सोने और चांदी में आई तेज गिरावट के बाद क्या इस हफ्ते थमेगा उतार-चढ़ाव, समझें बाजार का पूरा गणितमूलांक 4 राशिफल 28 सितंबर 2026: जिद से बचें और तालमेल बढ़ाएं, जानें कैसा रहेगा दिनअंबाला में निर्माणाधीन इमारत ढहने से पांच मजदूरों की मौत, बारह घायल और अवैध निर्माण का मामला आया सामनेशनि की वक्री चाल: अगले 74 दिन इन 6 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्कबलिया के किसान ज्ञानचंद ने एप्पल बेर की खेती से पलटी किस्मत, सालाना 12 लाख रुपये तक का टर्नओवरदिल्ली-एनसीआर में बदला मौसम का मिजाज, ठंडी हवाओं और धूप गायब रहने से मिली राहतअक्टूबर में सूर्य का तुला गोचर: इन 6 राशियों के लोगों को रहना होगा बेहद सतर्क, बढ़ सकती हैं मुश्किलेंपलामू में सुखाड़ के बीच स्ट्रॉबेरी से लाखों की कमाई, खेती शुरू करने से पहले जरूर अपनाएं ये जरूरी कृषि तकनीकेंएकता कपूर के ब्रेक से 41 करोड़ की संपत्ति तक, मौनी रॉय की पढ़ाई छोड़ने और असली सांपों से डरने की अनकही कहानीक्या चीन को हथियार बेचना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप, जिनपिंग से मुलाकात का बड़ा खुलासा
सूर्य देव को जल अर्पित करने का सही नियम, अर्घ्य के बाद जमीन पर गिरे जल का ऐसे करें उपयोगअध्यात्म
28 सित॰ 2026, 8:51 am (24 मिनट पहले)· 0

सूर्य देव को जल अर्पित करने का सही नियम, अर्घ्य के बाद जमीन पर गिरे जल का ऐसे करें उपयोग

शास्त्रों में सूर्य को अर्घ्य देना बेहद लाभकारी माना गया है, लेकिन जल चढ़ाने के बाद जमीन पर गिरे जल का स्पर्श करना स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों के लिए खास महत्व रखता है।

हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में प्रात:काल सूर्य उपासना को अत्यंत पावन और फलदायी कर्म माना जाता है। सुबह के समय भगवान सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा केवल एक सामान्य पूजा विधि नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, शारीरिक ताजगी और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का एक प्रभावी माध्यम भी है। सुबह की पहली किरण के साथ सूर्य वंदना करने से मनुष्य के अंतर्मन में शांति का संचार होता है और पूरे दिन के कार्यों के लिए एक नई शक्ति मिलती है।

सूर्य उपासना से मजबूत होती है कुंडली और सुधरती है सेहत

महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, नियमित रूप से उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने से जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति अत्यधिक बलवान हो जाती है। जब कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है, तो उसका प्रत्यक्ष और सकारात्मक प्रभाव व्यक्ति की सेहत, मानसिक संतुलन और जीवन में निरंतर आने वाली खुशहाली पर दिखाई देता है। यदि कोई जातक इसे अपनी नित्य जीवनशैली का हिस्सा बना ले, तो इसके दूरगामी और अत्यंत शुभ परिणाम जीवन में प्रकट होने लगते हैं।

ये भी पढ़ें

अर्घ्य देने का सही पात्र और जरूरी पूजन सामग्री

शास्त्रों के अनुसार, सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने के लिए तांबे के लोटे का उपयोग सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है। तांबे के पात्र में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल रंग के पुष्प, कुमकुम और थोड़े अक्षत यानी चावल मिलाने चाहिए। इस पवित्र मिश्रण से सूर्य को जल चढ़ाने पर पूजा की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है और यह अर्घ्य पूर्ण रूप से फलदायी माना जाता है।

अर्घ्य के बाद जमीन पर गिरे जल को छूने का विशेष महत्व

अक्सर लोग जल अर्पित करने के बाद सीधे चले जाते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचना चाहिए। अर्घ्य अर्पण के पश्चात जो पवित्र जल जमीन पर गिरता है, उसे अपने दोनों हाथों की उंगलियों से छूकर अपने मस्तक, नेत्रों और शरीर पर स्पर्श कराना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से सूर्य की दिव्य ऊर्जा और तेज सीधे मानव शरीर में प्रविष्ट हो जाता है, जिससे तन और मन दोनों का कायाकल्प होता है।

प्राकृतिक डिटॉक्स और सकारात्मक ऊर्जा का संचार

सूर्य की किरणों से अभिमंत्रित यह जल शरीर के विभिन्न दोषों और विकारों को दूर करने की क्षमता रखता है। इसे शरीर पर लगाने से शारीरिक शुद्धि होती है, आंतरिक तनाव खत्म होता है और एक अनूठा प्राकृतिक डिटॉक्स प्रभाव देखने को मिलता है। इस जल का स्पर्श मन की चंचलता को शांत करता है, विचारों में स्थिरता लाता है और नकारात्मकता को पूरी तरह समाप्त कर देता है। नियमित रूप से इस विधि का पालन करने से स्वास्थ्य, धन और पारिवारिक सुख में निरंतर वृद्धि होती है।

सवाल-जवाब

सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए किस धातु का लोटा सबसे अच्छा माना जाता है?
सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए तांबे का लोटा सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।
सूर्य को जल चढ़ाते समय लोटे में कौन सी चीजें डालनी चाहिए?
तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, कुमकुम और थोड़ा सा चावल डालना चाहिए।
अर्घ्य देने के बाद जमीन पर गिरे जल का क्या करना चाहिए?
जमीन पर गिरे पवित्र जल को उंगलियों से छूकर अपने माथे और शरीर पर लगाना चाहिए।
नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली पर क्या प्रभाव पड़ता है?
प्रतिदिन अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है, जिससे स्वास्थ्य, खुशहाली और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp