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दिवाली पूजा से पहले पीतल, तांबे और चांदी की मूर्तियों को नई जैसी चमक देने के आसान घरेलू उपायजीवनशैली
4 नव॰ 2026, 12:34 pm (5 मिनट पहले)· 0

दिवाली पूजा से पहले पीतल, तांबे और चांदी की मूर्तियों को नई जैसी चमक देने के आसान घरेलू उपाय

दिवाली पूजन से पूर्व घर में रखी धातु की पुरानी लक्ष्मी-गणेश मूर्तियों पर जमी मैल और कालापन हटाने के लिए रसोई में मौजूद प्राकृतिक चीजें बेहद असरदार साबित होती हैं।

दीपावली की आहट के साथ ही घरों में साफ-सफाई और रंग-रोगन की तैयारियां जोरों पर शुरू हो जाती हैं। हिंदू धर्म में इस महापर्व की तैयारियां करीब महीने भर पहले से ही की जाने लगती हैं। दिवाली की रात धन की देवी मां लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश के पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस पावन अवसर पर कई श्रद्धालु बाजार से नई प्रतिमाएं लाते हैं, जबकि अधिकांश घरों में पहले से मौजूद पीतल, तांबा अथवा चांदी की मूर्तियों की ही विधि-विधान से पूजा की जाती है। समय बीतने के साथ हवा और नमी के संपर्क में आकर धातु की ये पवित्र प्रतिमाएं अपनी मूल चमक खो देती हैं और उन पर कालापन या जिद्दी मैल जम जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजन में फीकी या मैली मूर्तियों का प्रयोग शुभ नहीं माना जाता। अक्सर लोग महंगी पॉलिश या बाजार के केमिकल युक्त क्लीनर का रुख करते हैं, मगर फिर भी मनचाही चमक हासिल नहीं हो पाती। ऐसे में आपकी रसोई में उपलब्ध कुछ बेहद आसान और सुरक्षित घरेलू नुस्खे मूर्तियों को बिना नुकसान पहुंचाए बिल्कुल नया रूप दे सकते हैं।

नींबू और नमक के मिश्रण से तांबे-पीतल पर लाएं सुनहरा निखार

पीतल और तांबे से बनी मूर्तियों की खोई हुई रंगत वापस लाने के लिए नींबू और नमक का मिश्रण एक शक्तिशाली प्राकृतिक क्लीनर की तरह कार्य करता है। इस उपाय को आजमाने के लिए सबसे पहले एक साफ कटोरी में दो चम्मच सादा नमक निकालें और उसमें एक पूरे नींबू का ताजा रस निचोड़कर मिला लें। दोनों सामग्रियों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। अब किसी मुलायम स्पंज अथवा कोमल सूती कपड़े की सहायता से इस पेस्ट को मूर्ति की पूरी सतह पर एकसमान रूप से लगाएं। पेस्ट को धातु पर करीब 5 से 10 मिनट तक लगा रहने दें ताकि नींबू का सिट्रिक एसिड धातु की ऊपरी मैल और ऑक्सीडेशन को ढीला कर सके। तय समय के बाद मूर्ति को हल्के गुनगुने पानी की धार के नीचे धो लें और अंत में एक सूखे, साफ सूती कपड़े से थपथपाकर पोंछ लें। ऐसा करते ही पीतल और तांबे की सतह एकदम चमक उठेगी।

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इमली के गूदे से मिटाएं सालों पुरानी कालिख और गहरे धब्बे

यदि तांबे और पीतल की मूर्तियों पर बहुत पुरानी कालिख, तेल-धूप के निशान या जिद्दी दाग जम चुके हैं, तो इमली का घरेलू उपाय बेहद कारगर साबित होता है। इसके इस्तेमाल के लिए थोड़ी सी इमली को एक कटोरी पानी में कुछ देर के लिए भिगोकर रख दें, जिससे वह पूरी तरह नरम हो जाए। इसके बाद हाथों से मसलकर उसका गाढ़ा गूदा तैयार कर लें। इस तैयार गूदे को मूर्ति के हर हिस्से पर अच्छी तरह लेप की तरह लगाएं और कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। इमली में मौजूद कुदरती एसिड धातु पर जमी सख्त मैल और कालेपन को बेहद सरलता से काट देता है। इसके बाद हल्के हाथों से पोंछते हुए मूर्ति को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और पूरी तरह सुखा लें, जिससे मूर्ति का प्राचीन रूप खिल उठेगा।

सफेद सिरके और बेकिंग सोडा का झागदार घोल जिद्दी गंदगी पर असरदार

अत्यधिक गंदी हो चुकी धातु की मूर्तियों की गहरी सफाई के लिए सफेद सिरके और बेकिंग सोडा का संयोजन सबसे असरदार माना जाता है। इस नुस्खे को तैयार करने के लिए एक चम्मच बेकिंग सोडा में आवश्यकतानुसार थोड़ा सा सफेद सिरका मिलाएं। सिरका मिलते ही रासायनिक क्रिया से एक हल्का झागदार घोल तैयार हो जाएगा। तुरंत एक बेहद कोमल ब्रिसल वाले ब्रश की मदद से इस झागदार मिश्रण को मूर्ति की बारीक नक्काशी, कोनों और दरारों तक पहुंचाएं। बिल्कुल हल्के हाथों से रगड़कर जिद्दी जमी हुई गंदगी को साफ करें और फिर तुरंत सामान्य स्वच्छ पानी से धो लें। ध्यान रहे कि चांदी की मूर्तियों पर इस विधि का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए ताकि सतह पर किसी प्रकार की खरोंच न आए।

सवाल-जवाब

पीतल और तांबे की मूर्तियों को साफ करने के लिए नींबू-नमक का पेस्ट कितनी देर लगाना चाहिए?
इस पेस्ट को मूर्ति पर अच्छी तरह लगाने के बाद 5 से 10 मिनट के लिए लगा रहने दें और फिर गुनगुने पानी से धो लें।
क्या इमली से पुरानी कालिख और जिद्दी दाग हट जाते हैं?
हां, पानी में भीगी हुई इमली के गूदे में मौजूद नेचुरल एसिड तांबे और पीतल पर जमी पुरानी कालिख को आसानी से काट देता है।
सिरका और बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
इस घोल को मुलायम ब्रश से लगाएं और चांदी की मूर्तियों पर इसका प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतें ताकि खरोंच न लगे।
दिवाली पर फीकी या गंदी मूर्तियों की पूजा करना क्यों अनुचित माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजन में गंदी या फीकी पड़ी मूर्तियों की पूजा करना शुभ नहीं माना जाता है।
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