झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को लेकर धनबाद जिले के ग्रामीण इलाके में लाभार्थियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बाघमारा प्रखंड अंतर्गत बौआकला उत्तर पंचायत में हाल ही में संपन्न हुए भौतिक सत्यापन के बाद दर्जनों योग्य महिलाओं के नाम अचानक लाभार्थी सूची से गायब कर दिए गए हैं। योजना की किस्त बंद होने और आधिकारिक सूची से नाम काटे जाने के कारण पीड़ित महिलाएं पिछले तीन हफ्तों से लगातार पंचायत सचिवालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हालांकि, बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उनकी समस्या का कोई प्रशासनिक समाधान नहीं निकल सका है।
भौतिक सत्यापन के बाद अचानक कटी सूची
ग्रामीण महिलाओं का दावा है कि वे योजना की शुरुआत से ही नियमित रूप से इसका लाभ प्राप्त कर रही थीं और सभी आवश्यक पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं। हाल के दिनों में प्रशासनिक स्तर पर चलाए गए भौतिक सत्यापन अभियान के बाद उन्हें सूचित किया गया कि उनका नाम अब इस योजना के पोर्टल या सूची में दर्ज नहीं है। इस फैसले से स्तब्ध दर्जनों की संख्या में महिलाएं गोलबंद होकर अपनी शिकायत दर्ज कराने पंचायत सचिवालय पहुंचीं। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि बिना किसी पूर्व सूचना अथवा स्पष्ट कारण बताए उनका नाम हटाया गया है, जिससे उनके मासिक वित्तीय सहयोग पर सीधा असर पड़ा है।
तीन सप्ताह से दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर
पीड़ित महिलाओं में शामिल वर्षा रवानी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे पिछले तीन हफ्तों से लगातार पंचायत कार्यालय के चक्कर काट रही हैं लेकिन अधिकारियों की तरफ से कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिल रहा है। वर्षा रवानी का कहना है कि वे सभी निर्धारित मानकों पर खरी उतरती हैं और पहले भी उन्हें इस वित्तीय सहायता का लाभ निर्बाध रूप से मिल रहा था। उन्होंने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करे और सत्यापन प्रक्रिया में हुई किसी भी तरह की लिपिकीय या तकनीकी त्रुटि की जांच कराकर योग्य महिलाओं के नाम पुनः सूची में शामिल करे।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बौआकला उत्तर पंचायत के पूर्व मुखिया प्रतिनिधि लक्ष्मीकांत रजक ने महिलाओं के समर्थन में आते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। लक्ष्मीकांत रजक ने प्रशासनिक अधिकारियों से आग्रह किया है कि भौतिक सत्यापन के दौरान हुई गड़बड़ियों की समीक्षा की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसी पात्र महिला का नाम मानवीय भूल या गलत रिपोर्ट की वजह से काटा गया है, तो उसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए ताकि जरूरतमंद महिलाओं को योजना का वित्तीय लाभ फिर से मिल सके।
महिलाओं में गहराता असंतोष और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
योजना से अचानक वंचित किए जाने के कारण बौआकला उत्तर पंचायत की महिलाओं के बीच भारी असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली यह सम्मान राशि उनके दैनिक आर्थिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और बिना किसी वैध आधार के लाभ रोकना अन्यायपूर्ण है। फिलहाल, सभी पीड़ित महिलाओं ने जिला प्रशासन से पारदर्शी जांच की उम्मीद जताई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और सत्यापन में गड़बड़ी के शिकार हुए पात्र लाभुकों को कब तक न्याय मिल पाता है।



















