इतिहास में ग्यारह सितंबर दो हजार एक का दिन अमेरिकी जमीन पर हुए खौफनाक आतंकी हमलों के कारण दर्ज है। इस भयंकर आपदा के तुरंत बाद पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया और नेशनल सिक्योरिटी के मद्देनजर तमाम उड़ानों पर पाबंदी लगा दी गई थी। न्यूयार्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए इन हमलों के बाद अमेरिकी आसमान पूरी तरह वीरान हो चुका था और किसी भी सिविलियन विमान को हवा में रहने की इजाजत नहीं थी। इसी बीच एक ऐसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी सामने आई, जिसके समाधान के लिए हजारों मील की दूरी से एक बेहद जरूरी दवा मंगाने की चुनौती खड़ी हो गई थी।
यह पूरा मामला बासठ वर्षीय लॉरेंस वैन सर्टिमा से जुड़ा हुआ है, जिन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों में गिने जाने वाले ऑस्ट्रेलियन इनलैंड ताइपन ने काट लिया था। उस खौफनाक दिन यानी ग्याहर सितंबर को वह सांपों की देखभाल कर रहे थे, तभी इस जहरीले जीव ने उनके अंगूठे को अपना शिकार बना लिया। लॉरेंस वैन सर्टिमा इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि यह कोई आम सांप नहीं है, इसलिए उनकी पत्नी उन्हें तुरंत अस्पताल ले गईं। डॉक्टरों ने इलाज शुरू तो किया, लेकिन जहर का असर इतनी तेजी से फैला कि उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई।
खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन ने उनके नर्वस सिस्टम को तेजी से अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था, जिसके चलते उनकी आंखों, कानों और मुंह से खून बहने लगा। जहर के মারাত্মক प्रभाव से वह अछूते नहीं रहे और कुछ ही देर में पूरी तरह बेहोश हो गए। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी बाधा यह थी कि लॉरेंस वैन सर्टिमा की जान बचाने के लिए जिस एंटीवेनम की सख्त जरूरत थी, वह फ्लोरिडा राज्य में उपलब्ध ही नहीं था। जब अस्पताल प्रशासन ने इस दुर्लभ दवा की तलाश शुरू की, तो पता चला कि यह केवल न्यूयार्क के ब्रॉन्क्स जू और कैलिफोर्निया के सैन डिएगो जू में ही मिल सकती है।
देशभर में लागू एयर ट्रैफिक बैन के कारण कैलिफोर्निया से फ्लोरिडा तक दवा पहुंचाना असंभव प्रतीत हो रहा था। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने सभी प्रकार की नागरिक उड़ानों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी और हवा में मौजूद सभी विमानों को तुरंत नजदीकी एयरपोर्ट्स पर उतारने के आदेश दिए गए थे। ऐसी पाबंदियों के बीच सैन डिएगो से मियामी तक एंटीवेनम की खेप पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। अस्पताल और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े अधिकारी लगातार इस बात के प्रयास कर रहे थे कि किसी भी तरह दवा को समय पर मरीज तक पहुंचाया जाए।
इसी जद्दोजहद के दौरान बैपटिस्ट हेल्थ साउथ फ्लोरिडा की एयर एंबुलेंस सेवा से जुड़े जॉनी डेलगाडो ने फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क साधा। उनके सामने सबसे बड़ा और अहम सवाल यह था कि क्या इस विकट स्वास्थ्य आपातकाल के बीच किसी खास विमान को उड़ान भरने की अनुमति मिल सकती है। यह कोई सामान्य यात्रा नहीं थी और इसका उद्देश्य किसी यात्री को सुरक्षित जगह पहुंचाना नहीं था, बल्कि सैन डिएगो से मियामी तक केवल एक जीवन रक्षक एंटीवेनम को पहुंचाना था।
जॉनी डेलगाडो ने अधिकारियों के सामने मरीज की बेहद नाजुक स्थिति का पूरा ब्योरा रखा और स्पष्ट किया कि अगर समय रहते यह दवा नहीं पहुंची, तो लॉरेंस वैन सर्टिमा अपनी जान गंवा बैठेंगे। हालात की गंभीरता और एक नागरिक की जिंदगी का सवाल देखते हुए अंततः फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने इस विशेष मेडिकल मिशन को हरी झंडी दे दी। हालांकि इस मंजूरी के साथ एक बेहद सख्त शर्त भी जुड़ी थी कि विमान को केवल दिन के उजाले के समय ही उड़ान भरने की अनुमति होगी। इस तरह उस दौर में जब पूरा अमेरिकी आसमान पूरी तरह बंद था, एक विशेष विमान ने एंटीवेनम की डिलीवरी के लिए उड़ान भरी।
यह दुर्लभ एंटीवेनम अंततः सैन डिएगो से मियामी सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया। ऑस्ट्रेलियन इनलैंड ताइपन के जहर में ऐसे घातक टॉक्सिन्स पाए जाते हैं जो शरीर के भीतर रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया को रोक देते हैं और सीधे तौर पर तंत्रिका तंत्र तथा मांसपेशियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यही वजह थी कि इस खास एंटीवेनम का सही समय पर मरीज तक पहुंचना अनिवार्य था। दवा अस्पताल पहुंची और लॉरेंस वैन सर्टिमा को दी गई। जिस समय पूरा देश राष्ट्रीय सुरक्षा और हमलों के बाद के हालातों से जूझ रहा था, उसी वक्त एक इंसान की जिंदगी बचाने के लिए प्रशासनिक तंत्र और चिकित्सा दल ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।



















