संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से वैश्विक नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर एक साझा और बुलंद आवाज उठाई है। दुनिया के कई देश इस बात पर सहमत नजर आए कि समुद्री जलमार्गों पर बढ़ते खतरे केवल क्षेत्रीय संघर्षों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरी वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंचों पर इस बात को लेकर गंभीर चिंता जताई गई कि जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों और महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में पैदा की जा रही रुकावटों ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पहिए को धीमा कर दिया है। इसी सिलसिले में भारत ने भी अन्य प्रमुख खाड़ी और वैश्विक देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय जहाजों के सुरक्षित और सुगम आवागमन की पुरजोर वकालत की है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जताई गहरी चिंता, संयम बरतने की अपील की
संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैश्विक मंच पर स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और उनके चालक दल को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्री ने सभी संबंधित पक्षों से तत्काल प्रभाव से संयम बरतने और तनाव को कम करने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया। उनका मानना है कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि ऊर्जा संसाधनों और अन्य व्यापारिक वस्तुओं की आवाजाही बिना किसी बाधा के निरंतर जारी रहे। इसके साथ ही, भारत ने विभिन्न संघर्षों के बीच फंसने वाले बेकसूर नाविकों और व्यापारिक बेड़ों की सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग उठाई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं ये संकरे समुद्री गलियारे
भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो कुछ विशिष्ट समुद्री मार्ग पूरी दुनिया के व्यापार को नियंत्रित करते हैं। होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देशों को अरब सागर और हिंद महासागर के रास्ते सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। दूसरी ओर, बाब अल-मंदेब और लाल सागर का जलमार्ग हिंद महासागर को स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों से जोड़ता है। इसी तरह, मलक्का और सिंगापुर स्ट्रेट हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ने वाले अत्यंत व्यस्त मार्ग हैं। भारत जैसे विकासशील देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं। अगर इन संवेदनशील समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, माल ढुलाई का खर्च और बीमा प्रीमियम की दरें अत्यधिक बढ़ जाती हैं, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की जेब पर पड़ता है।
ओमान और सऊदी अरब ने संप्रभुता और मुक्त व्यापार की वकालत की
ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि हालिया क्षेत्रीय तनावों के कारण होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला जहाजों का आवागमन लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने आगाह किया कि इस व्यवधान ने न केवल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को संकट में डाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यवस्था पर दुनिया के भरोसे को भी कमजोर किया है। उन्होंने दोहराया कि ओमान समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के तहत होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित नौवहन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी सुर में सुर मिलाते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही की सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।” सऊदी अरब ने व्यापारिक जहाजों पर किसी भी तरह के अतिरिक्त शुल्क या पाबंदियों का कड़ा विरोध किया है और समुद्री मार्गों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है।
बहरीन ने समझाया समुद्री सुरक्षा का मानवीय और भौगोलिक पहलू
बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायानी ने इस चर्चा को एक नया आयाम देते हुए कहा कि किसी भी समुद्री मार्ग की नाकेबंदी केवल तटीय देशों को ही नहीं, बल्कि दुनिया के हर कोने को प्रभावित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन जलमार्गों के जरिए ही दुनिया भर के परिवारों तक आवश्यक भोजन, दवाएं और जीवन रक्षक ऊर्जा संसाधन पहुंचते हैं। जब ये रास्ते बंद होते हैं, तो समुद्र से सैकड़ों मील दूर चारों तरफ से जमीन से घिरे देशों में रहने वाले लोगों को भी भारी किल्लत और महंगाई का सामना करना पड़ता है। बहरीन ने समुद्री रास्तों से गुजरने के लिए विशेष परमिट या मनमाने टैक्स वसूलने की किसी भी व्यवस्था को पूरी तरह से अनुचित बताया है।
फिलीपींस ने उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा और सिंगापुर ने पेश किया सहयोगात्मक मॉडल
फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा लाजारो ने वैश्विक व्यापार में नाविकों के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया का लगभग 90 प्रतिशत व्यापार समुद्र के जरिए होता है, जिसे सुचारू रूप से चलाने में करीब 20 लाख नाविक दिन-रात काम करते हैं। इनमें से एक-चौथाई से अधिक नाविक अकेले फिलीपींस से आते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में हाल ही में हुई एक दुखद घटना का जिक्र करते हुए, जिसमें फिलीपींस के दो नाविकों की मृत्यु हो गई थी, उन्होंने कहा, “यह घटना हमें याद दिलाती है कि समुद्री सुरक्षा का मतलब इंसानों की सुरक्षा भी है।” दूसरी ओर, सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने सिंगापुर स्ट्रेट का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सीमावर्ती देशों ने आपसी तालमेल और UNCLOS के नियमों के तहत काम करके दुनिया के इस सबसे व्यस्त मार्ग को पूरी तरह से खुला और सुरक्षित बनाए रखा है। अंत में, जिबूती के विदेश मंत्री अब्दुलकादर हुसैन उमर ने भी लाल सागर में ऐसी ही एकजुटता दिखाने की अपील की ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बिखरने से बचाया जा सके।



















