वर्ष 2026 में ग्रहों की चाल में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसके तहत देवगुरु बृहस्पति अपनी राशि बदलेंगे। आगामी 31 अक्टूबर को गुरु कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में कर्क राशि में गुरु को उच्च का माना जाता है, इसलिए सिंह राशि में यह गोचर विशेष महत्व रखता है। इस बदलाव के बाद बृहस्पति की स्थिति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा, जिसका असर विभिन्न राशियों और जातकों के जीवन पर पड़ेगा। सिंह राशि में यह गोचर कुछ ही महीनों तक सीमित रहेगा क्योंकि इसके बाद ग्रहों की गति में फिर से बदलाव आएगा।
सिंह राशि में कुछ समय बिताने के बाद बृहस्पति की चाल में नया मोड़ आएगा। ठीक इसके बाद 13 दिसंबर को गुरु वक्री यानी उल्टी चाल चलना शुरू कर देंगे। इसके बाद 25 जनवरी 2027 को वह अपनी वक्री अवस्था के दौरान ही वापस कर्क राशि में आ जाएंगे। इस प्रकार अक्टूबर से लेकर जनवरी तक की अवधि गुरु के गोचर के लिहाज से बेहद खास और महत्वपूर्ण रहने वाली है। इस पूरी अवधि के दौरान आसमान में ग्रहों की स्थिति और उनकी चाल पर ज्योतिष प्रेमियों और जानकारों की खास नजर टिकी रहेगी।
इस पूरे ज्योतिषीय घटनाक्रम के दौरान केवल गुरु का राशि परिवर्तन ही अहम नहीं है, बल्कि अन्य ग्रहों की स्थितियां भी प्रभाव डालेंगी। इस समयावधि में गुरु और केतु की युति पर भी ज्योतिषियों की पैनी नजर रहने वाली है। इन दोनों ग्रहों का संयोजन ज्योतिषीय गणना में विशेष स्थान रखता है और इससे जुड़े प्रभावों का आकलन भी लगातार किया जा रहा है। अक्टूबर से शुरू होने वाला यह गोचर चक्र ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कई उतार-चढ़ाव और बदलाव लेकर आएगा, जिस पर जानकारों की पूरी नजर बनी हुई है।


















