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असम में बच्चों की सुरक्षा के लिए नई नीति लागू, कर्मचारियों की स्क्रीनिंग हुई अनिवार्यअसम
9 सित॰ 2026, 6:41 pm (2 घंटे पहले)· 3

असम में बच्चों की सुरक्षा के लिए नई नीति लागू, कर्मचारियों की स्क्रीनिंग हुई अनिवार्य

असम सरकार ने स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी और जुवेनाइल जस्टिस रूल्स 2026 अधिसूचित कर दिए हैं, जिसके तहत बाल कल्याण से जुड़े सभी कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।

असम सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और देखभाल प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। राज्य में स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) रूल्स, 2026 को लागू कर दिया गया है। इन नए नियमों के तहत बाल संरक्षण सेवाओं से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य संस्थागत कमियों को दूर करना और बच्चों की देखरेख करने वाली सभी संस्थाओं की जवाबदेही तय करना है।

कर्मचारियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग और जवाबदेही

नए नीतिगत ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्चों की देखभाल और सुरक्षा में लगे कर्मचारियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग है। इसके तहत बाल संरक्षण अधिकारियों और केयरगिवर्स की पृष्ठभूमि की गहन जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चों की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग तय सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। इस कदम से बाल देखभाल गृहों और सुरक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार की गुंजाइश को खत्म करने में मदद मिलेगी।

वैधानिक निकायों के कामकाज में सुधार

कर्मचारियों की जांच के अलावा, राज्य सरकार ने बाल कल्याण से जुड़ी वैधानिक संस्थाओं के काम करने के तरीके को भी सुव्यवस्थित किया है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) और 10 से अधिक अन्य वैधानिक निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार किया गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के मामले में किसी भी तरह की विनियामक ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इंडिविजुअल केयर प्लान और होम ऑडिट की व्यवस्था

बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों और सुरक्षा का आकलन करने के लिए सरकार ने इंडिविजुअल केयर प्लान और होम ऑडिट को संस्थागत रूप दिया है। इसके माध्यम से बच्चों के रहने की स्थिति, खान-पान, शिक्षा और सुरक्षा का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने X पर लिखा कि सरकार ने सुरक्षा तंत्र में मौजूद कमियों की पहचान की है और बच्चों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से ये सख्त कदम उठाए हैं।

रोकथाम से लेकर पुनर्वास तक एकीकृत ढांचा

जुवेनाइल जस्टिस रूल्स, 2026 के लागू होने से राज्य में बच्चों की रोकथाम, संस्थागत देखभाल, निगरानी और पुनर्वास के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार हुआ है। यह नीति सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करती है। इससे न केवल बाल संरक्षण तंत्र की प्रभावकारिता बढ़ेगी, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर सही सहायता और सुरक्षा भी मिल सकेगी।

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सवाल-जवाब

असम सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कौन से नए नियम अधिसूचित किए हैं?
असम सरकार ने बाल सुरक्षा और कल्याण ढांचे को मजबूत करने के लिए स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) रूल्स, 2026 को अधिसूचित किया है।
नई नीति के तहत किन लोगों की स्क्रीनिंग अनिवार्य की गई है?
बच्चों की देखरेख और सुरक्षा में लगे सभी बाल संरक्षण अधिकारियों और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच (स्क्रीनिंग) को अनिवार्य किया गया है।
किन संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार किया गया है?
राज्य सरकार ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) और 10 से अधिक अन्य वैधानिक निकायों के कामकाज को सुव्यवस्थित किया है।
इंडिविजुअल केयर प्लान और होम ऑडिट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इनका मुख्य उद्देश्य बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों, उनके रहने की स्थिति और सुरक्षा का व्यवस्थित और नियमित आकलन करना है।
यह नई बाल संरक्षण नीति किस प्रकार काम करेगी?
यह नीति राज्य में बाल सुरक्षा के लिए रोकथाम, संस्थागत देखरेख, निगरानी और पुनर्वास को शामिल करते हुए एक व्यापक और जवाबदेह ढांचा तैयार करती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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