अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट के चुनावी दंगल में एक अभूतपूर्व राजनीतिक मोड़ सामने आया है। मिशिगन राज्य में हुए कड़े मुकाबले में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद ने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स को शिकस्त देकर नया इतिहास रच दिया है। इस निर्णायक जीत के साथ ही अब्दुल अल-सईद अमेरिकी इतिहास के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान चले तीखे हमलों के बाद आए इन नतीजों ने देश के सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
चुनावी घमासान और तीखी बयानबाजी
इस चुनाव के दौरान जमकर जुबानी तीर चले थे। चुनाव अभियान के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल-सईद को निशाना बनाते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। प्रचार रैलियों में ट्रंप ने उन्हें 'जिहादी' करार दिया था, मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बताया था और उनके चुने जाने को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक चुनौती के रूप में पेश किया था। इसके साथ ही ट्रंप ने अमेरिकी संसद में उनकी मौजूदगी को लेकर भी तीखे सवाल खड़े किए थे।
मतदाताओं के फैसले ने बदला चुनावी समीकरण
तमाम हमलों और कड़े विरोध के बावजूद मिशिगन के मतदाताओं ने अब्दुल अल-सईद के पक्ष में खुलकर जनादेश दिया। इससे पहले अगस्त 2026 में उन्होंने पार्टी प्राइमरी जीतकर मजबूत शुरुआत की थी, और अब आम चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को मात देकर अपनी राह तय कर ली। जिस नेता की उम्मीदवारी पर विरोधी खेमे ने कड़े सवाल उठाए थे, मतदाताओं के इसी भरोसे के दम पर वह अब सीधे अमेरिकी सीनेट में कदम रखने जा रहे हैं।



















