दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान नई गाड़ी घर लाने की तैयारी कर रहे खरीदारों के बीच प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट हमेशा से लोकप्रिय रहा है। इस सेगमेंट में मारुति बलेनो, टोयोटा ग्लैंजा और टाटा अल्ट्रोज तीन सबसे प्रमुख और मजबूत दावेदार बनकर सामने आते हैं। बजट के लिहाज से देखें तो बलेनो की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹5.99 लाख से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए ₹9.99 लाख तक जाती है। वहीं ग्लैंजा की कीमत ₹6.99 लाख से ₹10.98 लाख के दायरे में रखी गई है, जबकि अल्ट्रोज करीब ₹5.99 लाख से शुरू होकर ₹10.65 लाख तक पहुंचती है। ये तीनों ही चार मीटर से छोटी गाड़ियां हैं और ग्राहकों को पेट्रोल के साथ-साथ CNG ईंधन के विकल्प देती हैं। हालांकि, अल्ट्रोज उन खरीदारों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प भी लाती है जो लंबी दूरी के लिए डीजल इंजन पसंद करते हैं। ऐसे में माइलेज, केबिन आराम, आधुनिक तकनीकी खूबियों और सुरक्षा मानकों के आधार पर सही मॉडल चुनना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
एक्सटीरियर डिजाइन और बनावट में मुख्य अंतर
बलेनो और ग्लैंजा तकनीकी रूप से एक ही बुनियादी ढांचे पर तैयार की गई हैं, लेकिन हालिया बदलावों के बाद दोनों के सामने के हिस्से में साफ फर्क नजर आता है। बलेनो के फ्रंट में आधुनिक ग्रिल, चिकनी एलईडी लाइटिंग और साइड प्रोफाइल में एक स्लीक डिजाइन दिया गया है जो शहरी ड्राइविंग के अनुकूल दिखता है। दूसरी तरफ, ग्लैंजा में ज्यादा उभरी हुई चौड़ी ग्रिल, स्पोर्टी साइड स्कर्ट और आक्रामक स्टाइलिंग देखने को मिलती है, जिससे यह सड़क पर थोड़ा अलग अंदाज पेश करती है। इन दोनों के मुकाबले टाटा अल्ट्रोज का लुक पूरी तरह मस्कुलर और बोल्ड नजर आता है। अल्ट्रोज की तेज बॉडी कट्स, आकर्षक एलईडी डीआरएल, डुअल-टोन रूफ के विकल्प और बड़े अलॉय व्हील्स इसे काफी प्रीमियम और स्पोर्टी अपील देते हैं। अगर विजुअल प्रेजेंस की बात की जाए तो अल्ट्रोज सड़क पर सबसे अलग और तुरंत ध्यान खींचने वाली कार लगती है, जबकि बलेनो और ग्लैंजा व्यावहारिक और जानी-पहचानी डिजाइन भाषा को अपनाती हैं।
केबिन स्पेस, बूट क्षमता और आराम के फीचर्स
अंदरूनी जगह के मामले में तीनों ही गाड़ियां पर्याप्त स्पेस देती हैं, लेकिन आयामों में थोड़ा अंतर है। बलेनो और ग्लैंजा का व्हीलबेस 2520 मिमी रखा गया है, जो अल्ट्रोज के 2501 मिमी व्हीलबेस से थोड़ा सा लंबा है। इसका असर पीछे बैठने वाले यात्रियों के लेगरूम पर दिखाई देता है जहां बलेनो और ग्लैंजा काफी खुली महसूस होती हैं। दूसरी तरफ, सामान रखने की जगह यानी बूट स्पेस में अल्ट्रोज 345 लीटर के साथ इस तुलना में सबसे आगे निकल जाती है, जबकि बलेनो और ग्लैंजा में 318 लीटर का बूट स्पेस मिलता है। बलेनो और ग्लैंजा के केबिन में 9-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स (ऊंचे मॉडल्स में), हेड-अप डिस्प्ले और कूलिंग फंक्शन वाला वायरलेस फोन चार्जर मिलता है। अल्ट्रोज के अंदर 10.25-इंच की बड़ी टचस्क्रीन, पूरा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, चुनिंदा मॉडल्स में सनरूफ, पीछे के यात्रियों के लिए एसी वेंट्स और मजबूत बिल्ड क्वालिटी का अहसास मिलता है। फिनिशिंग और ठोस मैटेरियल के अनुभव में अल्ट्रोज थोड़ा भारी और टिकाऊ अहसास कराती है।
कनेक्टिविटी और आधुनिक ड्राइविंग सुविधाएं
