बिहार के गोपालगंज जिले से आजीविका कमाने विदेश गए एक भारतीय कामगार की अफ्रीकी देश अंगोला में संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई. गोपालगंज नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत भितभेरवा गांव के वार्ड नंबर 14 निवासी 40 वर्षीय सुनेश राम की मौत की खबर जब उनके पैतृक गांव पहुंची, तो वहां कोहराम मच गया. इस अप्रत्याशित आघात के बीच पीड़ित परिजनों के सामने एक और गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है. परिवार का कहना है कि सुनेश राम का पार्थिव शरीर भारत भेजने के बदले संबंधित कंपनी के एजेंट की ओर से 8 लाख रुपये की भारी भरकम मांग रखी जा रही है, जिसे चुका पाने में वे पूरी तरह असमर्थ हैं.
अहमदाबाद में नौकरी से अंगोला रवानगी तक का घटनाक्रम
मृतक के भाई राजेश राम के अनुसार, सुनेश राम करीब पांच महीने पहले बेहतर रोजगार और परिवार के भरण-पोषण के लिए अहमदाबाद गए थे. वहां उन्होंने टॉप इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड में वेल्डर के पद पर काम पाने के लिए एजेंट राजेश पटेल के जरिए एक साक्षात्कार दिया था. चयन होने के उपरांत उन्होंने कंपनी में तकरीबन दो महीने तक काम किया. इसके बाद नियोक्ता कंपनी ने उनके काम के सिलसिले में उन्हें पश्चिमी अफ्रीकी देश अंगोला स्थानांतरित कर दिया था, जहां वे औद्योगिक कार्य कर रहे थे.
इलाज के अभाव का आरोप और शुक्रवार को मौत
सुनेश राम की मां लाखपति देवी ने बताया कि अंगोला में काम के दौरान ही सुनेश का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया था. परिजनों का सीधा आरोप है कि वहां उन्हें समय रहते उचित एवं समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई. गंभीर बीमारी की स्थिति में बिना पर्याप्त इलाज के शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया. हालांकि, उनकी मृत्यु के वास्तविक चिकित्सकीय कारणों की अब तक कोई स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. इस सूचना के बाद से गांव में उनके बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
पार्थिव शरीर लाने के लिए 8 लाख रुपये की मांग से गहराया संकट
परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुनेश राम के पार्थिव शरीर को अफ्रीकी महाद्वीप से भारत लाकर हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम विदाई देने की है. मृतक के भाई राजेश राम ने आरोप लगाया है कि कंपनी के स्थानीय एजेंट ने पार्थिव शरीर को स्वदेश भेजने की औपचारिकताओं के नाम पर 8 लाख रुपये की मांग रखी है. एक साधारण श्रमिक पृष्ठभूमि से आने वाले इस परिवार की माली हालत ऐसी नहीं है कि वे इतनी बड़ी धनराशि का इंतजाम कर सकें. आर्थिक विवशता और शोक में डूबे परिजनों ने प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों से तुरंत मदद की गुहार लगाई है.
अनाथ हुए दो मासूम बच्चे
सुनेश राम अपने पीछे दो बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनमें उनकी 18 वर्षीय पुत्री खुशबू कुमारी और 12 वर्षीय पुत्र जिगर कुमार शामिल हैं. घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य के चले जाने के बाद दोनों बच्चों के भविष्य, शिक्षा और पालन-पोषण पर गहरा संकट आ गया है. दोनों बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य इस उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं कि उन्हें अपने पिता का चेहरा आखिरी बार देखने को मिल जाए.
सांसद और जिलाधिकारी से त्वरित हस्तक्षेप की अपील
अत्यंत विकट परिस्थिति को देखते हुए परिवार ने गोपालगंज के स्थानीय सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन और जिले के जिलाधिकारी को पत्र प्रेषित कर तत्काल हस्तक्षेप करने की प्रार्थना की है. सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर अंगोला में भारतीय दूतावास के जरिए त्वरित सहायता मुहैया कराने का आग्रह किया है. सांसद ने भरोसा दिलाया है कि भारत सरकार और संबंधित राजनयिक मिशन आवश्यक कदम उठाकर पार्थिव शरीर को बिना किसी अनुचित आर्थिक बोझ के जल्द से जल्द गोपालगंज पहुंचाने का प्रयास करेंगे.
























