मुंबई में एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सचिव क्लाइड क्रास्टो ने 22 अक्टूबर को सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष पर झूठे आरोप लगाकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है और केवल एक वैध चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से ही मौजूदा सरकार को बदला जा सकता है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मुद्दे पर भाजपा का रवैया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करना यह साबित करता है कि सत्तारूढ़ दल को निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया में कोई भरोसा नहीं है।
विपक्ष का हमला और इस्तीफे की मांग
विपक्षी दलों की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि भाजपा को इस बात का पूरा अंदेशा है कि आगामी चुनावों में जनता सत्ता परिवर्तन कर देगी। इसी डर के कारण वह विपक्षी दलों को लगातार निशाना बना रही है। एसआईआर प्रक्रिया में कथित तौर पर सामने आई अनियमितताओं के चलते पूरा विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए क्लाइड क्रास्टो ने एक प्रचलित कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भाजपा का यह रवैया पूरी तरह से उल्टा चोर कोतवाल को डांटे जैसा है।
देशभर में एसआईआर पर छिड़ा विवाद
मौजूदा समय में एसआईआर को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं और मतदाता सूची से नाम काटे जाने की आशंकाओं पर लंबी बहस छिड़ी हुई है। इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल हैं। विपक्षी दलों का यह भी आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान देश के गरीबों, प्रवासियों और समाज के कमजोर वर्गों के मतदाताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत चुनाव आयोग का यह स्पष्ट पक्ष रहा है कि मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना तथा उसमें से अपात्र या मृत लोगों के नाम हटाना एक पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव के लिए बेहद आवश्यक कदम है।
सड़कों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा घमासान
यह पूरा राजनीतिक विरोध अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह देश की संवैधानिक संस्थाओं और सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है। बीते 12 अक्टूबर को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया और कथित चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। विपक्ष की मुख्य मांग चुनाव आयोग के शीर्ष पद पर बैठे ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा देना और पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरतना है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का साफ कहना है कि एसआईआर का एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची की अशुद्धियों को दूर करना और हर एक पात्र नागरिक का नाम सूची में सुरक्षित करना है। इस पूरे विवाद का बुनियादी सवाल यही बना हुआ है कि मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के दौरान देश के किसी भी योग्य नागरिक का मतदान करने का मौलिक अधिकार किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।


















