ऑटो और कैब से यात्रा करना हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। लेकिन फरीदाबाद और दिल्ली एनसीआर के अन्य इलाकों में सफर करने वाले यात्रियों को अक्सर एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। यह समस्या है वाहन चालकों द्वारा तय किराए से अधिक पैसे वसूलने की। कई बार लोग दफ्तर जाने की जल्दी में या किसी जरूरी काम के कारण बिना किसी बहस के चुपचाप अतिरिक्त पैसे दे देते हैं। वहीं, जो लोग इसका विरोध करते हैं, उन्हें अक्सर चालकों की अभद्रता, बहस और बदसलूकी का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में यात्रियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस मनमानी के खिलाफ क्या कानूनी रास्ते मौजूद हैं, शिकायत कहां दर्ज कराई जाए और दोषी चालक पर क्या कार्रवाई हो सकती है। फरीदाबाद के सेक्टर 12 कोर्ट के वकील मोहन तिवारी ने इस पूरी प्रक्रिया और यात्रियों के कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है।
चालक की मनमानी पर सबसे पहले रखें धैर्य
वकील मोहन तिवारी का कहना है कि जब भी कोई ऑटो या कैब चालक आपसे तय किराए से अधिक पैसे की मांग करे, तो सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम यह है कि आप खुद पर नियंत्रण रखें और धैर्य बनाए रखें। किसी भी सूरत में चालक के साथ सीधे तौर पर लड़ाई-झगड़े या हाथापाई की स्थिति में न पड़ें। जब आप ऑनलाइन माध्यम से या किसी ऐप के जरिए कैब या ऑटो बुक करते हैं, तो आपके पास उस यात्रा की पूरी जानकारी उपलब्ध होती है। इस जानकारी में स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि आपने किस स्थान से यात्रा शुरू की है, आपको कहां जाना है और इस सफर का कुल किराया कितना तय हुआ है।
ऐसी स्थिति में आपको शांत रहकर चालक को समझाना चाहिए कि बुकिंग के समय जो किराया तय हुआ था, उसका पूरा रिकॉर्ड आपके फोन में सुरक्षित है। आप चालक को साफ तौर पर बता सकते हैं कि आप तय सीमा से एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देंगे। यदि आप शांति से अपनी बात रखेंगे और उन्हें दिखाएंगे कि आपके पास सबूत मौजूद है, तो कई बार मामले वहीं सुलझ जाते हैं। इसके बावजूद, यदि चालक बहस जारी रखता है, तो विवाद को बढ़ाने के बजाय कानूनी तरीकों का रुख करना चाहिए।
सबूत जुटाना है सबसे जरूरी कदम
यदि चालक अधिक किराए के लिए दबाव बनाता है या आपके साथ अनुचित व्यवहार करता है, तो आपके पास कानूनी कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत होने चाहिए। वकील मोहन तिवारी के अनुसार, जब आप कोई कैब या गाड़ी बुक करते हैं, तो उस बुकिंग का रिकॉर्ड आपके मोबाइल फोन में दर्ज हो जाता है। आपको उस बुकिंग स्क्रीन, तय किए गए किराए और यात्रा के विवरण का स्क्रीनशॉट लेकर हमेशा अपने पास सुरक्षित रख लेना चाहिए। यह स्क्रीनशॉट शिकायत दर्ज कराते समय सबसे बड़ा और प्राथमिक डिजिटल सबूत बनता है।
इसके अलावा, अगर चालक आपके मना करने पर भी अत्यधिक बहस करता है, डराता-धमकाता है या किसी भी तरह की बदतमीजी पर उतर आता है, तो आपको तुरंत अपने मोबाइल फोन से उसकी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग शुरू कर देनी चाहिए। इस ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग में चालक की हरकतें और उसकी बातें साफ तौर पर दर्ज होनी चाहिए। यह रिकॉर्डिंग पुलिस या संबंधित विभाग के सामने आपके पक्ष को बेहद मजबूत बनाती है।
परिवहन विभाग और पुलिस में शिकायत की व्यवस्था
ओवरचार्जिंग और मनमाने किराए की शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग-अलग सरकारी माध्यम उपलब्ध हैं। वकील मोहन तिवारी बताते हैं कि दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में परिवहन विभाग और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर काम करते हैं। ये दोनों विभाग संयुक्त रूप से उन ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हैं जो यात्रियों से अधिक किराया वसूलते हैं, मीटर से चलने से इनकार करते हैं या मनमाना किराया वसूलते हैं।
