पंजाब के राजनीतिक गलियारों में मची उथल-पुथल के बीच कांग्रेस नेता उदित राज ने आम आदमी पार्टी पर कड़ा प्रहार किया है। पड़ोसी राज्य में विधायकों के इस्तीफे के बाद पैदा हुई स्थिति पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के आंतरिक ढांचे में दरारें अब खुलकर सतह पर आ चुकी हैं। उनके मुताबिक संगठन के अंदर असंतोष की ज्वाला काफी समय से सुलग रही थी, जो अब इस्तीफों की शक्ल में दिखाई देने लगी है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आने वाले समय में पार्टी के कई अन्य प्रमुख चेहरे भी किनारा कर सकते हैं।
पंजाब प्रशासन पर दिल्ली के नियंत्रण का आरोप
उदित राज ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रशासनिक क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य के प्रशासनिक फैसलों में स्थानीय मुख्यमंत्री का कोई वास्तविक प्रभाव नहीं दिखता। उनके अनुसार राज्य की नीतियां और प्रमुख निर्णय चंडीगढ़ के बजाय दिल्ली में मौजूद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा तय किए जाते हैं।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पंजाब का शासन अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और उनकी करीबी मंडली के इशारों पर संचालित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री के पास अधिकार सीमित हैं और वे केवल मुखौटा बनकर रह गए हैं। उदित राज ने मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत आचरण पर भी आक्षेप लगाए और कहा कि पंजाब की जनता ने जिस बदलाव की उम्मीद में जनादेश दिया था, उसके उलट सत्ता की डोर दिल्ली के हाथों में सौंप दी गई है।
विधायकों की नाराजगी और संभावित इस्तीफे
विधायकों के इस्तीफों से जुड़े सवालों का उत्तर देते हुए उदित राज ने पुरानी घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब पार्टी सांसदों ने संसद से वॉकआउट किया था, उस समय भी करीब 40 से 45 विधायक अलग राह चुनने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन जनप्रतिनिधियों को पार्टी नेतृत्व से इतनी गंभीर शिकायतें थीं, तो वे इतने लंबे समय तक खामोशी से संगठन में क्यों बने रहे।
कांग्रेस नेता ने कहा,
“पार्टी के भीतर बगावत तो होनी ही थी और अब यह शुरू हो गई है।”
उनका मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में पार्टी के कई अन्य नेता भी अपने पदों से त्यागपत्र दे सकते हैं, क्योंकि आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं का धैर्य जवाब दे चुका है।
राजधानी की वायु गुणवत्ता और प्रशासनिक विफलता
पंजाब के सियासी संकट के साथ-साथ उदित राज ने देश की राजधानी में बिगड़ते पर्यावरण संकट पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों के दौरान पार्टी अपनी जिम्मेदारियों से बचती रही है। पहले कभी दिल्ली सरकार तो कभी नगर निगम को दोषी ठहराकर जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया जाता था।
उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान में केंद्र की सत्ता, दिल्ली प्रशासन और नगर निगम तीनों ही स्तरों पर एक ही दल का नियंत्रण है। इसके बावजूद दिल्लीवासियों को साफ हवा मुहैया कराने के लिए कोई ठोस और कारगर कदम नहीं उठाए जा सके हैं। उन्होंने कहा कि ठंड का मौसम पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है।
समस्या समाधान की क्षमता पर सवाल
उदित राज ने राहुल गांधी के बयानों का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल वास्तविक समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल बयानबाजी और दिखावे की राजनीति पर निर्भर रहता है। उन्होंने कहा कि जनता बुनियादी संकटों से जूझ रही है और जिम्मेदार तंत्र केवल वादों तक सीमित है।
इसी संदर्भ में बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को दिल्ली की सत्ता संभालने का अवसर प्रदान किया जाए, तो वह 24, 48 या 72 घंटों की तय समयसीमा में प्रदूषण के संकट को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करके दिखा सकती है। उनके अनुसार प्रदूषण की रोकथाम के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और ठोस प्रशासनिक दृष्टिकोण की जरूरत है, जिसकी मौजूदा व्यवस्था में भारी कमी दिखाई देती है।


















