गाड़ियों की गिरती माइलेज को लेकर मचे शोर के बीच सरकार ने ईंधन बचत के नियमों को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है। तय हुआ है कि 1 अप्रैल 2027 से CAFE-3 लागू होगा। CAFE यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी नॉर्म्स। फिलहाल देश में CAFE-2 चल रहा है, जिसकी मियाद 31 मार्च 2026 तक है। इस पूरी कवायद का मकसद बाजार में ऐसी गाड़ियों की तादाद बढ़ाना है जो कम तेल में ज्यादा दूरी तय करें। नए नॉर्म्स के हिसाब से कंपनियों को अब ऐसी कारें बनानी होंगी जो सिर्फ 3.99 लीटर में कम से कम 100 किलोमीटर का सफर पूरा करें। सीधे शब्दों में कहें तो हर लीटर पर 25 किलोमीटर की माइलेज।
हर एक कार पर नहीं, पूरे बेड़े पर लागू
यहां एक बात समझना जरूरी है। यह पैमाना किसी एक गाड़ी पर अलग से लागू नहीं होगा। कार बनाने वाली कंपनी को अपनी सभी गाड़ियों की मिलाकर औसत माइलेज इतनी दिखानी होगी। इसका मतलब यह है कि कंपनी की कोई एक कार 15 किलोमीटर प्रति लीटर की माइलेज दे रही हो, तो भी चलेगा, बशर्ते उसी कंपनी की किसी दूसरी कार की माइलेज 30 किलोमीटर या उससे ज्यादा हो। असल में नियम यह देखता ही नहीं कि किसी एक कार की माइलेज कितनी है। सरकार कंपनी से बस इतना पूछती है कि साल भर में उसने जितनी भी गाड़ियां बेचीं, उन सबका औसत माइलेज तय सीमा से बेहतर था या नहीं।
2031-32 में नियम और सख्त
CAFE-3 के बाद सरकार और कसने वाली है। साल 2031-32 में नियम और कड़े कर दिए जाएंगे। उस वक्त किसी कार कंपनी की औसत माइलेज 3.32 लीटर में 100 किलोमीटर होनी चाहिए। जो कंपनी यह पैमाना पूरा नहीं कर पाएगी, उस पर भारी भरकम जुर्माना ठोका जाएगा। यही वजह है कि जो कंपनी बहुत ज्यादा तेल पीने वाली गाड़ियां बेचेगी, उसे जुर्माने का डर सताएगा। इसीलिए कंपनियों को मजबूरन ज्यादा माइलेज देने वाली या फिर इलेक्ट्रिक गाड़ियां बाजार में उतारनी पड़ रही हैं।
ईवी और बायोफ्यूल वालों की चांदी
सरकार ने इस मसौदे पर हितधारकों से राय मांगी है, जिनमें आम जनता और कार कंपनियां दोनों शामिल हैं। सभी लोग 6 अगस्त 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं। कंपनियां चाहती हैं कि सरकार उन्हें कुछ डिस्काउंट या क्रेडिट दे। सरकार ऐसा कर भी रही है, लेकिन ज्यादा रियायत इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनियों को मिल रही है। इलेक्ट्रिक, फ्लेक्स फ्यूल या हाइब्रिड कार बनाने वाली कंपनियों को सुपर क्रेडिट स्कोर दिया जाएगा, जिससे उनका औसत स्कोर सुधर सकता है। इसके अलावा पहली बार इथेनॉल, बायो-गैस (CBG) और बायो-फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों को प्रदूषण घटाने के बदले एक्स्ट्रा पॉइंट यानी कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर्स मिलेंगे। अगर आप भी इस मामले में कोई सुझाव देना चाहते हैं तो saket-upsc[at]gov[dot]in पर या फिर अंडर सेक्रेटरी, एनर्जी कन्जर्वेशन, आर. नंबर-6424, हॉल नंबर-4, छठी मंजिल, जीपीओए-3 अफ्रीका एवेन्यू, नेताजी नगर, नई दिल्ली के पते पर भेज सकते हैं।
क्रेडिट बेचकर सरकार भी कमाएगी पैसा
मान लीजिए कोई कंपनी अपना तय लक्ष्य पूरा नहीं कर पाती है, तो वह दूसरी कंपनी से टारगेट खरीद भी सकती है। सिर्फ दूसरी कंपनी ही नहीं, खुद सरकार भी क्रेडिट बेचकर कमाई करेगी। पहले साल में एक क्रेडिट की कीमत 2500 रुपये रखी गई है, जो हर साल 500 रुपये के हिसाब से बढ़ती जाएगी। अगर कोई कंपनी न तो नियम मानती है और न ही क्रेडिट खरीदती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगेगा। हालांकि, जो छोटी कार कंपनियां भारत में साल भर में 1,000 से कम कारें बेचती हैं, उन्हें इन सख्त नियमों से बाहर रखा गया है।










