दस हजार रुपये से कम में छात्रों और मनोरंजन के लिए पांच किफायती टैबलेटटेक इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर बड़ा खुलासा, 634 महिला कर्मचारियों ने बयां किया कॉर्पोरेट दफ्तरों का कड़वा सचपेंशनभोगियों के बकाए पर बड़ा फैसला, अक्टूबर में मिलेगा एरियर और मेडिकल बिल भी होंगे मंजूरउत्तरी अरब सागर में जहाजों की भिड़ंत के तुरंत बाद पाकिस्तानी नौसेना ने शुरू किया मिसाइल व तोप अभ्यासघर पर सर्दियों भर मिलेंगी ताजी सब्जियां, सितंबर के महीने में ऐसे शुरू करें किचन गार्डनिंगडायनासोरों के महाविनाश का नया सुराग, 6.6 करोड़ साल पुराने दुर्लभ उल्कापिंड के रहस्य से उठा पर्दात्योहारी सीजन में तमन्ना भाटिया के पीले तोरानी साड़ी लुक ने दिया मॉडर्न देसी फैशन का नया सबकहड्डियों और जोड़ों के पुराने दर्द में संजीवनी साबित हो रहा लोबान, सूजन से लड़ने में मिला वैज्ञानिक आधारओपनएआई ने लीगल रिसर्च के लिए पेश किया एस्ट्रा फॉर लॉ, अदालती रिकॉर्ड खंगालना हुआ आसानमेघालय के वेस्ट गारो हिल्स में यात्री बसों पर पथराव, शीशे टूटे और कई चालक घायल
टेक इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर बड़ा खुलासा, 634 महिला कर्मचारियों ने बयां किया कॉर्पोरेट दफ्तरों का कड़वा सचव्यापार
21 सित॰ 2026, 4:16 pm (23 मिनट पहले)· 1

टेक इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर बड़ा खुलासा, 634 महिला कर्मचारियों ने बयां किया कॉर्पोरेट दफ्तरों का कड़वा सच

टेक जगत में काम करने वाली 634 महिलाओं के बीच हुए एक व्यापक अध्ययन में कार्यस्थल पर भेदभाव, अनुचित व्यवहार और नई तकनीक के दौर में बढ़ते दबाव की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र के भीतर कार्यस्थलों की कार्यसंस्कृति को लेकर लंबे समय से कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं का अनुभव कुछ और ही सच्चाई बयां करता है। एक विस्तृत सर्वेक्षण में तकनीकी कंपनियों में काम करने वाली 634 महिलाओं ने अपने करियर, रोज़मर्रा के दफ़्तरी माहौल और उद्योग की मौजूदा स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी है। इन महिला कर्मचारियों के अनुभवों से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी उद्योग के बड़े कॉर्पोरेट दफ़्तरों में आक्रामकता और पुरुष प्रधान सोच अब भी बेहद गहरे स्तर पर मौजूद है। कंपनियों में विविधता और समावेशिता से जुड़े प्रयासों के पीछे हटने के बीच यह अध्ययन उद्योग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस अध्ययन में विभिन्न पदों, कई तरह के अनुभवों और छोटी-बड़ी कंपनियों से जुड़ी महिला पेशेवरों ने अपनी राय साझा की। क्षेत्र में तीन दशकों का लंबा अनुभव रखने वाली एक वरिष्ठ महिला पेशेवर ने साझा किया कि दफ़्तर में सहयोगी अक्सर उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे उन्हें काम की बुनियादी समझ भी न हो। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुरुष ग्राहक अक्सर उन्हें मुख्य कार्यकारी अधिकारी मानने के बजाय केवल सचिव या संदेशवाहक समझ लेते हैं और जब उन्हें असल पद की जानकारी मिलती है तो वे उपेक्षा भरा रवैया अपनाते हैं। कई अन्य कर्मचारियों ने यह भी बताया कि महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ पाने के लिए उन पर अनुचित आरोप लगाए गए, जबकि कुछ का कहना था कि पुरुष सहकर्मियों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी क्षमताओं पर बेवजह संदेह किया जाता रहा।

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कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार और सीमाओं के उल्लंघन के मामले

सर्वेक्षण में शामिल 634 महिलाओं ने दफ़्तरों में होने वाले अशोभनीय व्यवहार के ऐसे कई मामले साझा किए जो नेतृत्व की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठाते हैं। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि उनके संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी छुट्टियों के सालाना जश्न के दौरान सांता क्लॉज़ की पोशाक पहनकर आते थे और युवा महिला कर्मचारियों को अपनी गोद में बैठने के लिए विवश करते थे। एक अन्य कर्मचारी ने खुलासा किया कि उनके पूर्व प्रबंधक जानबूझकर उन्हें अपने आगे चलने को कहते थे ताकि वे अनुचित नज़र रख सकें। इसके अलावा आंतरिक संचार माध्यम स्लैक पर पुरुष कर्मचारियों द्वारा महिला सहकर्मियों के शरीर के अंगों को क्रमबद्ध करने और रेटिंग देने जैसी अशोभनीय गतिविधियों की जानकारी भी सामने आई।

