मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव तेजी से बढ़ने और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल का माहौल है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर जाने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बदले बाजार परिदृश्य के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) पर दबाव बढ़ा है, और यह अपनी पिछली बढ़त को गंवाते हुए नीचे की ओर फिसल गया है। मुद्रा बाजार में यह कमजोरी ऐसे समय में आई है जब व्यापारी ऑस्ट्रेलिया के आगामी राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों और अमेरिका के महत्वपूर्ण श्रम बाजार आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मध्य पूर्व में गहराता सैन्य संकट और सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में डॉलर की मांग
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों के आदान-प्रदान से वैश्विक बाजार में चिंता की लहर दौड़ गई है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को जवाबी कार्रवाई न करने की कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने पलटवार किया तो उसे एक देश के रूप में पूरी तरह से मिटा दिया जाएगा, फिर भी आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
युद्ध के इस बढ़ते खतरे के चलते दुनिया भर के निवेशकों ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों से पूंजी निकालकर अमेरिकी डॉलर में निवेश करना शुरू कर दिया है। सुरक्षित परिसंपत्ति (safe-haven) के रूप में ग्रीनबैक की इस मजबूत मांग ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी उच्च-जोखिम वाली मुद्राओं पर सीधा असर डाला है, जिससे उनके विनिमय मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है।
AUD/USD का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख समर्थन स्तर
दैनिक चार्ट पर, AUD/USD की जोड़ी 0.7147 के आसपास कारोबार कर रही है। पिछले सत्र में 0.7173 के स्तर पर बंद होने के बाद इसमें लगभग 0.34% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद, यह जोड़ी 50-दिवसीय (0.7022), 100-दिवसीय और 200-दिवसीय (0.6974) सिंपल मूविंग एवेरजेस (SMAs) के समूह 0.7021 के ऊपर बनी हुई है, जिससे इसका अल्पकालिक तकनीकी रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है।
14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 59 के करीब बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी की गति तो मौजूद है लेकिन यह अभी ओवरबॉट स्थिति में नहीं पहुंची है। यदि AUD/USD इस मूविंग एवरेज क्लस्टर की रक्षा करने में सफल रहता है, तो इसमें फिर से तेजी की गुंजाइश बनी रहेगी।
ऊपरी स्तरों पर, AUD/USD के लिए पहला मुख्य प्रतिरोध 0.7198 के हॉरिजॉन्टल बैरियर पर स्थित है। यदि कीमत इस स्तर से ऊपर मजबूती से टिकती है, तो आगे और बड़ी तेजी का रास्ता साफ हो सकता है। इसके विपरीत, यदि नीचे की ओर गिरावट आती है तो 0.7021 का मूविंग एवरेज समूह प्राथमिक समर्थन का काम करेगा। इस स्तर से नीचे डेली क्लोजिंग होने पर तेजी का ढांचा कमजोर पड़ जाएगा और बाजार में गहरा सुधारात्मक दौर शुरू हो सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई जीडीपी पूर्वानुमान और अन्य मुद्राओं के मुकाबले प्रदर्शन
ऑस्ट्रेलियाई बाजार के लिए बुधवार का आर्थिक कैलेंडर बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि इस दिन वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी आंकड़े जारी किए जाएंगे। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर अर्थव्यवस्था 0.3% की दर से बढ़ेगी, जो कि पिछली तिमाही की वृद्धि दर के समान ही है। हालांकि, वार्षिक आधार पर (YoY) आर्थिक वृद्धि में बड़ी सुस्ती आने का अनुमान जताया गया है, जिसके 2.5% से घटकर 1.8% रहने की संभावना है।
मुद्रा बाजार के हालिया रुझानों को देखें तो इस सप्ताह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। विभिन्न मुद्राओं के सापेक्ष प्रदर्शन को दर्शाने वाले हीटमैप के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने न्यू ज़ीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूती दिखाई है, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसे नुकसान उठाना पड़ा है।
अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का प्रभाव
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर, निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अगस्त महीने के चैलेंजर जॉब कट्स, साप्ताहिक इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स और शुक्रवार को जारी होने वाली महत्वपूर्ण अगस्त नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) रिपोर्ट पर बाजार की पैनी नजर रहेगी।
श्रम बाजार के ये आंकड़े यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों में किस प्रकार का बदलाव करता है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है, जिससे फेड द्वारा दरों में आगे बढ़ोतरी किए जाने की आशंका गहरा गई है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में आई तेजी इसी बात का संकेत दे रही है।
ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और डीजल क्रैक स्प्रेड का नया रिकॉर्ड
मध्य पूर्व संघर्ष का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। यद्यपि कच्चे तेल की कीमतों में हाल में कुछ नरमी देखी गई है, लेकिन रिफाइंड उत्पादों, विशेष रूप से डीजल के बाजार से बेहद संवेदनशील संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्लूटीआई कच्चे तेल के बीच का अंतर, जिसे 'डीजल क्रैक स्प्रेड' कहा जाता है, हाल ही में इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया। यह स्प्रेड इंट्राडे कारोबार के दौरान $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है और बाजार में ईंधन की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।
वैश्विक बॉन्ड बाजार में बिकवाली और यील्ड में उछाल
सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर के sovereign बॉन्ड बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई है। इस बिकवाली का सबसे ज्यादा असर ब्रिटेन के सरकारी ऋणपत्रों पर पड़ा है। मंगलवार को यूके के 2-वर्षीय और 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड में एक समय 10 बेसिस पॉइंट्स (bps) तक का उछाल आया था, जो बाद में क्रमशः 7 और 8 bps की बढ़त पर बंद हुए।
सरकारी बॉन्ड की यील्ड में इस तेज बढ़त ने इक्विटी और विदेशी मुद्रा बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षित हुआ है।
यूरो, पाउंड और सोने की कीमतों पर चौतरफा दबाव
अमेरिकी डॉलर की सर्वत्र मजबूती और बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों और मुद्राओं में भी गिरावट दर्ज की गई है
- GBP/USD: ब्रिटिश पाउंड में बिकवाली का दबाव देखा गया और यह फिसलकर 1.3500 के निचले स्तरों के पास आ गया, जो इसका दो सप्ताह का निचला स्तर है।
- EUR/USD: यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो में भी बड़ी गिरावट आई और यह 1.1600 के अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़कर नीचे आ गया।
- सोना (Gold): सुरक्षित परिसंपत्ति माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी गिरावट आई है। पीली धातु गिरकर $4,300 प्रति ट्रॉय औंस के महत्वपूर्ण स्तर की ओर नीचे खिसक गई है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और डॉलर की मजबूती सोने के लिए नकारात्मक साबित हो रही है।


















