ऑटोमोबाइल बाजार के आकार और रफ्तार के मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच जमीन-आसमान का फासला देखने को मिल रहा है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में गाड़ियां खरीदने की रफ्तार जहां बेहद सीमित दायरे में सिमटी हुई है, वहीं भारतीय बाजार में मांग का दायरा लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। हालिया आंकड़ों की तुलना करने पर यह हकीकत सामने आती है कि पाकिस्तान में पूरे महीने के दौरान जितने चार-पहिया वाहन बिकते हैं, भारत में लगभग उतनी या उससे भी अधिक पैसेंजर कारें आम दिनों में महज चौबीस घंटे के भीतर सड़क पर उतर जाती हैं।
पाकिस्तान में कैसा रहा ऑटोमोबाइल बिक्री का हाल
पाकिस्तान में कारों, वैन, जीप और पिकअप की कुल बिक्री अगस्त 2026 के दौरान 15,558 यूनिट्स दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है, लेकिन जुलाई 2026 की तुलना में इसमें 21 प्रतिशत की गिरावट आई है। अगर सिर्फ पैसेंजर कारों की बात करें, तो वहां 13,717 यूनिट्स की बिक्री हुई, जिसमें सालाना आधार पर 36.4 प्रतिशत का इजाफा देखा गया।
चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों के दौरान पाकिस्तान में पैसेंजर कारों का कुल आंकड़ा 30,933 यूनिट्स तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब 80 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद जानकारों का मानना है कि टैक्स ढांचे में स्पष्टता की कमी और नीतिगत अनिश्चितताओं के चलते मासिक आधार पर ऑटो बाजार की रफ्तार सुस्त बनी हुई है।
भारतीय ऑटो बाजार की जबरदस्त रफ्तार
इसके उलट भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की स्थिति बिल्कुल अलग स्तर पर नजर आती है। भारत सरकार द्वारा किफायती कारों पर जीएसटी की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद से घरेलू बाजार में मांग में भारी उछाल आया है। सितंबर 2026 के दौरान भारत में केवल पैसेंजर कारों की रिटेल बिक्री 4.27 लाख यूनिट्स से ज्यादा रही।
अगर इस मासिक आंकड़े को रोजाना के हिसाब से देखा जाए, तो भारत में हर रोज औसतन 14,000 से ज्यादा नई पैसेंजर कारें बिकती हैं। फेस्टिव सीजन के दौरान तो यह मांग कई गुना बढ़ जाती है और एक ही दिन में 51,000 यूनिट्स तक जा पहुंचती है। इसके अलावा जब दो-पहिया वाहनों और कमर्शियल गाड़ियों को भी शामिल कर लिया जाए, तब भारत में प्रतिदिन कुल मिलाकर 77,000 से अधिक वाहन खरीदे जाते हैं। यानी पाकिस्तान का पूरे महीने का कुल वाहन आंकड़ा भारत की एक सामान्य दिन की पैसेंजर कार बिक्री के आसपास ही टिकता है। यह अंतर दोनों देशों के औद्योगिक ढांचे, आम जनता की क्रय शक्ति और बाजार की गहराई को स्पष्ट करता है।
दोनों मुल्कों में कौन सी कारें पसंद कर रहे खरीदार
पाकिस्तान के घरेलू बाजार में सुजुकी की हिस्सेदारी सबसे मजबूत बनी हुई है। वहां सुजुकी अल्टो सबसे लोकप्रिय मॉडल रही, जिसकी कुल 5,339 यूनिट्स बिकीं, हालांकि मासिक आधार पर इसकी मांग में 26 प्रतिशत की कमी आई। इसके बाद टोयोटा की कोरोला, यारिस और क्रॉस को मिलाकर 3,079 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई, जबकि होंडा सिविक और सिटी की संयुक्त बिक्री 2,553 यूनिट्स रही। इस तरह वहां सुजुकी सबसे बड़ी कंपनी के तौर पर उभरी, जबकि इंडस मोटर्स (टोयोटा) और होंडा एटलस ने भी अपना प्रभाव बनाए रखा।
दूसरी तरफ भारतीय बाजार में सितंबर 2026 के दौरान मारुति फ्रॉन्क्स 19,282 यूनिट्स की बिक्री के साथ अव्वल मॉडल्स में शामिल रही, जो पाकिस्तान के पूरे महीने के कुल ऑटोमोबाइल वॉल्यूम से भी अधिक है। देश में मारुति सुजुकी का मार्केट शेयर लगभग 40 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है, जबकि टाटा और महिंद्रा जैसी घरेलू कंपनियां भी कड़ा मुकाबला पेश कर रही हैं। यह साफ दर्शाता है कि भारतीय ऑटो उद्योग न केवल भारी मात्रा में वाहन बेच रहा है, बल्कि स्थिरता और विविधता के मामले में भी काफी आगे है।



















