बुंदेलखंड अंचल के प्रमुख चिकित्सा केंद्र महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज में उपचार व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। परिसर में नवनिर्मित 500 बिस्तरों के दूसरे अस्पताल में बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। इस अतिरिक्त स्वास्थ्य व्यवस्था के क्रियाशील होने के बाद परामर्श के लिए आने वाले लोगों को एक अलग और सुव्यवस्थित केंद्र मिल सकेगा, जिससे दैनिक स्तर पर होने वाली भारी मारामारी में कमी आएगी।
दो राज्यों के मरीजों का प्रमुख केंद्र
इस संस्थान की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि यहां केवल झांसी नगर के ही नहीं, बल्कि समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र के दूरदराज इलाकों से गंभीर रूप से बीमार लोग पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश के कई जनपदों के अलावा मध्य प्रदेश की सीमा में आने वाले बुंदेलखंड के जिलों से भी प्रतिदिन बड़ी तादाद में लोग चिकित्सा परामर्श के लिए यहां आते हैं। दोनों राज्यों के मरीजों की पहली पसंद होने की वजह से चिकित्सालय के संसाधनों पर लगातार दबाव बना रहता है।
वर्तमान ओपीडी पर अत्यधिक दबाव और लंबी कतारें
अत्यधिक संख्या में बीमार लोगों के पहुंचने के चलते संस्थान की मौजूदा ओपीडी में सुबह से ही भारी भीड़ लग जाती है। दूरदराज से आने वाले लोगों को पंजीयन कराने और चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त करने के लिए घंटों कतारों में खड़े रहकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कई बार भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि सामान्य जांच और परामर्श में भी लंबा समय लग जाता है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है।
मरीजों के विभाजन से डॉक्टरों को भी सहूलियत
500 बेड वाले नए चिकित्सा भवन में ओपीडी सेवाएं आरंभ होते ही मरीजों का आवागमन दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो जाएगा। इससे पुराने भवन की ओपीडी पर भार सीधे तौर पर घटेगा और कतारें काफी छोटी हो जाएंगी। जब दोनों परिसरों में परामर्श की सुविधा उपलब्ध होगी, तो चिकित्सकों के लिए भी स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श प्रबंधन को संभालना अधिक सहज हो जाएगा। काम का यह उचित बंटवारा समूची नैदानिक प्रक्रिया को कहीं अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाएगा।
संस्थान प्रशासन का दृष्टिकोण
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार ने इस नई व्यवस्था की महत्ता स्पष्ट करते हुए बताया कि नए अस्पताल में ओपीडी प्रारंभ होने से मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में पर्याप्त मदद मिलेगी। उनका मानना है कि इस व्यवस्था के प्रभाव में आने के बाद पूरे अस्पताल में मरीजों को सुनियोजित और व्यवस्थित ढंग से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में आसानी होगी।


