यदि कोई यात्री फरीदाबाद या दिल्ली एनसीआर में इस तरह की समस्या का सामना करता है, तो वह परिवहन विभाग की हेल्पलाइन या ट्रैफिक पुलिस के संपर्क नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत दर्ज कराते समय आपके पास जो बुकिंग रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, उसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। इन सबूतों के आधार पर प्रशासन दोषी वाहन और उसके चालक के खिलाफ उचित कार्रवाई अमल में लाता है।
मीटर और बिना मीटर वाले वाहनों के लिए अलग नियम
हमारे देश के अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक वाहनों के लिए अलग-अलग परिवहन नियम लागू हैं। वकील मोहन तिवारी के अनुसार, जिन क्षेत्रों में मीटर के आधार पर चलना अनिवार्य किया गया है, वहां बिना मीटर के वाहन चलाना या मीटर से चलने से मना करना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। उदाहरण के लिए, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में जहां ऑटो का मीटर के अनुसार चलना पूरी तरह अनिवार्य है, वहां इस नियम के उल्लंघन पर सख्त कानूनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
दूसरी तरफ, जिन शहरों या क्षेत्रों में मीटर सिस्टम पूरी तरह से लागू नहीं है या व्यावहारिक रूप से काम नहीं कर रहा है, वहां परिवहन विभाग द्वारा तय किए गए नियमों और दरों के अनुसार ही किराया वसूला जाना चाहिए। यदि वहां भी तय की गई सरकारी दरों से अधिक किराया मांगा जाता है, तो यात्री नियम उल्लंघन की शिकायत संबंधित जिला परिवहन कार्यालय या यातायात पुलिस से कर सकते हैं।
कैब कंपनियों की भूमिका और चालकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी
कैब बुकिंग के मामलों में अक्सर दो अलग-अलग तरह की परिस्थितियां सामने आती हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। वकील मोहन तिवारी स्पष्ट करते हैं कि यात्रियों को यह देखना चाहिए कि अतिरिक्त पैसे की मांग चालक व्यक्तिगत स्तर पर कर रहा है या फिर यह समस्या कैब सेवा प्रदाता कंपनी के तकनीकी सिस्टम या ऐप की वजह से है।
यदि कैब चालक कंपनी के ऐप में दिखाए गए किराए से अलग हटकर अपनी मर्जी से नकद या व्यक्तिगत खाते में ज्यादा पैसे की मांग करता है, तो यह पूरी तरह से चालक की व्यक्तिगत गलती और धोखाधड़ी का मामला है। इसकी शिकायत तुरंत स्थानीय पुलिस में की जा सकती है। इसके विपरीत, यदि किराया बढ़ने की समस्या कैब कंपनी के ऐप या प्लेटफॉर्म से जुड़ी है, जैसे कि अचानक बढ़ा हुआ किराया या गलत रूट कैलकुलेशन, तो यात्री को सीधे उस ऐप के भीतर दिए गए सपोर्ट या शिकायत सेक्शन में अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
बदसलूकी और गंभीर अपराधों पर कानूनी कार्रवाई
यदि सफर के दौरान चालक केवल पैसे तक सीमित न रहकर यात्री के साथ गंभीर रूप से बदसलूकी, गाली-गलौज या मारपीट पर उतर आता है, तो यह मामला सीधे तौर पर आपराधिक श्रेणी में आ जाता है। वकील मोहन तिवारी बताते हैं कि कानून में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान हैं और की जाने वाली कानूनी कार्रवाई चालक द्वारा किए गए अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है।
यदि चालक ने यात्री के साथ केवल गाली-गलौज या अभद्र व्यवहार किया है, तो उसके खिलाफ उसी के अनुरूप पुलिस कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यदि विवाद इतना बढ़ जाता है कि चालक यात्री के साथ हाथापाई करता है, उन्हें शारीरिक चोट पहुंचाता है या गंभीर रूप से घायल कर देता है, तो पुलिस भारतीय कानून के तहत मारपीट और गंभीर चोट पहुंचाने से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करेगी। ऐसी किसी भी आपातकालीन स्थिति में यात्री को तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके मदद मांगनी चाहिए और अपने पास मौजूद वीडियो या ऑडियो साक्ष्य पुलिस को सौंपने चाहिए।



















