भाद्रपद महीने की शुरुआत के साथ ही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विभिन्न व्रत और त्योहारों की शृंखला आरंभ हो जाती है। 1 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास का पहला मंगलवार पड़ रहा है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस विशेष दिन पर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 07:41 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत पंचमी तिथि लग जाएगी। चतुर्थी तिथि का संयोग मंगलवार के दिन होने से भगवान श्री गणेश और संकटमोचन हनुमान जी, दोनों की आराधना का अद्भुत अवसर प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग तथा अमृत सिद्धि योग जैसे अत्यंत फलदायी योग भी बन रहे हैं, जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत या धार्मिक अनुष्ठान के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।
गणेश और हनुमान जी की उपासना का विशेष संयोग
धार्मिक परंपराओं में मंगलवार का दिन शक्ति, साहस और ऊर्जा के प्रतीक हनुमान जी तथा मंगल ग्रह से संबंधित माना गया है। वहीं चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्नहर्ता भगवान गणेश हैं। ऐसे में 1 सितंबर 2026 को मंगलवार और चतुर्थी का यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए दोहरे आशीर्वाद की तरह है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के समस्त विघ्न-बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़ी कोई समस्या या मंगल दोष है, तो इस शुभ अवसर पर पूजा-पाठ करने से उसके नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है और व्यक्ति के भीतर निडरता तथा आत्मविश्वास का संचार होता है।
मंगलवार व्रत और पूजन की संपूर्ण विधि
इस पवित्र दिन पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। तत्पश्चात हाथ में जल लेकर हनुमान जी के सामने सच्चे मन से व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा स्थल पर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। इसके साथ ही लाल रंग के पुष्प, गुड़ और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करें और ॐ हनुमते नमः मंत्र का जाप करें। चतुर्थी तिथि रहने तक भगवान गणेश की भी लाल पुष्प और दूर्वा से पूजा करना मंगलकारी रहेगा। व्रत रखने वाले जातक अपनी सुविधा और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
आज के शुभ मुहूर्त और योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 1 सितंबर 2026 को दिनभर कई अत्यंत शुभ मुहूर्त उपस्थित रहेंगे। इस दिन सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जबकि चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में संचार करेंगे। नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार अश्विनी नक्षत्र 2 सितंबर को तड़के 02:42 बजे तक रहेगा, जिसके बाद भरणी नक्षत्र शुरू होगा।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:00 बजे से लेकर अगले दिन 2 सितंबर को तड़के 02:42 बजे तक रहेगा।
- अमृत सिद्धि योग: सुबह 06:00 बजे से 2 सितंबर को तड़के 02:42 बजे तक उपलब्ध रहेगा।
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:56 बजे से 12:47 बजे तक (पंचांग गणना अनुसार दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक) रहेगा, जो दिन का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:30 बजे से 05:15 बजे तक रहेगा।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 बजे से 03:20 बजे तक रहेगा।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:43 बजे से 07:06 बजे तक रहेगा।
- अमृत काल: रात 07:42 बजे से 09:15 बजे तक (या 09:16 बजे तक) रहेगा।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:59 बजे से देर रात 12:45 बजे (2 सितंबर) तक रहेगा।
पंचांग की तिथियां, करण और शिववास
1 सितंबर को करण की बात करें तो बालव करण सुबह 07:41 बजे तक रहेगा, इसके बाद कौलव करण शाम 06:59 बजे तक प्रभावी रहेगा। योग में वृद्धि योग रात 11:39 बजे तक रहेगा, जिसके पश्चात ध्रुव योग की शुरुआत होगी। आज शिववास की स्थिति भी बहुत शुभ है। सुबह 07:41 बजे तक भगवान शिव कैलाश पर विराजमान रहेंगे और उसके बाद वे नन्दी पर निवास करेंगे, जो रुद्राभिषेक या शिव पूजा के लिए अनुकूल माना जाता है। ध्यान रखें कि आज उत्तर दिशा का दिशाशूल है, इसलिए उत्तर दिशा में यात्रा करने से पहले सावधानी बरतें।
आज के अशुभ मुहूर्त और राहुकाल
धार्मिक कार्यों और नए अनुष्ठानों में विघ्न से बचने के लिए अशुभ समय का ध्यान रखना भी अनिवार्य है। इस दिन राहुकाल दोपहर 03:33 बजे से शाम 05:08 बजे तक रहेगा। राहुकाल के दौरान कोई भी नया कार्य या शुभ अनुष्ठान शुरू करने से बचना चाहिए।
- राहुकाल: दोपहर 03:33 बजे से शाम 05:08 बजे तक।
- यमगण्ड: सुबह 09:11 बजे से 10:46 बजे तक।
- गुलिक काल: दोपहर 12:22 बजे से 01:57 बजे तक।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 08:33 बजे से 09:24 बजे तक।
- वर्ज्य: रात 10:49 बजे से मध्यरात्रि 12:22 बजे (2 सितंबर) तक।
- विडाल योग: 2 सितंबर को तड़के 02:42 बजे से सुबह 06:00 बजे तक।
- ज्वालामुखी योग: 2 सितंबर को तड़के 02:42 बजे से सुबह 06:00 बजे तक।



















