न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से रूस ने एक बार फिर भारत के प्रति अपनी मजबूत कूटनीतिक प्रतिबद्धता को दुनिया के सामने रखा है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का जोरदार समर्थन किया। इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई दिल्ली के बढ़ते कद और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी के एक और बड़े प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है।
अपने भाषण के दौरान सर्गेई लावरोव ने केवल भारत का पक्ष ही नहीं रखा, बल्कि वैश्विक मंच पर पश्चिमी देशों के बढ़ते वर्चस्व और प्रतिनिधित्व को और अधिक मजबूत करने के प्रयासों के खिलाफ भी कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के भीतर किसी भी प्रकार के सुधार से वर्तमान परिषद और उसके स्थायी सदस्यों के विशेष अधिकारों और व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कटौती नहीं होनी चाहिए, जिससे वैश्विक संतुलन बना रहे।
जर्मनी और जापान को अतिरिक्त स्थान देने का कड़ा विरोध
मॉस्को की दीर्घकालिक और सैद्धांतिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए रूसी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा परिषद में सुधारों के नाम पर पश्चिमी देशों, विशेषकर जर्मनी और जापान को अतिरिक्त सीटें आवंटित करने से पूरी तरह बचा जाना चाहिए। लावरोव ने इस विरोध के पीछे का तर्क देते हुए कहा कि ये देश वर्तमान में सैन्यवाद और प्रतिशोध की भावना की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, जिससे वैश्विक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
रूस का यह रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पश्चिमी ध्रुव के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है, जहां मास्को लगातार बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करता रहा है। उनका यह बयान संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में सुधार की चल रही लंबी बहस के बीच एक नया कूटनीतिक समीकरण पेश करता है, जो पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों के प्रस्तावों से अलग है।
ग्लोबल साउथ और विकासशील देशों को प्राथमिकता देने की वकालत
पश्चिमी देशों की दावेदारी पर सवाल उठाने के साथ ही रूसी विदेश मंत्री ने विकासशील देशों के समूह यानी ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक निकाय में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना न्यायसंगत और आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस वैश्विक मंच पर स्थायी सीट के लिए भारत के साथ-साथ ब्राज़ील की उम्मीदवारी का भी पूरी दृढ़ता से समर्थन करता है।
इसके साथ ही, लावरोव ने अफ्रीकी महाद्वीप के हितों को प्राथमिकता दिए जाने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने याद दिलाया कि इज़राइली सहमति और इज़ाज़त या संबंधित घोषणाओं में जिस प्रकार अफ्रीकी देशों के अधिकारों की बात कही गई है, संयुक्त राष्ट्र सुधारों के दौरान उन हितों को पूरी तरह ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में सभी क्षेत्रों की न्यायसंगत भागीदारी सुनिश्चित हो सके।



















