अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे भारतीय युवाओं की प्राथमिकताओं में बड़ा रणनीतिक बदलाव देखा जा रहा है। अब छात्र सिर्फ किसी विदेशी विश्वविद्यालय के नाम या सामान्य डिग्री के भरोसे अपना भविष्य दांव पर लगाने को तैयार नहीं हैं। इंटरनेशनल एजुकेशन सर्विस प्रोवाइडर और आईईएलटीएस के सह-मालिक आईडीपी एजुकेशन के ताजा 'इमर्जिंग फ्यूचर्स: वॉयस ऑफ द इंटरनेशनल स्टूडेंट' अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय आवेदक अब कहीं अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे किसी भी संस्थान या देश का चयन करने से पहले करियर की सुरक्षा, उभरती तकनीकी दक्षता और सख्त होते आव्रजन नियमों के व्यावहारिक पहलुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
काम के अवसर और रोजगार पर सबसे ज्यादा ध्यान
दुनियाभर के 106 देशों और क्षेत्रों के 4,800 से अधिक विद्यार्थियों पर किए गए इस व्यापक सर्वेक्षण में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही, जिसमें 994 प्रतिभागियों ने अपनी राय साझा की। वैश्विक स्तर पर जहाँ 23 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का निर्णय लेते समय 'रहने का खर्च' सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, वहीं भारतीय आवेदकों का ध्यान पूरी तरह रोजगार की संभावनाओं पर टिका है।
सर्वेक्षण के अनुसार, 22 प्रतिशत भारतीय विद्यार्थियों के लिए सबसे निर्णायक कारक यह है कि पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद उन्हें उस देश में काम करने के अवसर यानी पोस्ट-स्टडी वर्क अपॉर्चुनिटीज कितने मिल पाएंगे। छात्र अब डिग्री के औपचारिक महत्व की तुलना में इस बात की गहन समीक्षा कर रहे हैं कि उनकी उच्च शिक्षा उनके पेशेवर करियर और वित्तीय भविष्य को कितना सुरक्षित बना पाएगी।
एआई और तकनीकी दक्षता की मांग में भारतीय आगे
आधुनिक प्रौद्योगिकी के दौर में भारतीय छात्र अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी आगे की सोच लेकर चल रहे हैं। इस अध्ययन में शामिल 47 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने स्पष्ट रूप से माना कि आने वाले समय में नौकरियों में कामयाबी पाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और आधुनिक टेक स्किल्स बेहद अनिवार्य हैं।
यह आंकड़ा 42 प्रतिशत के वैश्विक औसत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इस स्पष्ट रुझान से संकेत मिलता है कि भारतीय युवा ऐसे विशेष पाठ्यक्रमों और वैश्विक संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो उन्हें अत्याधुनिक तकनीक और एआई-संचालित कार्यप्रणाली में पूरी तरह दक्ष बना सकें, ताकि वे भविष्य के जॉब मार्केट में मजबूती से टिक सकें।
वीजा नीतियों के बदलाव और मल्टीपल देशों का विकल्प
हाल के समय में कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक रूप से पसंदीदा देशों में वीजा नियमों और आव्रजन नीतियों में लगातार कड़े संशोधन देखने को मिले हैं। इन अनपेक्षित नीतिगत बदलावों और वीजा जटिलताओं से अपने करियर को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय छात्रों ने एक नई रणनीति तैयार की है।
रिपोर्ट के आंकड़े दर्शाते हैं कि 74 प्रतिशत संभावित भारतीय छात्र अब एक ही समय में कई देशों के अध्ययन विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इस तरह एक से अधिक देशों का बैकअप रखने से छात्रों को यह विश्वास मिलता है कि यदि किसी एक देश के आव्रजन नियम अचानक सख्त हो जाएं या वीजा मिलने में बाधा आए, तो उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष और भविष्य खराब नहीं होगा।


















