भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के मिडसाइज एसयूवी सेगमेंट में अगस्त 2026 के दौरान एक दिलचस्प और अप्रत्याशित मुकाबला देखने को मिला है। एक जैसी तकनीक, समान प्लेटफॉर्म और एक ही असेंबली लाइन पर तैयार होने के बावजूद निसान टेक्टन ने बिक्री के आंकड़ों में रेनो डस्टर को पछाड़ दिया है। समीक्षाधीन महीने में निसान टेक्टन की कुल 491 यूनिट बिकीं, जबकि रेनो डस्टर केवल 406 यूनिट ही ग्राहकों तक पहुंचा सकी। हालांकि दोनों ही गाड़ियां अपनी शुरुआती सफलताओं के बाद अब मंदी के दौर से गुजर रही हैं और दोनों ने अपने लॉन्च के बाद से अब तक का सबसे निचला मासिक बिक्री स्तर दर्ज किया है।
लॉन्च के बाद से बिक्री के आंकड़े और गिरावट की रफ्तार
बाजार में जुलाई महीने में कदम रखने वाली निसान टेक्टन ने अपनी शुरुआत बेहद धमाकेदार तरीके से की थी और पहले ही महीने में 1,670 यूनिट बेचकर कंपनी का सबसे लोकप्रिय मॉडल बन गई थी। मगर अगस्त के आते ही इसकी मांग में 71 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, रेनो डस्टर का हाल यह है कि मार्च में लॉन्च होने के बाद से इसका ग्राफ लगातार नीचे की ओर ही आ रहा है। बाजार में हुंडई क्रेटा, किया सेल्टोस और टाटा सिएरा जैसी मजबूत गाड़ियों की मौजूदगी के कारण इन दोनों मॉडलों को अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ रहा है।
रेनो डस्टर के मासिक सफर की बात करें तो मार्च में इसकी 1,402 यूनिट बिकी थीं, अप्रैल में यह आंकड़ा बढ़कर 2,359 यूनिट पर पहुंचा, लेकिन मई में यह लुढ़ककर 1,267 यूनिट रह गया। इसके बाद जून में 1,011 यूनिट, जुलाई में 512 यूनिट और अंततः अगस्त में यह घटकर 406 यूनिट पर सिमट गया। दूसरी तरफ, जुलाई में लॉन्च के साथ ही 1,670 यूनिट बेचने वाली निसान टेक्टन की बिक्री अगस्त में गिरकर 491 यूनिट पर आ गई, जिससे दोनों की कुल संयुक्त बिक्री का आंकड़ा 2,161 यूनिट पर पहुंच गया है।
डिजाइन और एक्सटीरियर की बनावट
दोनों गाड़ियों की बनावट में हालांकि बहुत कुछ एक जैसा है, लेकिन निसान टेक्टन अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रही है। इस एसयूवी का डिजाइन काफी हद तक निसान पैट्रोल से प्रेरित नजर आता है। इसके अगले हिस्से में लगाई गई फुल-विड्थ सी-शेप्ड एलईडी डीआरएल, स्लिम हेडलैंप, आकर्षक क्रोम ग्रिल और इसका चौकोर यानी बॉक्सी स्टांस इसे सड़क पर रेनो डस्टर से काफी अलग और दमदार लुक देता है। गाड़ी के पिछले हिस्से को भी आधुनिक टच दिया गया है जहां कनेक्टेड सी-शेप्ड टेल लैंप के साथ सिल्वर एक्सेंट दिए गए हैं। आकार की बात करें तो इस एसयूवी की कुल लंबाई लगभग 4,349 मिमी, व्हीलबेस 2,657 मिमी और इसका ग्राउंड क्लियरेंस 212 मिमी है।
केबिन के भीतर का माहौल और आधुनिक फीचर्स
गाड़ी के अंदर प्रवेश करते ही इसका केबिन यात्रियों का स्वागत रोज़ गोल्ड और बरगंडी डुअल-टोन थीम के साथ करता है। ड्राइवर और यात्रियों के मनोरंजन व कनेक्टिविटी के लिए इसमें गूगल बिल्ट-इन के साथ 10.1 इंच की टचस्क्रीन डिस्प्ले और 10.25 इंच का डिजिटल क्लस्टर दिया गया है। इसके अलावा कार के भीतर पैनोरामिक सनरूफ, वेंटिलेटेड पावर्ड फ्रंट सीट्स, वायरलेस चार्जर, डुअल-जोन एसी और एक पावर्ड टेलगेट जैसी सुविधाएं मिलती हैं। सामान रखने के लिए इसमें पर्याप्त जगह है जहां पार्सल शेल्फ तक 518 लीटर और छत तक कुल 700 लीटर का बूट स्पेस मिल जाता है।
अन्य आधुनिक सुविधाओं की बात करें तो इस मॉडल में एम्बिएंट लाइटिंग, कीलेस एंट्री और विभिन्न ड्राइविंग मोड्स दिए गए हैं। सुरक्षा के मोर्चे पर भी यह गाड़ी काफी मजबूत है और इसके सभी वेरिएंट्स में स्टैंडर्ड तौर पर 6 एयरबैग मिलते हैं। इसके टॉप वेरिएंट्स में लेवल-2 एडीएएस तकनीक दी गई है जिसमें 15 से 17 अलग-अलग फंक्शन्स काम करते हैं। इसके अलावा 360-डिग्री कैमरा, ईएससी, टीपीएमएस, हिल होल्ड और चारों पहियों में डिस्क ब्रेक जैसी सुरक्षा प्रणालियां मौजूद हैं। भारत एनकैप क्रैश टेस्ट में इसे सुरक्षा के लिहाज से पूरे 5-स्टार रेटिंग मिले हैं।
इंजन विकल्प, प्रदर्शन और बाजार में कीमत
खरीददारों के लिए इसे दो अलग-अलग इंजन विकल्पों के साथ बाजार में उतारा गया है। पहला विकल्प 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन का है जो 100 पीएस की ताकत और 166 एनएम का टॉर्क पैदा करता है, जिसे 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है और यह 19.4 किमी प्रति लीटर का माइलेज देता है। दूसरा विकल्प अधिक शक्तिशाली 1.3-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन का है जो 163 पीएस की पावर और 280 एनएम का टॉर्क जनरेट करता है, जिसे मैनुअल या 6-स्पीड डीसीटी गियरबॉक्स के साथ खरीदा जा सकता है और इसकी माइलेज 17.8 से 18.5 किमी प्रति लीटर के बीच है। परफॉर्मेंस के मामले में इसका बड़ा इंजन महज 9.5 सेकंड में ही 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेता है। भारतीय बाजार में इस एसयूवी की एक्स-शोरूम कीमत 10.49 लाख रुपये से शुरू होकर 18.59 लाख रुपये तक जाती है। निसान टेक्टन की तेज शुरुआत और उसके बाद आई गिरावट यह बताने के लिए काफी है कि इस प्रतिस्पर्धी मिडसाइज सेगमेंट में अपनी जड़ें जमाए रखना किसी भी कंपनी के लिए आसान काम नहीं है।



