तकनीक के मोर्चे पर बलेनो और ग्लैंजा दोनों में ही वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay की सुविधा दी गई है, जिससे मोबाइल फोन को सिस्टम से जोड़ना आसान हो जाता है। साथ ही इनमें 360-डिग्री कैमरा, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और कनेक्टेड कार फीचर्स दिए गए हैं। इन दोनों गाड़ियों के टॉप मॉडल्स में Level 2 ADAS सुरक्षा तकनीक भी शामिल की गई है, जिसमें एडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट और ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे ऑटोमैटिक ड्राइविंग सेफ्टी सिस्टम मिलते हैं। टाटा अल्ट्रोज भी तकनीकी रूप से काफी संपन्न है, जिसमें 360 कैमरा, वायरलेस चार्जर, इन-बिल्ट एयर प्यूरीफायर, सनरूफ और आधुनिक इंफोटेनमेंट सेटअप दिया गया है, लेकिन इसमें ADAS तकनीक की कमी है। ऐसे में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्ट फीचर्स चाहने वालों के लिए बलेनो और ग्लैंजा के टॉप ट्रिम्स एक कदम आगे नजर आते हैं।
क्रैश टेस्ट और सेफ्टी रेटिंग्स
सुरक्षा को लेकर तीनों ही निर्माता अब काफी सजग हैं और तीनों कारों में 6 एयरबैग्स को बेस मॉडल से ही स्टैंडर्ड तौर पर दिया गया है। बलेनो और ग्लैंजा में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP), हिल होल्ड कंट्रोल, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) और टॉप वेरिएंट्स में Level 2 ADAS की अतिरिक्त सुरक्षा परत मिलती है। हालांकि, क्रैश टेस्ट के आंकड़ों में टाटा अल्ट्रोज का पलड़ा सबसे भारी रहता है। अल्ट्रोज को भारत NCAP की तरफ से 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली हुई है, जिसमें वयस्क और बच्चों दोनों की सुरक्षा के लिए उच्च स्कोर दर्ज किया गया है। भारी और मजबूत बॉडी पैनल के कारण क्रैश टेस्ट के वास्तविक नतीजों में अल्ट्रोज को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है, जबकि बलेनो और ग्लैंजा भी आधुनिक एक्टिव व पैसिव फीचर्स के साथ पर्याप्त बचाव उपलब्ध कराती हैं।
इंजन विकल्प, पावर और माइलेज का गणित
इंजन के मामले में बलेनो और ग्लैंजा में नया 1.2-लीटर 3-सिलेंडर Z12E पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है। यह इंजन करीब 83 ब्रेक हॉर्सपावर और 112 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए इसमें 5-स्पीड मैनुअल और ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) का विकल्प मिलता है। इसके CNG मॉडल में इंजन करीब 70 ब्रेक हॉर्सपावर देता है। माइलेज के आधिकारिक एआरएआई आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल मैनुअल में यह 23.80 किमी/ली और एएमटी में 24.77 किमी/ली की प्रभावशाली दक्षता देती है, जबकि CNG पर यह 33.61 किमी/किग्रा तक का शानदार माइलेज निकालती है। दूसरी ओर, अल्ट्रोज कई तरह के पावरट्रेन विकल्प देती है। इसमें 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन मिलता है जो लगभग 87-88 ब्रेक हॉर्सपावर और 115 Nm टॉर्क बनाता है, साथ ही एक 1.5-लीटर डीजल इंजन भी है जो करीब 90 ब्रेक हॉर्सपावर और 200 Nm का मजबूत टॉर्क देता है, इसके अलावा CNG विकल्प भी मौजूद है। पेट्रोल में अल्ट्रोज करीब 19.3 किमी/ली और डीजल में 23.6 किमी/ली का माइलेज देती है। कम रनिंग कॉस्ट और फ्यूल एफिशिएंसी में बलेनो-ग्लैंजा आगे हैं, जबकि अल्ट्रोज इंजन की विविधता में बेहतर है।
खरीदारी का फैसला: आपके लिए कौन सी हैचबैक सबसे बेहतर
त्योहारी सीजन में चुनाव पूरी तरह आपकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। अगर आपकी प्राथमिकता रोजमर्रा की बेहद कम रनिंग कॉस्ट, शानदार माइलेज, आसानी से मिलने वाले पार्ट्स, आधुनिक फीचर्स और पैसे की पूरी वैल्यू पाना है, तो मारुति बलेनो सबसे संतुलित चुनाव बनती है। यदि आप वही खूबियां चाहते हैं लेकिन टोयोटा के लंबे भरोसे और सर्विस नेटवर्क को तरजीह देते हैं, तो ग्लैंजा बेहतर फैसला साबित होगी। इसके उलट, अगर आपकी पहली प्राथमिकता 5-स्टार सुरक्षा, मजबूत बिल्ड क्वालिटी, सनरूफ और हाईवे के लिए टॉर्की डीजल इंजन है, तो टाटा अल्ट्रोज सबसे सही विकल्प है। शोरूम जाकर अपनी जरूरत के हिसाब से टेस्ट ड्राइव लेकर ही अंतिम निर्णय लें।



















