चीनी युआन और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर में हाल ही में देखी गई तीव्र हलचल के बाद बाजार में सीमित दायरे में कारोबार यानी कंसॉलिडेशन की संभावना जताई जा रही है। वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, यूएसडी और सीएनएच की यह जोड़ी आने वाले 24 घंटों से लेकर अगले एक से तीन हफ़्तों की अवधि में तय सीमाओं के भीतर सिमटी रह सकती है। हालिया मंदी की गति में कुछ तेजी जरूर देखी गई है, लेकिन यह किसी दीर्घकालिक गिरावट का संकेत देने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। किसी भी बड़े सुधार के लिए तकनीकी रूप से बने मजबूत रेजिस्टेंस लेवल्स को पार करना आवश्यक होगा। इसके अलावा, वैश्विक वित्तीय बाजारों में विदेशी मुद्रा, कीमती धातुओं, बॉन्ड मार्केट और ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उठापटक दर्ज की गई है, जहाँ डॉलर की मजबूती और वैश्विक चिंताओं का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिल रहा है।
यूएसडी और सीएनएच में 24 घंटे का उतार-चढ़ाव और हालिया स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजार में यूएसडी और सीएनएच की विनिमय दर में हाल के कारोबारी सत्रों में भारी अस्थिरता दर्ज की गई है। बीते शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर तेजी से उछलकर 6.7327 के उच्च स्तर पर पहुँच गया था और अंत में 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 6.7319 पर बंद हुआ। शुरुआती विश्लेषणों में यह माना जा रहा था कि तेजी का यह दौर अपनी सीमा तक पहुँच चुका है और डॉलर के 6.7230 से 6.7330 के दायरे में कारोबार करने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, बाजार की वास्तविक चाल अनुमान से अलग रही और उतार-चढ़ाव में अचानक बड़ी वृद्धि देखी गई।
कारोबार के दौरान डॉलर पहले ऊपर चढ़कर 6.7338 के स्तर तक गया, लेकिन इसके तुरंत बाद इसमें तीखी गिरावट आई और यह 6.7177 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। इस प्रकार के तीव्र बदलावों के कारण अल्पकालिक दिशा का सटीक निर्धारण करना जटिल हो गया है। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि अगले 24 घंटों के दौरान यूएसडी और सीएनएच की विनिमय दर मुख्य रूप से 6.7120 से 6.7250 के बीच बनी रह सकती है।
एक से तीन हफ़्तों का आउटलुक: मजबूत सपोर्ट लेवल टूटने के संकेत
मध्यम अवधि यानी एक से तीन हफ़्तों के नजरिए से देखें तो डॉलर के रुख में हाल ही में बदलाव देखा गया है। इस महीने की शुरुआत से बने नकारात्मक दृष्टिकोण के बाद, 31 अगस्त को जब स्पॉट रेट 6.7290 पर था, तब दृष्टिकोण में हल्का सुधार देखा गया था। उस समय संभावना जताई जा रही थी कि महीने भर से जारी डॉलर की कमजोरी अब थम गई है और इसमें 6.7400 के स्तर का परीक्षण करने की गुंजाइश बन सकती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया था कि इस स्तर से ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट होगा या नहीं, यह कहना जल्दबाजी होगी।
लेकिन यह सकारात्मक परिदृश्य बहुत जल्द खारिज हो गया जब डॉलर में दोबारा तेज गिरावट आई। इस दौरान 6.7190 का मजबूत सपोर्ट लेवल टूट गया और दर 6.7177 के निचले स्तर तक पहुँच गई। यद्यपि नीचे की ओर जाने की गति बढ़ी है, फिर भी यह इतनी मजबूत नहीं है कि लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहने की पुष्टि कर सके। मौजूदा मोमेंटम के आधार पर, आने वाले दिनों में डॉलर के 6.7050 से 6.7300 के दायरे में ही सीमित रहने की संभावना अधिक है।
जीबीपी और यूरो पर बढ़ता दबाव: प्रमुख सपोर्ट लेवल्स ध्वस्त
अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ब्रिटिश पाउंड (जीबीपी/यूएसडी) मंगलवार को दबाव में नजर आया और गिरकर 1.3500 के निचले स्तरों के आसपास पहुँच गया, जो पिछले दो हफ़्तों का निचला स्तर है। पाउंड में दर्ज की गई इस मंदी का मुख्य कारण ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर की मजबूत खरीदारी है। निवेशक इस समय अमेरिका से आए नवीनतम आर्थिक आंकड़ों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बने तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का आकलन कर रहे हैं।
दूसरी ओर, यूरो (ईयूआर/यूएसडी) में भी दैनिक आधार पर मंदी का दौर तेज होता देखा गया है। मंगलवार के कारोबारी सत्र में यूरो ने अपने महत्वपूर्ण 1.1600 के सपोर्ट लेवल को नीचे की ओर तोड़ दिया। निराशाजनक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी डॉलर में आए उछाल और वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण यूरो में यह गिरावट दर्ज की गई है।
सोने के भाव में गिरावट और वैश्विक बॉन्ड बाजार में बिकवाली
कीमती धातुओं के बाजार में भी डॉलर की मजबूती का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के प्रमुख स्तर की ओर नीचे खिसक गया। सोने के भाव में आई इस कमी के पीछे अमेरिकी डॉलर का मजबूत प्रदर्शन और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में पूरी कर्व के दौरान दर्ज की गई तेज बढ़ोतरी मुख्य कारक रहे हैं।
इसके साथ ही, नए महीने की शुरुआत के साथ ही वैश्विक संप्रभु बॉन्ड (ग्लोबल सोवरेन बॉन्ड्स) में भारी बिकवाली का माहौल देखा गया। इस बिकवाली में सबसे ज्यादा असर ब्रिटेन के बॉन्ड बाजार पर पड़ा। मंगलवार को एक समय ब्रिटेन के 2-वर्षीय और 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड में 10 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो बाद में क्रमशः 7 और 8 बेसिस पॉइंट्स की बढ़त पर कारोबार कर रही थीं।
ऊर्जा बाजार की स्थिति: डीजल क्रैक स्प्रेड में रिकॉर्ड तेजी
ऊर्जा बाजार में हालांकि कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ महीनों की तुलना में अधिक शांत नजर आ रही हैं, लेकिन डीजल खंड से काफी अलग संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम, पहली बार प्रति बैरल 100 डॉलर के पार निकल गया है। कारोबार के दौरान इसने 102.00 डॉलर प्रति बैरल का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ। यह उछाल ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और शोधन क्षमता पर पड़ रहे दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।


















