उत्तर प्रदेश के कमर्शियल वाहन चालकों के लिए राज्य सरकार ने एक नई परिवहन व्यवस्था जमीन पर उतार दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राज्य में भारत टैक्सी सेवा का विधिवत शुभारंभ किया। इस योजना के दायरे में ऑटो रिक्शा, कैब और बाइक टैक्सी चालकों को शामिल किया गया है। प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले सभी चालकों को अपनी कमाई पर कोई कमीशन नहीं देना होगा, साथ ही उन्हें 5 लाख रुपये तक का सामाजिक सुरक्षा कवर भी प्रदान किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य वाहन चालकों को आर्थिक सुरक्षा देना और उनके काम करने के माहौल को बेहतर बनाना है।
चार प्रमुख शहरों से शुरुआत और संस्थागत तालमेल
प्रारंभिक चरण में भारत टैक्सी का नेटवर्क राजधानी लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में सक्रिय किया गया है। यात्रियों को सुगम कनेक्टिविटी देने के लिए कई प्रमुख प्रशासनिक और परिवहन निकायों के साथ रणनीतिक समझौते किए गए हैं। इनमें लखनऊ मेट्रो, लखनऊ पुलिस और अमौसी एयरपोर्ट जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन साझेदारियों से रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और प्रमुख केंद्रों से शहर के भीतरी हिस्सों तक आवागमन काफी सुगम होने की उम्मीद जताई गई है।
जीरो कमीशन मॉडल और चालकों को सामाजिक भरोसा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि परंपरागत रूप से दोपहिया और तिपहिया चालकों के लिए इस प्रकार की कल्याणकारी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। शून्य कमीशन व्यवस्था लागू होने से चालकों की पूरी मेहनत का लाभ सीधे उनकी जेब में जाएगा। सामाजिक सुरक्षा के प्रभाव को रेखांकित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, "जब किसी ड्राइवर को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है, तो उसके मन में सुरक्षा और शांति का भाव आता है।" उन्होंने जोर दिया कि भविष्य के प्रति निश्चिंत होकर चालक अधिक समर्पण और जवाबदेही के साथ नागरिकों को सेवाएं दे सकेंगे।
महाकुंभ के अनुभव और ट्रैफिक प्रबंधन का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के सफल परिवहन मॉडल की चर्चा करते हुए बाइक सेवाओं की उपयोगिता बताई। उन्होंने याद दिलाया कि उस विशाल आयोजन में स्थानीय युवाओं ने दोपहिया वाहनों से लाखों तीर्थयात्रियों को संगम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों से संगम तक त्वरित आवाजाही सुनिश्चित होने से शहर की मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का अतिरिक्त दबाव नहीं बना था।
ग्रामीण अंचलों में विस्तार और रोजगार के नए अवसर
समारोह में मुख्यमंत्री ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को इस सफल रूपरेखा को ग्रामीण बस नेटवर्क में भी लागू करने के निर्देश दिए। उनका आकलन है कि अगर यही व्यवस्था ग्रामीण परिवहन में उतारी गई, तो सुदूर इलाकों के युवाओं को स्वरोजगार के व्यापक साधन मिलेंगे। इस पहल के जरिए सरकार शहरी यातायात को संगठित करने के साथ-साथ ड्राइवरों के जीवन स्तर को सुरक्षित करने का दोहरा लक्ष्य साध रही है, जिसका विस्तार भविष्य में अन्य जनपदों में भी किया जाएगा।


















