उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में स्थित बागेश्वर शहर का संपूर्ण भौगोलिक स्वरूप और प्राकृतिक छटा निहारने के लिए कलेक्ट्रेट यानी डीएम कोर्ट परिसर एक प्रमुख दृष्टिकोण के रूप में उभरा है। अत्यधिक ऊंचाई पर अवस्थित होने के चलते इस परिसर से समूची घाटी का विहंगम दृश्य एक ही नजर में सामने आ जाता है। यहां खड़े होकर जब कोई नीचे देखता है, तो घाटी में फैले रिहायशी मकान, चहल-पहल से भरे बाजार, घुमावदार सड़कें और शहर को चारों तरफ से घेरे हुए पर्वतमालाएं एक साथ दृष्टिगोचर होती हैं। अनुकूल और साफ मौसम के दौरान शहर का फैलाव तथा आसपास का नैसर्गिक वातावरण अत्यंत मनमोहक प्रतीत होता है, जिसके चलते यहां पहुंचने वाले आगंतुक कुछ पलों के लिए ठहरकर इस अनुपम सौंदर्य को अपनी आंखों में समेटने लगते हैं।
सरयू और गोमती का पावन संगम
स्थानीय जानकार सुनीता टम्टा बताती हैं कि बागेश्वर की मूल पहचान और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सरयू तथा गोमती नदियों के पवित्र संगम से गहराई से जुड़ी है। डीएम कोर्ट की ऊंचाई से घाटी की तरफ नजर दौड़ाने पर दोनों पावन नदियों के परस्पर मिलन का क्षेत्र अत्यंत स्पष्ट और भव्य रूप में दिखाई देता है। हरी-भरी पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य से कलकल करती बहती ये नदियां बागेश्वर के नैसर्गिक आकर्षण को कई गुना बढ़ा देती हैं। ऊंचाई से इन नदियों के किनारों पर निर्मित पक्के घाट और उनके इर्द-गिर्द बने आवास साफ देखे जा सकते हैं। शांत और सुहावने मौसम में पर्वतीय घाटी के बीच नदियों का यह निर्मल प्रवाह स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूरदराज से आने वाले सैलानियों के मन को गहराई से छू लेता है।
शिखर से बागनाथ मंदिर का भव्य रूप
बागेश्वर का प्राचीन एवं ऐतिहासिक बागनाथ मंदिर समूचे क्षेत्र के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में गिना जाता है। सरयू और गोमती नदियों के पावन संगम स्थल के बिल्कुल समीप स्थापित यह पवित्र देवालय देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित है। जब कलेक्ट्रेट की ऊंचाई से नीचे शहर की ओर देखा जाता है, तो बागनाथ मंदिर परिसर की वास्तुकला और उसका धार्मिक परिवेश घाटी के बीच अत्यंत सुशोभित नजर आता है। आस्था के इस महान केंद्र का विहंगम नजारा भक्तों और पर्यटकों को एक अद्भुत शांति की अनुभूति कराता है।
नीलेश्वर और भीलेश्वर पहाड़ियों का सुरक्षा घेरा
बागेश्वर नगर के दोनों ओर प्राकृतिक रक्षक की भांति खड़ी नीलेश्वर और भीलेश्वर की पहाड़ियां यहां के प्राकृतिक परिवेश को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। डीएम कोर्ट के विस्तृत परिसर से इन दोनों प्रमुख पहाड़ियों का दृश्य शहर की अद्भुत भौगोलिक संरचना को बखूबी उजागर करता है। पर्वत श्रृंखलाओं पर फैली सघन हरियाली, विविध प्रकार के पेड़-पौधे और ऋतु चक्र के साथ बदलते प्राकृतिक रंग दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। नगर के मध्य भाग से प्रवाहित होती नदियां और चारों ओर से आच्छादित पहाड़ियों का यह मेल बागेश्वर को उत्तराखंड के अन्य पर्वतीय नगरों की तुलना में एकदम अनूठा और विशिष्ट रूप देता है।
घाटी की अनूठी बसावट और छायांकन का आकर्षण
ऊंचाई से नीचे झांकने पर बागेश्वर की बसावट और वास्तुकला का रूप बेहद आकर्षक दिखाई देता है। पर्वतीय ढलानों और घाटी के समतल भाग में बने बहुरंगी मकान, स्थानीय व्यापारिक केंद्र तथा आपस में जुड़ी बस्तियां नगर के सांस्कृतिक स्वरूप को बयां करती हैं। खड़ी ढलानों पर बने घर और उनके बीच से सर्पिलाकार गुजरते मार्ग आंखों को सुखद अनुभव कराते हैं। स्वच्छ आकाश और खिली धूप के दौरान दूर-दूर तक फैली बस्तियां तथा पर्वत शिखर छायांकन यानी फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए अत्यंत मुफीद पृष्ठभूमि तैयार करते हैं।
पुल, सड़कें और घुमावदार रास्तों का जाल
बागेश्वर की जटिल भौगोलिक बनावट यहां के दृश्यों को अन्य स्थानों से काफी अलग बनाती है। सरयू और गोमती नदियों के आर-पार बने संपर्क पुल, जलधारा के समानांतर चलती सड़कें और पर्वतीय चढ़ाई वाले घुमावदार संपर्क मार्ग डीएम कोर्ट से देखने पर किसी सजीव मानचित्र की तरह दिखाई देते हैं। इस ऊंचाई से शहर की पूरी आवागमन व्यवस्था और विभिन्न मुहल्लों को जोड़ने वाले रास्तों का अवलोकन सहजता से किया जा सकता है। नदियों के ऊपर स्थापित पुल न केवल स्थानीय आवाजाही को सुगम बनाते हैं, बल्कि शहर के समग्र परिदृश्य के सौंदर्य में भी चार चांद लगाते हैं।
प्रात:काल और सायंकालीन छटा का जादू
डीएम कोर्ट से नगर का सौंदर्य दिन के दो विशिष्ट प्रहरों, सुबह और शाम के समय सबसे अधिक निखर कर सामने आता है। प्रात:काल जब सूर्य की कोमल किरणें घाटी में उतरती हैं, तो पर्वतों और घाटी के मकानों पर एक स्वर्णिम आभा बिखर जाती है। वहीं संध्या काल में अस्ताचलगामी सूर्य की किरणें जब पहाड़ियों के शिखरों पर पड़ती हैं, तो समूचे क्षेत्र में धूप और छांव का अनूठा सम्मोहन पैदा होता है। सूर्यास्त के पश्चात जैसे ही नगर के मकानों और गलियों में बिजली के बल्ब जलते हैं, पूरी घाटी दीपों की जगमगाती माला जैसी प्रतीत होने लगती है। बागेश्वर आने वाले प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह स्थान संपूर्ण नगर का एक साथ दीदार करने का सबसे बेहतरीन केंद्र बन चुका है।



