ये सभी वास्तविक अनुभव उस औपचारिक छवि से पूरी तरह उलट हैं जो बड़े सम्मेलनों, बैठकों और मंचों पर पेश की जाती है। उद्योग से जुड़े कई मंच अक्सर महिलाओं को सशक्त बनाने और प्रेरित करने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, जबकि कई शीर्ष अधिकारी यह मानकर बैठ जाते हैं कि लैंगिक असमानता की समस्या अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। दशकों से किए गए शोधों में महिला पेशेवरों के सामने आने वाली बाधाओं को गिनाया गया और उन्हें मेंटर खोजने, अपने काम की प्रशंसा खुद करने या वेतन वृद्धि से पहले बात करने का अभ्यास करने जैसे व्यक्तिगत सुझाव दिए गए। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि वर्ष 2020 के दौर में कार्यस्थल पर व्यवस्थागत सुधार की जो बातें होती थीं, वे वर्ष 2026 तक आते-आते चुपचाप काम करने और वेतन लेकर शांत रहने की मजबूरी में बदलती दिख रही हैं।

भेदभाव, पदोन्नति में रुकावट और कम वेतन का सामना

अध्ययन में शामिल एक तिहाई से अधिक महिलाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अपने काम के दौरान लैंगिक आधार पर उत्पीड़न या पक्षपात का प्रत्यक्ष सामना किया है। हालांकि कई महिलाओं ने अपने करियर को लेकर संतोष भी ज़ाहिर किया, लेकिन बड़ी संख्या में पेशेवरों ने अपनी आपबीती साझा की। इनमें वरिष्ठ पुरुष अधिकारियों द्वारा अशोभनीय आचरण, समान भूमिका के लिए पुरुष सहकर्मियों की तुलना में कम वेतन मिलना, पदोन्नति से वंचित रखा जाना और महत्वपूर्ण बैठकों में उनकी बात को बीच में ही काट दिया जाना शामिल है।

कई महिला कर्मियों को यह कहकर बड़े अवसरों से दूर रखा गया कि पुरुष दबाव को बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं। बैठकों में यह रवैया भी आम देखा गया जहां किसी महिला द्वारा दिए गए विचार को तब तक अनदेखा किया गया जब तक कि उसी बात को किसी पुरुष सहकर्मी ने दोबारा नहीं दोहराया। एक प्रतिभागी ने दर्ज किया कि उनके पसंदीदा सहकर्मी पुरुष हैं, लेकिन उनमें से कई हमेशा यह मान लेते हैं कि किसी महिला की राय स्वतः ही कम मूल्यवान है, और यह मानसिकता पिछले 10 से 15 वर्षों में बिल्कुल नहीं सुधरी है।

विविधता के आंकड़ों का इतिहास और मौजूदा गिरावट

उद्योग में विविधता को लेकर एक दशक पहले एक सकारात्मक आंदोलन की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2013 में पिनट्रेस्ट की एक इंजीनियर ट्रेसी चाउ ने तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं के आंकड़ों की कमी पर एक लेख लिखा था। उन्होंने गिटहब पर एक सार्वजनिक स्प्रेडशीट बनाई जिसमें विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों ने अपने संस्थानों के वास्तविक आंकड़े दर्ज करने शुरू किए। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता जेसी जैक्सन ने इस मुद्दे को शेयरधारकों की वार्षिक बैठकों में उठाया और कंपनियों पर अपने कर्मचारियों की जनसांख्यिकी सार्वजनिक करने का दबाव बनाया।

इस दबाव का असर दिखा और वर्ष 2014 में गूगल ने अपनी पहली आधिकारिक विविधता रिपोर्ट जारी की। इसके तुरंत बाद फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी तकनीकी दिग्गज कंपनियों ने भी अपनी रिपोर्टें साझा करनी शुरू कीं, जिससे धीरे-धीरे इन आंकड़ों में कुछ मामूली सुधार देखा गया था। लेकिन हाल के वर्षों में यह रुझान पूरी तरह उलट गया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा विविधता, समानता और समावेशन नीतियों के खिलाफ उठाए गए कदमों के बाद कई बड़ी कंपनियों ने अपने विविधता के आंकड़े सार्वजनिक करना बंद कर दिया। प्रशासन ने कार्यस्थल पर पक्षपात की जांच करने वाली संघीय एजेंसी के कर्मचारियों की संख्या को 480 से घटाकर मात्र 75 कर दिया।

