जुड़े हैं। यह विस्तार योजना कम आय वाले वयस्कों को सरकारी सुरक्षा घेरा मुहैया कराने का एक मजबूत आधार रही है।
कानून के तहत 1 जनवरी से मेडिकेड विस्तार से जुड़े 19 से 64 वर्ष की आयु के सभी लाभार्थियों के लिए गतिविधि संबंधी नियम पूरे करना अनिवार्य किया गया है। इन लाभार्थियों को हर महीने कम से कम 80 घंटे काम करना होगा या सामुदायिक सेवा में भाग लेना होगा। इसके अलावा कम से कम आधे समय के लिए किसी शैक्षणिक संस्थान में अध्ययनरत होना भी विकल्प के रूप में शामिल है। हालांकि कुछ विशेष अपवादों को सुरक्षित रखा गया है, जिनमें चिकित्सकीय रूप से गंभीर अस्वस्थ लोग और लत मुक्ति उपचार कार्यक्रमों में भाग ले रहे नागरिक शामिल हैं।



















