डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करोड़ों अंशधारकों को अपनी जमा राशि और व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रखने के लिए अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। आज पीएफ निकासी, पासबुक देखने और यूएएन अपडेट जैसी अधिकांश सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। हालांकि, इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी ईपीएफओ जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटों, एसएमएस और ईमेल के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। धोखाधड़ी करने वाले जालसाज यूएएन, आधार, बैंक विवरण और ओटीपी जैसी अत्यंत संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश कर रहे हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए ईपीएफओ ने अपने सभी सदस्यों के लिए विस्तृत सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं।
साइबर जालसाज कैसे बनाते हैं शिकार
साइबर अपराधी अक्सर आधिकारिक ईपीएफओ पोर्टल से मिलते-जुलते डोमेन नाम बनाकर नकली वेबसाइट तैयार करते हैं। इन वेबसाइटों का लुक और लेआउट बिल्कुल असली जैसा दिखाई देता है, जिससे सामान्य उपभोक्ता भ्रमित हो जाते हैं। इसके बाद लोगों को एसएमएस, ईमेल या सोशल मीडिया संदेशों में एक फर्जी लिंक भेजा जाता है, जिसमें पीएफ क्लेम पास होने, खाते में ब्याज जुड़ने या केवाईसी अपडेट करने का झांसा दिया जाता है। जैसे ही उपभोक्ता उस लिंक पर क्लिक करके अपना UAN, आधार या बैंक खाता संख्या दर्ज करता है, उसकी सारी जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है। ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि संस्था कभी भी फोन कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप या ईमेल के माध्यम से अपने अंशधारकों से ओटीपी, पासवर्ड या कोई भी व्यक्तिगत गोपनीय डेटा नहीं मांगती है।
यूएएन और आधार को सुरक्षित रखने के 6 सुनहरे नियम
अपने भविष्य निधि खाते और बैंक बैलेंस को सुरक्षित रखने के लिए ईपीएफओ ने 6 महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों का पालन करने का सुझाव दिया है
- केवल आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें: पीएफ से जुड़े किसी भी कार्य के लिए हमेशा ईपीएफओ के आधिकारिक पोर्टल का ही प्रयोग करें। सर्च इंजन के विज्ञापनों या किसी अनजान स्रोत से मिले लिंक पर क्लिक करके लॉगिन करने से बचें।
- अनजान और संदिग्ध लिंक से दूर रहें: आपके फोन पर आए किसी भी अनवेरिफाइड लिंक, मैसेज या ईमेल अटैचमेंट को खोलने से बचें। किसी भी लुभावने या डराने वाले संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें।
- गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें: अपना UAN, PPO नंबर, पासवर्ड, आधार विवरण, PAN, बैंक खाता संख्या और OTP कभी भी किसी तीसरे व्यक्ति या असुरक्षित वेबसाइट पर दर्ज न करें।
- वेबसाइट के URL की जांच करें: लॉगिन पेज खोलने से पहले वेब एड्रेस की स्पेलिंग को ध्यान से देखें। फर्जी वेबसाइटों के यूआरएल में अक्सर नाम की वर्तनी में मामूली फेरबदल या अलग डोमेन एक्सटेंशन होता है।
- संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आपको कोई फर्जी वेबसाइट, फिशिंग लिंक या संदेहास्पद मैसेज दिखाई देता है, तो उसकी शिकायत ईपीएफओ के हेल्पलाइन डेस्क या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग चैनल पर करें।
- फर्जी कॉल्स से सावधान रहें: खुद को ईपीएफओ का अधिकारी बताकर फोन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर विश्वास न करें। यदि कोई व्यक्ति फोन पर आपसे ओटीपी या पासवर्ड मांगता है, तो जानकारी देने के बजाय तुरंत कॉल काट दें।
एक लापरवाही से खाली हो सकता है बैंक खाता
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अनधिकृत लिंक पर क्लिक करना और उसमें अपनी वित्तीय जानकारी भरना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। एक बार यूएएन, आधार और बैंकिंग क्रेडेंशियल लीक हो जाने पर अपराधी आपके बैंक खाते से पैसे निकाल सकते हैं या आपके नाम पर अवैध लेन-देन कर सकते हैं। ईपीएफओ ने अपने आधिकारिक X पोस्ट के जरिए सभी सदस्यों को सलाह दी है कि वे किसी भी संदेश पर भरोसा करने के बजाय स्वयं आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ही अपनी सेवाओं का लाभ उठाएं और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें।



















