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अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के चुनाव आदेश पर लगाई स्थायी रोक, नागरिकता का सबूत मांगने वाली शर्त रद्दअमेरिका
25 जून 2026, 2:06 am (45 दिन पहले)· 4

अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के चुनाव आदेश पर लगाई स्थायी रोक, नागरिकता का सबूत मांगने वाली शर्त रद्द

बोस्टन की एक संघीय अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव से जुड़े पहले कार्यकारी आदेश के ज्यादातर हिस्से पर स्थायी रोक लगा दी, जिसमें मतदाता से नागरिकता का दस्तावेजी सबूत मांगने वाली शर्त भी शामिल थी। जज ने कहा कि चुनाव कराने का अधिकार राज्यों और कांग्रेस के पास है।

बोस्टन की एक संघीय अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव से जुड़े पहले कार्यकारी आदेश के बड़े हिस्से पर हमेशा के लिए रोक लगा दी है। इस आदेश की सबसे अहम शर्त यह थी कि मतदाता को रजिस्ट्रेशन के समय अपनी नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज दिखाने होंगे, जिसे अदालत ने रद्द कर दिया। फैसले में आदेश के तहत लाए जा रहे कई दूसरे चुनावी बदलावों पर भी रोक लगाई गई है।

जिला अदालत की जज डेनिस कैस्पर ने अपने फैसले का आधार एक साफ संवैधानिक बात को बनाया कि चुनाव कराने का अधिकार राज्यों और कांग्रेस के पास है, व्हाइट हाउस के पास नहीं। उन्होंने कहा कि यह आदेश शक्तियों के बंटवारे की सीमा को लांघता है। राष्ट्रपति के अधिकारों की हद समझाते हुए कैस्पर ने लिखा, "संविधान राष्ट्रपति को चुनावों पर कोई खास अधिकार नहीं देता।"

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अस्थायी रोक से स्थायी प्रतिबंध तक

ताजा फैसले ने पहले की अस्थायी व्यवस्था को स्थायी प्रतिबंध में बदल दिया है। एक साल पहले कैस्पर ने एक शुरुआती निषेधाज्ञा जारी की थी, जिसने मुकदमा चलने के दौरान इस चुनावी फेरबदल के बड़े हिस्सों को रोक दिया था। नए आदेश ने उस रोक को पक्का कर दिया है, यानी प्रशासन आदेश की ज्यादातर बातों को लागू नहीं कर सकता।

रिपब्लिकन प्रशासन ने इस मुकदमे को समय से पहले बताते हुए खारिज करवाने की कोशिश की थी। उसकी दलील थी कि अदालत को इंतजार करना चाहिए, क्योंकि विवादित नियम अभी लागू ही नहीं हुए हैं। कैस्पर ने यह दलील नहीं मानी। संवैधानिक सवालों को देखते हुए उन्होंने माना कि डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल आदेश को अभी चुनौती दे सकते हैं।

आदेश से क्या-क्या बदलता

ट्रंप के आदेश में मतदान और वोटों की गिनती को लेकर कई नई शर्तें एक साथ जोड़ी गई थीं। इसमें वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का दस्तावेजी सबूत जरूरी किया गया था। साथ ही, चुनाव के दिन के बाद पहुंचने वाले डाक मतपत्रों की गिनती रोकने की बात थी, भले ही उन मतपत्रों पर चुनाव के दिन या उससे पहले की मुहर लगी हो।

आदेश में एक धमकी भी थी। जो राज्य इन नियमों को नहीं मानते, उनकी कुछ संघीय धनराशि रोकी जा सकती थी, ताकि उन्हें नियम मानने पर मजबूर किया जा सके। इस पूरे आदेश को डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने चुनौती दी थी, जिसमें कैलिफोर्निया मुख्य याचिकाकर्ता था।

नेताओं की प्रतिक्रिया

न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वह आभारी हैं कि अदालत ने चुनावों पर कब्जा करने की ट्रंप की असंवैधानिक कोशिश को रोका, और भरोसा दिलाया कि राज्य मतदान के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा, इस साल होने वाले मध्यावधि चुनावों के दौरान भी।

जेम्स ने इस मामले को मतदान के अधिकार की लंबी लड़ाई से जोड़ा। उन्होंने कहा, "अमेरिकियों की कई पीढ़ियों ने वोट देने के अधिकार के लिए अथक संघर्ष किया, और जो कोई इस अधिकार को कमजोर करने की कोशिश करता है, उसके खिलाफ इसकी रक्षा करके हम उनकी विरासत का सम्मान करते हैं।"

कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि इस फैसले ने इस संवैधानिक सिद्धांत को फिर से पुख्ता किया है कि चुनावों का अधिकार राज्यों और कांग्रेस के पास है। उन्होंने आगाह किया कि कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। बोंटा ने कहा, "हमें इस नतीजे पर गर्व है, लेकिन हम साफ देख रहे हैं कि मतदान के अधिकारों और हमारे चुनावों पर राष्ट्रपति ट्रंप के हमले थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।" उन्होंने जोड़ा, "तो मैं साफ कर दूं, हम हर कदम पर पलटकर लड़ते रहेंगे।"

इस फैसले के बाद पहले लगी रोक बरकरार है और कार्यकारी आदेश का ज्यादातर हिस्सा लागू नहीं किया जा सकेगा। यह अदालत के इस नतीजे को और मजबूत करता है कि चुनावों पर नियंत्रण राष्ट्रपति पद की पहुंच से बाहर है।

सवाल-जवाब

किस अदालत ने ट्रंप के चुनाव आदेश पर रोक लगाई?
बोस्टन की एक संघीय जिला अदालत ने यह रोक लगाई, जिसका फैसला जज डेनिस कैस्पर ने सुनाया।
आदेश की कौन सी मुख्य शर्त रद्द की गई?
वह शर्त रद्द की गई जिसके तहत मतदाता को रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज दिखाने होते।
जज ने आदेश को असंवैधानिक क्यों माना?
कैस्पर ने कहा कि संविधान चुनाव कराने का अधिकार राज्यों और कांग्रेस को देता है, राष्ट्रपति को नहीं, और यह आदेश शक्तियों के बंटवारे को तोड़ता है।
यह रोक अस्थायी थी या स्थायी?
यह स्थायी रोक है। एक साल पहले लगी अस्थायी निषेधाज्ञा को इस फैसले ने स्थायी प्रतिबंध में बदल दिया।
मुकदमा किसने दायर किया था?
डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने मुकदमा दायर किया था, जिसमें कैलिफोर्निया मुख्य याचिकाकर्ता था।
आदेश ने राज्यों पर क्या धमकी डाली थी?
जो राज्य नए नियम नहीं मानते, उनकी कुछ संघीय धनराशि रोकी जा सकती थी।
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