फिल्मकार ग्रेग अराकी ने एक दशक से अधिक समय के अंतराल के बाद वापसी की है और उनकी यह नई फिल्म की शुरुआत ही जबरदस्त उथल-पुथल से होती है। स्क्रीन पर एक तैराकी कुंड के पानी में अचेत पड़ी महिला का शव और गुलाबी रंग की लिंजरी पहने एक डरा हुआ सहमा युवक नजर आता है जिसके नाक से खून बह रहा है। निर्देशक के पुराने काम हमेशा से चौंकाने वाले और वर्जनाओं को तोड़ने वाले रहे हैं, जिनमें आत्महत्या और चरम उत्तेजना जैसे विषय आम रहे हैं। हालांकि आज के दौर की पीढ़ी यानी जनरेशन जेड के लोगों का शारीरिक सुख और आकर्षण के प्रति नजरिया काफी बदल चुका है। इसी बदलाव और उलझनों को गहराई से समझने के लिए निर्देशक ने सह-लेखिका कार्ले शियोर्टिनो के साथ मिलकर इस बीडीएसएम विषय पर आधारित कहानी को बुना है।
कहानी और किरदारों का ताना-बाना
कहानी में मुख्य भूमिका यानी डोमिनेंट का किरदार ओलिविया वाइल्ड द्वारा निभाई गई एरिका ट्रेसी निभाती हैं जो एक कलाकर हैं और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती हैं। वह अपने से चौदह साल छोटे और थोड़े भ्रमित युवक इलियट को अपना सहायक नियुक्त करती हैं, जिसे कूपर हॉफमैन ने पर्दे पर उतारा है। पूरी कहानी फ्लैशबैक यानी पीछे मुड़कर देखने के अंदाज में चलती है जहां इलियट पुलिस अधिकारियों जोला और ज़ेम के सामने पूछताछ में गवाही दे रहा है। मैगी चो और जॉनी नॉक्सविल इन जासूसों की भूमिका में नजर आते हैं। नौकरी शुरू होने के महज एक हफ्ते के भीतर ही एरिका उसे अपने साथ एक अंतरंग रिश्ते में आने का प्रस्ताव देती है।
युवाओं की उलझनें और आधुनिक जीवनशैली
यह सब कुछ कला के नाम पर और कभी-कभार सिर्फ मौज-मस्ती के लिए शुरू होता है जहां इलियट की आंखें हैरानी से खुली की खुली रह जाती हैं। इसके बाद स्क्रीन पर दृश्यों का एक ऐसा दौर शुरू होता है जो सनसनीखेज होने से ज्यादा अजीबोगरीब और दिलचस्प लगता है। इलियट एरिका के हर आदेश का पालन करते हुए फर्श पर रेंगता है और आंखों पर पट्टी बांधकर उसकी छुअन का बेसब्री से इंतजार करता है। उसके लिए यह गुप्त दुनिया एक शानदार नशा बन जाती है जो उसके साधारण और उबाऊ जीवन से बिल्कुल अलग है। उसकी उदासीन प्रेमिका मिनर्वा के साथ उसका रिश्ता पहले से ही ठंडा चल रहा है, जिसे चार्ली एक्ससीएक्स ने निभाया है।
अभिनय और निर्देशन के मायने
इलियाट देखने में एक आधुनिक और उदारवादी युवा लगता है जिसके लैपटॉप पर फेमिनिस्ट स्टिकर चिपका हुआ है और उसकी जीवनशैली थोड़ी अस्त-व्यस्त है। इसके बावजूद कूपर हॉफमैन अपने इस किरदार को बहुत ही सहज और खुले किताब की तरह पेश करते हैं जिससे कोई भी आसानी से जुड़ाव महसूस कर सके। एरिका के पास कोई बड़ा अतीत नहीं है लेकिन ओलिविया वाइल्ड जानती हैं कि दर्शकों के सामने कब राज खोलना है और कब रहस्य बनाए रखना है। इलियट उनकी तरफ से मिलने वाले हर छोटे इशारे को बड़ी उत्सुकता से स्वीकार करता है ताकि यह रिश्ता किसी मुकाम पर पहुंच सके।
निष्कर्ष और अनसुलझे सवाल
अपनी पॉडकास्ट बातचीत में इलियट महामारी के बाद उपजे अपनी पीढ़ी के उलझन भरे यौन अनुभवों का जिक्र करता है जहां सब कुछ भ्रमित करने वाला है। फिल्म के अंत तक आते-आते यह कहानी कुछ सवालों के साथ खत्म होती है और शुरुआत वाला रहस्य एक अनोखे मोड़ पर पहुंच जाता है। हालांकि इसका अंत थोड़ा सा अजीब जरूर लग सकता है लेकिन इससे पहले के दृश्यों में जो रोमांच और ऊर्जा देखने को मिलती है वह दर्शकों को बांधे रखती है। यह फिल्म आज के समय के युवाओं के मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व को बहुत ही बेबाकी से सामने लाती है।



