इस बीच कुछ गिनी-चुनी कंपनियां अब भी अपने कार्यबल का विवरण जारी कर रही हैं। एनवीडिया ने जून 2026 में अपने आंकड़े सार्वजनिक किए, जिनके अनुसार कंपनी की तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 17.4 प्रतिशत है। प्रबंधकीय और नेतृत्व स्तर पर भी महिलाओं की संख्या इसी सीमित दायरे में बनी हुई है, हालांकि कंपनी के पांच शीर्ष अधिकारियों में से दो महिलाएं हैं। सिलिकॉन वैली के नेतृत्व को लेकर कर्मचारियों में मोहभंग बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने ऑल्टमैन, मस्क और बेजोस जैसे शीर्ष नामों का हवाला देते हुए कहा कि जो लोग कभी मानवता की समस्याओं को हल करने वाली तकनीक बनाने का सपना लेकर आए थे, वे अब अपने नेतृत्व की दिशा से निराश हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की होड़ और कार्यस्थल पर नया तनाव

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI तकनीक के विस्तार ने तकनीकी कर्मियों के लिए दबाव और अलगाव को और गहरा कर दिया है। कोड लिखने और डिजाइन तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ऑटोमेटेड टूल्स की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाली महिलाओं को अक्सर किनारे कर दिया जाता है। एक प्रतिभागी ने साझा किया कि कम गुणवत्ता वाले डिजाइनों की कमियों को उजागर करने के बावजूद उन पर लगातार ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग करने का भारी दबाव बनाया जाता है, जिसके चलते उनका बहुत सारा समय एआई जनित गड़बड़ियों को ठीक करने में ही बीत जाता है।

अध्ययन में यह बात भी रेखांकित की गई कि नई तकनीक ने कार्यस्थल पर मौजूदा पूर्वाग्रहों को और तीखा कर दिया है। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि जब कोई पुरुष सहकर्मी क्लॉड टूल की मदद से जल्दबाजी में अधूरा काम पेश करता है तो उसकी सराहना की जाती है, जबकि अगर टीम की कोई महिला ऐसा सतही काम पेश करे तो उसे नौकरी से निकाले जाने का जोखिम पैदा हो जाता है। इसके अलावा कई कर्मचारियों ने नई तकनीकों से जुड़े पर्यावरणीय नुकसान, नौकरियों में कटौती, बौद्धिक संपदा की चोरी और संपत्ति की बढ़ती असमानता को लेकर भी अपनी चिंताएं जताई हैं। नौकरी के कमजोर बाज़ार में लोग अपनी आवाज़ उठाने से डर रहे हैं, जिससे तकनीकी दफ्तरों में एक नए तरह का मानसिक तनाव और असहायता की स्थिति जन्म ले रही है।

सवाल-जवाब

इस सर्वेक्षण में कितनी महिलाओं ने भाग लिया?
इस सर्वेक्षण में विभिन्न तकनीकी कंपनियों और अनुभवों से जुड़ी कुल 634 महिला पेशेवरों ने भाग लिया।
कितनी महिलाओं ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न या पक्षपात का सामना करने की बात कही?
सर्वेक्षण में शामिल एक तिहाई से अधिक महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में लैंगिक आधार पर पक्षपात या अनुचित व्यवहार का सामना किया है।
एनवीडिया में तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी है?
जून 2026 में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एनवीडिया में तकनीकी पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व 17.4 प्रतिशत है।
तकनीकी कंपनियों में विविधता के आंकड़े सार्वजनिक करने की शुरुआत कैसे हुई थी?
वर्ष 2013 में पिनट्रेस्ट की इंजीनियर ट्रेसी चाउ और सामाजिक कार्यकर्ता जेसी जैक्सन की पहलों के बाद गूगल ने 2014 में अपनी पहली रिपोर्ट जारी की थी।
कार्यस्थल भेदभाव की जांच करने वाली एजेंसी पर क्या असर पड़ा?
प्रशासनिक कटौती के तहत इस एजेंसी के कर्मचारियों की संख्या 480 से घटाकर केवल 75 कर दी गई।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल्स के इस्तेमाल को लेकर महिला कर्मचारियों ने क्या चिंता जताई?
कर्मचारियों ने बताया कि खराब गुणवत्ता वाले ऑटोमेटेड कोड को ठीक करने में उनका समय बर्बाद होता है और पुरुषों द्वारा अधूरे काम पर भी प्रशंसा पाने का दोहरा रवैया दिखता है।
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