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पीएम कुसुम योजना से फिरोजाबाद के किसान ने बदला सिंचाई का तरीका, 75 प्रतिशत सब्सिडी पर लगाया सोलर पंपबेनिफिट्स
15 अग॰ 2026, 2:01 pm (29 दिन पहले)· 0

पीएम कुसुम योजना से फिरोजाबाद के किसान ने बदला सिंचाई का तरीका, 75 प्रतिशत सब्सिडी पर लगाया सोलर पंप

फिरोजाबाद के गांव नगला राधे के किसान लोकेश कुमार ने कृषि विभाग की सहायता से 5 एचपी का सोलर पंप स्थापित किया है। 75 प्रतिशत अनुदान मिलने से बिजली की किल्लत समाप्त हो गई है।

गांवों में फसलों की सिंचाई के समय अनिश्चित बिजली आपूर्ति किसानों के लिए लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले स्थित नगला राधे गांव में रहने वाले प्रगतिशील किसान लोकेश कुमार ने इस समस्या का स्थायी समाधान खोज निकाला है। खेतों की सिंचाई के लिए पारंपरिक ट्यूबवेल और डीजल इंजनों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने सौर ऊर्जा का रास्ता चुना। कृषि विभाग द्वारा संचालित पीएम कुसुम योजना की मदद लेकर लोकेश कुमार ने अपने खेत में सोलर पंप स्थापित किया है, जिससे उनकी खेती की लागत कम हुई है और समय की भारी बचत हो रही है।

अनिश्चित बिजली से मुक्ति और आसान सिंचाई

सोलर पंप लगाने से पहले लोकेश कुमार को फसलों में पानी देने के लिए दिन-रात बिजली का इंतजार करना पड़ता था। कभी दोपहर की कड़क धूप में तो कभी रात के समय खेत पर जागकर नलकूप चलने की प्रतीक्षा करनी होती थी। बिजली कटौती और लो-वोल्टेज के कारण फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाता था। जब उन्हें कृषि विभाग के माध्यम से पीएम कुसुम योजना की जानकारी मिली, तब उन्होंने तुरंत विभागीय प्रक्रिया पूरी करके 5 एचपी क्षमता वाले सोलर पंप के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। पंप चालू होने के बाद से अब दिन के उजाले में ही बिना किसी रुकावट के पूरे खेत की सिंचाई आसानी से पूरी हो जाती है।

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75 प्रतिशत अनुदान से घटा वित्तीय बोझ

खेत में 5 एचपी क्षमता का सोलर पंप स्थापित करने में कुल 5 लाख रुपये का खर्च आता है। हालांकि, सरकारी प्रोत्साहन नीति के तहत कृषि विभाग किसानों को इस पर 75 प्रतिशत तक की बड़ी सब्सिडी प्रदान करता है। इस अनुदान के कारण लोकेश कुमार को अपनी जेब से केवल 1 लाख 25 हजार रुपये का ही निवेश करना पड़ा। इस सफल पहल और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया है।

डार्क जोन और छोटे किसानों के लिए कारगर

यह सौर पंप तकनीक उन क्षेत्रों के लिए एक वरदान साबित हो रही है जिन्हें भूजल संकट के कारण डार्क जोन घोषित किया गया है और जहां नए नलकूप लगाने पर कानूनी पाबंदी है। इसके अलावा दो बीघा या पांच बीघा जैसी छोटी जोत पर सब्जी, फल अथवा बागवानी करने वाले छोटे किसान भी इसे आसानी से स्थापित करवा सकते हैं। इस प्रणाली में न तो बिजली के खुले तारों के टूटने या दुर्घटना का जोखिम रहता है और न ही महंगे रखरखाव की आवश्यकता होती है। यदि किसी कारणवश तकनीकी खराबी आती भी है, तो किसान टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके तुरंत बाद विभागीय इंजीनियर मौके पर पहुंचकर पंप को नि:शुल्क दुरुस्त कर देता है।

समावेशी खेती और स्प्रिंकलर से जल संरक्षण

लोकेश कुमार अपने खेतों में समावेशी खेती का मॉडल अपना रहे हैं, जिसके तहत वे खाद्यान्न के साथ-साथ विविध प्रकार की सब्जियों और फूलों की खेती करते हैं। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने सोलर पंप के साथ उद्यान विभाग के सौजन्य से स्प्रिंकलर सिस्टम भी जोड़ा है। इससे पानी की खपत में भारी कमी आई है और प्रत्येक पौधे को जरूरत के अनुसार पानी मिल रहा है। उनकी इस सफलता को देखकर आसपास के अन्य ग्रामीण किसान भी जागरूक हुए हैं और पीएम कुसुम योजना के तहत आवेदन करके बिजली पर अपनी निर्भरता समाप्त कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप पर कितना अनुदान मिलता है?
कृषि विभाग की पीएम कुसुम योजना के तहत पात्र किसानों को सोलर पंप की कुल लागत पर 75 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है।
फिरोजाबाद में 5 एचपी सोलर पंप लगाने में किसान का कितना खर्च आया?
5 एचपी सोलर पंप की कुल लागत 5 लाख रुपये है, जिसमें 75 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी के बाद किसान लोकेश कुमार को केवल 1 लाख 25 हजार रुपये देने पड़े।
क्या डार्क जोन वाले क्षेत्रों में सोलर पंप लगाया जा सकता है?
हां, जिन स्थानों पर नए नलकूप लगाने पर प्रतिबंध है या डार्क जोन घोषित हैं, वहां भी पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगाए जा सकते हैं।
सोलर पंप खराब होने पर मरम्मत की क्या व्यवस्था है?
सोलर पंप में किसी खराबी की स्थिति में किसान दिए गए टोल-फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं, जिसके बाद सेवा इंजीनियर आकर नि:शुल्क सुधार करता है।
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