पश्चिम एशिया में इस वक्त अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के परिणाम को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र में शांति बहाल करने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। इसके विपरीत, दोनों पक्षों के बीच संघर्ष के और अधिक भीषण रूप लेने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। हाल ही में घटी तीन प्रमुख घटनाओं से इस बात का स्पष्ट संकेत मिलता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।
अबू धाबी का गुप्त दौरा और सैन्य हलचल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद गोपनीय तरीके से अबू धाबी की यात्रा पूरी की है। इस गुप्त यात्रा के तुरंत बाद से ही पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों में हलचल तेज हो गई है। इसके साथ ही, इस संवेदनशील क्षेत्र में अमेरिका के भारी सैन्य परिवहन विमानों का लगातार जमावड़ा देखा जा रहा है, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि किसी बड़े सैन्य अभियान की तैयारी चल रही है।
होर्मुज स्ट्रेट में ठप हुआ समुद्री कारोबार
क्षेत्रीय तनाव का सबसे बड़ा असर समुद्री मार्गों पर पड़ा है, जहां रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो चुकी है। इस रास्ते के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जिस तरह की सामरिक गतिविधियां चल रही हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि अमेरिका के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ कोई बड़ा और निर्णायक हमला किया जा सकता है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और युद्ध की आशंका
इस बीच, ईरान की तरफ से भी साफ कर दिया गया है कि वह अमेरिका और इजरायल के किसी भी आक्रामक कदम का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। तेहरान ने अंतिम दौर का युद्ध लड़ने की बात कहते हुए अपनी युद्धक तैयारियों को पुख्ता कर लिया है। इन तमाम घटनाक्रमों को देखते हुए आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में खूनी संघर्ष और ज्यादा बढ़ने की आशंका गहराई जा रही है, जिससे वैश्विक शांति के लिए एक नई चुनौती पैदा हो गई है।




















