हर साल दिवाली और छठ पूजा के दौरान दिल्ली से उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले रेल यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। लंबी दूरी, कई घंटों का थकाऊ सफर और कन्फर्म सीट न मिलना आम लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बनी रहती है। यात्रियों की इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए भारतीय रेलवे ने एक महत्वकांक्षी योजना तैयार की है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार से जोड़ने वाले प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की विस्तृत रूपरेखा पेश की है, जिससे आने वाले समय में अंतरराज्यीय सफर की पूरी तस्वीर बदलने वाली है।
प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर और यात्रा का अनुमानित समय
रेल मंत्रालय की इस योजना के साकार होने पर देश की राजधानी दिल्ली से उत्तर प्रदेश और बिहार के बड़े व्यावसायिक व सांस्कृतिक केंद्रों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। इस हाई-स्पीड नेटवर्क की रफ्तार इतनी अधिक होगी कि दिल्ली से 200 किलोमीटर दूर आगरा पहुंचने में केवल 58 मिनट का समय लगेगा। इसी तरह दिल्ली से 455 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कानपुर का सफर 1 घंटे 45 मिनट और 525 किलोमीटर दूर स्थित लखनऊ का सफर मात्र 2 घंटे 12 मिनट में तय किया जा सकेगा। इससे उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख औद्योगिक व प्रशासनिक शहरों के बीच रोजाना की आवाजाही को भी नया आयाम मिलेगा।
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के महत्वपूर्ण शहरों के लिए भी यात्रा समय में व्यापक कटौती का खाका तैयार किया गया है। प्रस्तावित रूट मैप के अनुसार दिल्ली से 750 किलोमीटर दूर स्थित प्रयागराज की दूरी लगभग 3 घंटे में पूरी होगी, जबकि 950 किलोमीटर दूर वाराणसी पहुंचने में करीब 3 घंटे 30 मिनट का समय लगेगा। वहीं दिल्ली से 1,170 किलोमीटर दूर स्थित बिहार की राजधानी पटना का सफर सिर्फ 4 घंटे 30 मिनट में तय किया जा सकेगा। वर्तमान समय में सामान्य एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों से दिल्ली से पटना की इतनी ही दूरी तय करने में कम से कम 12 घंटे या उससे भी अधिक समय लग जाता है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर और वंदे भारत से तुलना
भारतीय रेलवे इस परियोजना को देश में उच्च गति वाली रेल सेवाओं के विस्तार के लिए एक निर्णायक कदम मान रही है। वर्तमान में गुजरात और महाराष्ट्र के बीच मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑपरेटिंग स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। मौजूदा सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों जैसे वंदे भारत की तुलना में बुलेट ट्रेन की रफ्तार काफी अधिक होती है, जिससे यह तकनीक लंबी दूरी की यात्रा को घंटों के बजाय मिनटों में बदलने की क्षमता रखती है।
पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
दिल्ली-यूपी-बिहार हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय में भारी बचत कराएगा, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे ऐतिहासिक तथा आर्थिक केंद्रों के बीच बुलेट ट्रेन सेवा शुरू होने से पर्यटन, स्थानीय व्यवसाय और रोजगार के अवसरों को नई गति मिलेगी। त्योहारों के मौसम में घर जाने वाले प्रवासियों को भी घंटों लंबी ट्रेन यात्रा और अनिश्चितता से राहत मिल सकेगी।



















