बुलियन बाजार में पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों तक दोनों कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव हावी रहा। बाजार के जानकारों का मानना है कि चालू सप्ताह के दौरान भी कीमतों में तेज हलचल और अस्थिरता बनी रह सकती है। आने वाले दिनों में अमेरिका से जारी होने वाले अहम मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़े, पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य तथा कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति की स्थिति मिलकर सोने और चांदी की भावी चाल तय करेंगे। निवेशकों की निगाहें विशेष रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख संकेतकों पर टिकी हैं, जिनमें उपभोक्ता विश्वास, सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के संशोधित आंकड़े और व्यक्तिगत उपभोग व्यय आधारित मुद्रास्फीति शामिल हैं। इसके अलावा यूरोजोन के महंगाई आंकड़े, विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई डेटा तथा फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं के आगामी वक्तव्य भी बाजार की धारणा पर गहरा प्रभाव डालेंगे।
रोजगार के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर टिकी नजर
अमेरिकी लेबर मार्केट से आने वाले आंकड़े इस समय बुलियन निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहे हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, ट्रेडर्स की बारीक नजर अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार और बेरोजगारी दर के आंकड़ों पर केंद्रित रहेगी। यह डेटा इसलिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है क्योंकि इसके आधार पर ही अक्टूबर के दौरान होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों से संबंधित फैसलों की दिशा तय होगी। यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से अधिक मजबूत आते हैं, तो केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर मजबूत होगा और बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने पर सीधा दबाव बढ़ जाएगा। इसके विपरीत, रोजगार के मोर्चे पर नरमी आने से ब्याज दरों में राहत की उम्मीदें बढ़ेंगी, जिससे डॉलर नरम पड़ सकता है और बुलियन कीमतों को सहारा मिलने की जमीन तैयार हो सकती है।
घरेलू और वैश्विक वायदा एक्सचेंजों पर पिछले हफ्ते का हाल
बीते सप्ताह भारतीय वायदा बाजार में दोनों ही कीमती धातुओं में निवेशकों ने मुनाफावसूली और बिकवाली का रुख अपनाया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर अक्टूबर अनुबंध वाले सोने की वायदा कीमत में 3,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी गिरावट आई, जो लगभग 2.3 प्रतिशत का नुकसान दर्शाती है। इस बड़ी गिरावट के चलते सोना फिसलकर 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, चांदी के वायदा भाव में भी तीखी कमजोरी देखने को मिली, जहां प्रति किलोग्राम भाव में 6,907 रुपये यानी करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और यह घटकर 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।
विदेशी बाजारों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही रही। अमेरिकी वायदा बाजार COMEX पर दिसंबर अनुबंध वाले सोने के भाव में 103.7 डॉलर अथवा 2.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव गिरकर 4,321.2 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इसी तरह चांदी की कीमतों में 2.35 डॉलर यानी 3.5 प्रतिशत का बड़ा नुकसान हुआ और यह 64.80 डॉलर प्रति औंस के भाव पर स्थिर हुई। दोनों एक्सचेंजों पर आई यह गिरावट दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर बड़े निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव और कच्चे तेल की स्थिति
सोने और चांदी पर छाए दबाव के पीछे केवल करेंसी बाजार की चाल नहीं है, बल्कि सरकारी बॉन्ड मार्केट का रुख भी अहम भूमिका निभा रहा है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर के अनुसार, सोने की कीमतों पर दबाव सिर्फ मुद्रा बाजार की वजह से नहीं है, बल्कि अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 2007 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। इसी प्रकार 30 साल की ट्रेजरी यील्ड भी 2004 के बाद के सबसे ऊंचे स्तरों के नजदीक बनी हुई है। जब दीर्घकालिक बॉन्ड पर यील्ड अत्यधिक बढ़ जाती है, तो संस्थागत निवेशक सुरक्षित रिटर्न पाने के लिए बॉन्ड की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे सोने और चांदी जैसे पारंपरिक निवेश विकल्पों की चमक फीकी पड़ जाती है।
इसके साथ ही कच्चे तेल के बाजार में चल रही गतिविधियां भी मुद्रास्फीति और कमोडिटी रुझानों को प्रभावित कर रही हैं। रूस और यूक्रेन द्वारा एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने के बावजूद वैश्विक स्तर पर आपूर्ति संकट गहराने नहीं पाया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि सऊदी अरब और इराक से कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में उतारी गई है, जिससे चालू माह के दौरान उपलब्धता में सुधार हुआ है और क्रूड की कीमतों पर दबाव कायम रहा है। ऊर्जा की कीमतों में नरमी से वैश्विक महंगाई में कमी आने की उम्मीदें बढ़ती हैं, जो बुलियन की मांग को प्रभावित करती हैं। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि गांधी जयंती के राष्ट्रीय अवकाश के उपलक्ष्य में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को भारतीय कमोडिटी बाजार बंद रहेंगे, जिससे इस हफ्ते कारोबारी सत्रों की संख्या सीमित रहेगी।



















