क्रिप्टो बाजार में लौटी रौनक के बीच पाई नेटवर्क में सुधार, लेकिन अहम स्तरों पर फंसा टोकनबैंक ऑफ जापान के रेट चेक से संभला येन, मुद्रा हस्तक्षेप की आशंकाओं के बीच डॉलर 157 के नीचे फिसलाबिजली बिल घटाने वाले 1200mm सीलिंग पंखों पर 60% तक की छूट, ₹3,000 से कम में मिल रहे टॉप मॉडलबाम्बू लैब P2S कॉम्बो 3D प्रिंटर से घर पर प्लास्टिक के सामान बनाना हुआ आसान, जानिए फीचर्स और परफॉर्मेंसकर्नाटक विधानमंडल में वंदे मातरम् के दो अंतरों पर बवाल, भाजपा सदस्यों ने पूरा राष्ट्रगीत गाकर जताया विरोधत्योहारी सीजन में तमन्ना भाटिया के पीले तोरानी साड़ी लुक ने दिया मॉडर्न देसी फैशन का नया सबकओपनएआई ने लीगल रिसर्च के लिए पेश किया एस्ट्रा फॉर लॉ, अदालती रिकॉर्ड खंगालना हुआ आसानआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों पर अमेरिका और चीन के बीच चेतावनी तंत्र बनाने पर मंथनदस हजार रुपये से कम में छात्रों और मनोरंजन के लिए पांच किफायती टैबलेटटेक इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर बड़ा खुलासा, 634 महिला कर्मचारियों ने बयां किया कॉर्पोरेट दफ्तरों का कड़वा सच
अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में खुरपका-मुंहपका रोग का तांडव, 267 मिथुन की जान गईअरुणाचल प्रदेश
21 सित॰ 2026, 4:54 pm (1 मिनट पहले)· 0

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में खुरपका-मुंहपका रोग का तांडव, 267 मिथुन की जान गई

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में खुरपका-मुंहपका बीमारी की चपेट में आकर 267 मिथुन की मौत हो चुकी है, जबकि 21 गांवों में 1402 मवेशी संक्रमित पाए गए हैं।

पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में मवेशियों के बीच फैली एक गंभीर संक्रामक बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो महीनों के भीतर यहां खुरपका और मुंहपका रोग की चपेट में आने से कुल 267 मिथुन अपनी जान गंवा चुके हैं। इस घातक संक्रमण का असर इलाके के 21 गांवों तक फैल चुका है, जहां अब तक 1402 पशु इस वायरस से ग्रस्त पाए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पशुपालन और पशु चिकित्सा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

जुलाई के आखिरी हफ्ते में सामने आए थे शुरुआती लक्षण

जिला पशुपालन एवं पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दम्मो रिबा के अनुसार, क्षेत्र में इस बीमारी के शुरुआती मामले जुलाई के अंतिम सप्ताह में दर्ज किए गए थे। जैसे ही स्थानीय स्तर पर मिथुन की असामान्य मौतों की सूचना मिली, विभाग ने तुरंत राहत दल तैनात किए। दवाओं और आवश्यक सैंपल कलेक्शन किट से लैस चिकित्सा कर्मियों को सीधे प्रभावित बस्तियों में भेजा गया, ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले बीमार पशुओं का इलाज शुरू किया जा सके। इसके साथ ही जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए केंद्र सरकार की ओर से विषय विशेषज्ञों का एक विशेष दल भी प्रभावित गांवों में पहुंचा।

ये भी पढ़ें

प्रयोगशाला जांच में सीरोटाइप ओ स्ट्रेन की पुष्टि

संक्रमण के सटीक कारण की पहचान के लिए एकत्र किए गए नमूनों को परीक्षण हेतु भेजा गया था। ओडिशा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फुट एंड माउथ डिजीज द्वारा की गई विस्तृत लैब जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इस पूरे प्रकोप के पीछे एफएमडी का सीरोटाइप 'ओ' जिम्मेदार है। विभाग की ओर से 20 सितंबर को जारी ताजा स्थिति रिपोर्ट बताती है कि चिन्हित किए गए 1402 पीड़ित पशुओं में से 1225 को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है, जबकि 267 पशुओं को नहीं बचाया जा सका।

त्वरित प्रतिक्रिया दल और जमीनी स्तर पर निगरानी

वर्तमान में चार सदस्यों वाली एक क्विक रिस्पॉन्स टीम स्थानीय पशु चिकित्सा कर्मियों के साथ मिलकर जमीनी मोर्चा संभाले हुए है। यह संयुक्त दल प्रभावित बस्तियों में लगातार निगरानी रखने, संक्रमित पशुओं को दवाएं देने और स्थानीय पशुपालकों को जागरूक करने का कार्य कर रहा है। राज्य सरकार और पशुपालन, पशु चिकित्सा एवं डेयरी विकास निदेशालय ने संकट से निपटने के लिए जिले को पर्याप्त मात्रा में दवाइयां और अतिरिक्त कार्यबल मुहैया कराया है। विभाग के पास मिथुन और अन्य मवेशियों का घर-घर, व्यक्ति-वार और गांव-वार विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है। भ्रामक दावों से बचने के लिए अधिकारियों ने सभी से अपील की है कि वे पशुओं की संख्या और मृत्यु के आंकड़ों का मिलान केवल आधिकारिक आंकड़ों से ही करें।

नियमित टीकाकरण और रोकथाम के उपाय

खुरपका-मुंहपका एक बेहद संक्रामक विषाणु जनित रोग है, जो मुख्य रूप से दोहरे खुर वाले पशुओं जैसे मिथुन और गाय-बैलों को तेजी से अपना शिकार बनाता है। बचाव के लिए विभाग साल में दो बार किसानों के घर-द्वार पर जाकर पूरी तरह मुफ्त नियमित टीकाकरण अभियान चलाता है। पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों से आह्वान किया है कि वे मवेशियों की सुरक्षा के लिए इन टीकाकरण अभियानों में पूरा सहयोग दें, ताकि जिले के पशुधन को सुरक्षित रखा जा सके।

सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश के किस जिले में मिथुन की मौत के मामले सामने आए हैं?
यह बीमारी अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले के 21 गांवों में फैली है।
इस प्रकोप में अब तक कितने मिथुन की जान गई है और कितने संक्रमित हुए हैं?
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 267 मिथुन की मौत हो चुकी है, जबकि कुल 1402 जानवर इस रोग से प्रभावित हुए हैं।
प्रयोगशाला जांच में किस वायरस स्ट्रेन की पुष्टि हुई है?
ओडिशा स्थित राष्ट्रीय संस्थान की जांच में इस प्रकोप के लिए एफएमडी सीरोटाइप 'ओ' स्ट्रेन जिम्मेदार पाया गया है।
पशुपालन विभाग बीमारी से बचाव के लिए क्या कदम उठा रहा है?
विभाग चार सदस्यीय त्वरित प्रतिक्रिया दल के जरिए इलाज मुहैया करा रहा है और साल में दो बार किसानों को मुफ्त टीकाकरण देता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp