देश में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के बीच पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित 'फाइनेंसिंग इंडियाज जर्नी टुवर्ड्स अ विकसित भारत' सम्मेलन के दूसरे दिन ऊर्जा क्षेत्र पर विस्तृत चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के 'फाइनेंसिंग एनर्जी ट्रांजिशन' सत्र को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चाउना मेन ने स्पष्ट किया कि राज्य के विशाल जलविद्युत संसाधन देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में आधारशिला साबित होंगे। उन्होंने इसे केवल राज्य का विषय न मानकर एक राष्ट्रीय रणनीतिक अवसर करार दिया, जो ग्रिड को चौबीसों घंटे स्थिर और भरोसेमंद बिजली देने में सक्षम है।
राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों में अरुणाचल प्रदेश की हिस्सेदारी
अरुणाचल प्रदेश में लगभग 58,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की आकलित क्षमता मौजूद है, जो समूचे भारत की कुल क्षमता का करीब 40 प्रतिशत बैठती है। राज्य सरकार ने स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक 40 गीगावाट जलविद्युत क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में आने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए जलविद्युत की निरंतर उपलब्धता ग्रिड स्थिरता बनाए रखने में सबसे भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है।
क्षमता विस्तार और सुबनसिरी लोअर परियोजना का योगदान
राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बिजली उत्पादन के बुनियादी ढांचे में तेजी से प्रगति दर्ज की गई है। साल 2016 में अरुणाचल प्रदेश की स्थापित जलविद्युत क्षमता मात्र 405 मेगावाट थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 1,200 मेगावाट तक पहुंची। इसके बाद सुबनसिरी लोअर परियोजना के चालू होने से यह आंकड़ा छलांग लगाकर 2,270 मेगावाट के स्तर पर पहुंच चुका है। बिजली उत्पादन की इस गति को बनाए रखने के लिए सरकार दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रही है।
1.9 लाख करोड़ रुपये का निवेश और रोजगार के नए अवसर
राज्य ने 'डिकेड ऑफ हाइड्रोपावर 2025–35' की कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अगले एक दशक में 19 गीगावाट नई जलविद्युत क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की निवेश पाइपलाइन तैयार की गई है। वर्तमान में लगभग 19,000 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाएं विकास के अलग-अलग चरणों में हैं, जिनमें से 4,880 मेगावाट पर निर्माण कार्य सीधे तौर पर चल रहा है। इस विशाल औद्योगिक विस्तार से युवाओं के लिए 30,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 16,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान लगाया गया है।
“लगभग 58,000 मेगावाट की आकलित क्षमता और 2047 तक 40 गीगावाट दोहन के विजन के साथ अरुणाचल प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”
पारेषण ढांचे और दूरदराज के इलाकों की चुनौतियां
बिजली उत्पादन संयंत्रों के साथ-साथ मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क खड़ा करना भी एक बड़ी प्राथमिकता है। अरुणाचल प्रदेश का भौगोलिक भूभाग काफी दुर्गम और दूरदराज का है, जिससे उत्पादित बिजली को राज्य के ग्रिड और अंतरराज्यीय नेटवर्क तक सुचारू रूप से पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहता है। इसके लिए बिजली निकासी व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से पूरा करना अनिवार्य है। जिम्मेदार विकास, मजबूत ग्रिड नेटवर्क और वित्तीय भागीदारी से न केवल राज्य में उद्यमशीलता बढ़ेगी, बल्कि पूरे देश को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।



















